गेहूं, भारत में खाद्यान्न एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ एक औषधीय महत्व वाली फसल भी है। इसमें लगभग 65-75 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 8-16 प्रतिशत तक प्रोटीन एवं 1-2 प्रतिशत वसा के साथ-साथ 1.5-2 प्रतिशत तक राख होती है। स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से भरपूर गेहूं के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्तियां, गेहूं के ज्वारे अथवा गेहूं ग्रास के नाम से जानी जाती हैं। शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति होने के कारण इसको ‘ग्रीन ब्लड’ कहा जाता है। यह केवल एक आयुर्वेदिक औषधि ही नहीं बल्कि एक उत्तम आहार भी है। गेहूं के ज्वारों को जूस, पाउडर एवं टेबलेट किसी भी रूप में ले सकते हैं, लेकिन ताजा जूस के सेवन से अधिक लाभ मिलता है। गेहूं ग्रास जूस के प्रतिदिन सेवन से शारीरिक सहन शक्ति एवं ऊर्जा तो बढ़ती ही है, साथ ही कई प्रकार के रोगों के निदान में भी मदद मिलती है। अमेरिकी वैज्ञानिक डा. आन विग्मोर के अनुसार अधिकांश रोगों में गेहूं ग्रास के रस के सेवन से कुछ न कुछ लाभ अवश्य होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में अमीनो अम्ल, किण्वक (एंजाइम), विटामिन, प्रोटीन, क्लोरोपिफल, शर्करा, वसा एवं खनिज होते हैं। ये मानव शरीर की मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवन देते हैं तथा शारीरिक पी-एच को संतुलित रखते हैं। गेहूं ग्रास तैयार करने की विधि इसे तैयार करने लिए 10-12 इंच व्यास के 3-4 इंच गहरे कम से कम सात गमलों की व्यवस्था करें। सभी गमलों के पेंदे में बने छेद को एक पतले पत्थर के टुकड़े से ढक दें। इसके बाद मृदा और जैविक खाद को अच्छी तरह मिलाएं। गमलों में मृदा की डेढ़-दो इंच मोटी परत बिछा दें आरै पानी छिड़क दें। इस बात का ध्यान रखें कि मृदा में रासायनिक खाद या कीटनाशक के अवशेष न हों। गमलों को दिनवार जैसे-रविवार, सोमवार, मंगलवार इस प्रकार सातों गमलों पर सातों दिनों के नाम लिख दें। गेहूं ग्रास तैयार करने के लिए साफ-सुथरे एवं मोटे बीजों का चयन करना चाहिए। रात को सोते समय लगभग 100 ग्राम गेहूं को एक जग में भिगोकर रखें। अगले दिन गेहूं के दानों को धोकर निथार लें। सप्ताह की शुरुआत के अनुसार पहले गमले में जिस पर रविवार लिखा है, उस गमले में गेहूं के बीज को एक परत के रूप में बिछाकर ऊपर से थोड़ी मृदा डाल दें आरै पानी से सींच दें। गमले को किसी छायादार स्थान पर बरामदे या खिड़की के पास रखें, जहां पर पर्याप्त प्रकाश एवं हवा आती हो, लेकिन गमलों पर धूप की किरणें सीधी नहीं पड़ती हों। अगले दिन सोमवार लिखे गमले पर इसी प्रकार गेहूं के बीजों की बुआई करें। इस प्रक्रिया को क्रमानुसार बाकी बचे पांच गमलों पर भी अपनाएं। मृदा को नम एवं हल्की गीली रखने के लिए गमलों में रोजाना कम से कम 2-3 बार हल्का पानी दें। गमलों में नमी बनाए रखने के लिए शुरू के दो-तीन दिन गीले कपड़े से भी ढक सकते हैं। पानी देने के लिए स्प्रे बोतल का प्रयोग कर सकते हैं। गर्मी के मौसम में ज्यादा पानी की आवश्यकता रहती है, पर हमेशा ध्यान रखें कि मृदा नम एवं गीली बनी रहे। सात दिनों के बाद 5-6 पत्तियों वाले 7-8 इंच लंबे गेहूं के पौधे तैयार हो जाते हैं। इन गेहूं के पौधों/ज्वारों/ग्रास घास को मृदा की सतह के ऊपर से काटकर पानी से अच्छी तरह धो लें। इस तरह आप प्रतिदिन एक गमले से गेहूं ग्रास को काट सकते हैं। गेहूं ग्रास की कटाई प्रत्येक गमले से 4-5 बार ली जा सकती है। कटी हुई गेहूं ग्रास को धोकर मिक्सी के छोटे जार में थोड़ा पानी डालकर पीस लें और छननी से छानकर उपयोग कर सकते हैं। उपयोग की विधि गेहूं ग्रास के जूस को सामान्यतः 60-120 मि.ली. प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसके बाद आधा घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। किसी रोग से पीड़ित होने पर 30-60 मि.ली. जूस का सेवन दिन में तीन-चार बार किया जा सकता है। कुछ लोगों को शुरू में जूस पीने से जी मिचलाता है। ऐसी स्थिति में कम मात्रा से शुरूआत करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। गेहूं ग्रास के जूस में सब्जियों एवं फलों के जूस जैसे-सेब फल, अनन्नास आदि के जूस को मिलाया जा सकता है। कभी भी खट्टे फलों के रस जैसे-नीबू, संतरा आदि को नहीं मिलाना चाहिए। खट्टापन गेहूं ग्रास के जूस में विद्यमान एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देता है। इसमें नमक, चीनी व कोई अन्य मसाला भी न मिलाएं। गेहूं ग्रास जूस पीने के औषधीय लाभ इसका सेवन करने से शरीर की लाल रक्त कोशिका की संख्या में वृद्धि होती है। गेहूं ग्रास के जूस में एंजाइम, अमीनो अम्ल एवं विटामिन ‘बी’ प्रचुर मात्रा में होने के कारण पाचन विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ पंहुचता है। जोड़ों के दर्द एवं हड्डियों की कमजोरी में गेहूं ग्रास के जूस का सेवन लंबे समय तक करने पर आराम मिलता है। यह फाइबर का एक उत्तम स्त्राेत है, जाे कब्ज के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। गेहूं ग्रास जूस में विटामिन बी-17 या लेट्रियल एवं सेलेनियम तत्व एंटी ऑक्सीडेंट एवं रक्तशोधक होते हैं। ये दोनों ही शक्तिशाली कैंसररोधी तत्व हैं। क्लोरोफिल एवं सेलेनियम शरीर की रक्षा प्रणाली को शक्तिशाली बनाने में मदद करते हैं। गेहूं ग्रास का जूस विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘ई’ और ‘के’, कैल्शियम, पोटेशियम, लोहा, मैग्नीशियम, सोडियम, सल्फस एवं 17 प्रकार के अमीनो अम्ल का सबसे समृद्ध स्रोत होने के कारण मानव शरीर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। इस जूस को पीने से मूत्राशय व गुर्दा (किडनी) संबंधी रोग दूर होते हैं। यह पथरी दूर करने में भी सहायक है तथा आंखों की रोशनी भी बढ़ाता है। गेहूं ग्रास में पोषक तत्वों का विश्लेषण गेहूं ग्रास का जूस पोषण संबंधी विकारों को पूरा करके मानव कोशिका, रक्त, ऊतकों एवं अंगों को बंद करने वाले अवशेषों को हटाकर अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। इसके ताजा जूस में क्लोरोफिल, सक्रिय एंजाइम, विटामिन एवं अन्य पोषक तत्वों की उच्च साद्रंता होती है। इसलिए इसको मानव शरीर के लिए पोषक तत्वों एवं विटामिन का पावर हाउस माना जाता है। गेहूं ग्रास में विद्यमान पोषक तत्वों की जानकारी सारणी में दी गई है। गेहूं ग्रास का रस एक अद्भुत एवं शक्तिशाली पेय है, जिसका उपयोग सदियों से होता आ रहा है। इसके स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों को आम जनों तक पहुंचाकर इसके महत्व को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य लाभ उठाया जा सकता है। सारणीः ताजा 100 ग्राम गेहूं ग्रास में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा मूल पोषक तत्व खनिज लवण विटामिन कैलोरी 21.0 कैलोरी लोहा 0.61 मि.ग्रा. विटामिन ‘ए’ 427 आईयू पानी 95.0 ग्राम मैग्नीशियम 24.0 मि.ग्रा. विटामिन बी1 0.08 मि.ग्रा वसा 0.06 ग्राम पोटेशियम 147 मि.ग्रा. विटामिन बी2 0.13 मि.ग्रा कार्बोहाइड्रेट्स 2.0 ग्राम फाॅस्फाेरस 75.2 मि.ग्रा. विटामिन बी3 0.11 मि.ग्रा क्लोरोफिल 42.2 मि.ग्रा. जिंक 0.33 मि.ग्रा. विटामिन बी5 6.00 मि.ग्रा ग्लूकोज 0.80 ग्राम कैल्शियम 24.2 मि.ग्रा. विटामिन बी6 0.20 मि.ग्रा डायटरी रेशा 0.1 ग्राम सोडियम 10.3 मि.ग्रा. विटामिन बी12 <1 एमसीजी सेलेनियम <1 पीपीएम विटामिन ‘सी’ 3.64 मि.ग्रा विटामिन ‘ई’ 15.2 आईयू फाॅलिक अम्ल 29.0 एमसीजी स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), मंगल सिंह, अनुज कुमार, सत्यवीर सिंह, सेंदिल आर. रमेश चन्द, भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरियाणा)।