झारखंड में धान उत्पादन उन्नत कृषि तकनीक झारखंड राज्य की बहुसंख्यक आबादी का प्रमुख आहार चावल है। इस क्षेत्र में धान 71 प्रतिशत भूमि में उगाया जाता है। परन्तु इसकी उत्पादकता अन्य विकसित राज्यों की तुलना में बहुत कम है। अत: यह आवश्यक है कि उत्पादकता बढ़ाने के लिये धान की उन्नत कृषि तकनीक का ज्ञान किसानों को कराया जाये। धान कि उत्पादकता को प्रभावित करने के विभिन्न कारणों में भूमि के अनुसार किस्मों का चुनाव प्रमुख है। साधारणतया ऊँची जमीन में 80-100 दिनों तक की अवघि वाली किस्म, मध्यम भूमि में 100 दिनों से अधिक एवं 135 दिनों तक की अवघि वाली किस्मों एवं नीची जमीन में 135 दिनों तक की अवघि वाली किस्मों की अनुशंसा की जाती है। धान की उपयुक्त किस्में विभिन्न प्रकार के जमीन एवं परिस्थितियों के लिए धान की उपयुक्त किस्में जमीन के प्रकार अधिक उपजाऊ किस्में उन्नत किस्में ऊँची जमीन टॉड़-1 एवं 2 बाला, कावेरी, किरण, बिरसा धान-101 एवं कलिंग -111 ब्राउन गोड़ा 23-19 बिरसा धान-102, 105, 106, 107 मध्यम जमीन दोन-3 किरण, बाला, कावेरी, रासी पूसा-2-21, साकेत-4, पूसा-33, अन्नदा एवं बिरसा धान -201 सी.एच.-1037, सी.एच.-1039, सी.एच.-10 दोन-2 रतना, अर्चना, सीता, जया, आई.आर.36, सुजाता, बिरसा धान-202, राजेन्द्र धान-201, बिरसा धान- 201, 202, आई.आर.-8 एवं राजश्री बी.आर.-34, बासमती-370, राजेन्द्र धान-202 नीची जमीन दोन-1 कनक, बी.आर.-10, पन्त-4, महसूरी, पंकज, जगन्नाथ, राधा, जयश्री तथा पानी धान-2 बासमती-70, स्वर्ण (नाटी मंसूरी) बी.आर.-8, बी.आर.-8, बी.आर.-9, बी.आर.-10, टी. 141-एवं सुगंधा विशेष परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्में अधिक गहरे पानीवाले जमीन बी.आर.-13, बी.आर.-14, बी.आर.-49, बी.आर.-46, एवं जानकी गरमा मौसम पूसा 2-21, साकेत-4, आई.आर.-36, बिरसा धान- 201 एवं कलिंग-111 कीड़े मकोड़े से अवरोधी किस्में सांढ़ा-कीट अवरोधी किस्में, राजेन्द्र धान-202, सरसा, उदय, शक्ति सामलाई एवं नीला धड़ छेदक अवरोधी किस्में साकेत-4 एवं रत्ना झुलसा रोग अवरोधी किस्में बिरसा धान-101, आई.आर- 36 एवं रासी बहुद्देशीय किस्में आई.आर-36- सांढ़ा-कीट एवं धड़ छेदक अवरोधी झुलसा रोग अवरोधी। जिंक और जस्ता की कमी तथा अल्युमिनियम एवं जस्ता से टौक्सीक जमीन के लिए भी उपयुक्त जंगली धान से निराकरण के लिए बी.आर.- 11, बी.आर.- 2, बी.आर.- 18 सुखा अवरोधी किस्में बाला, बिरसा धान-101 रासी विभिन्न किस्मों के गुण (क) अधिक उपजाऊ किस्म 1. बाला : यह बौने कद का किस्म है और इसके पौधे की ऊँचाई 85-90 सेंटी मीटर होती है। बोआई से फसल तैयार होने तक 95-100 दिन लगते है। दाने का आकार मध्यम-मोटा होता है। इसकी पैदावार 30-40 क्विंटल/हेक्टेयर होती है। यह प्रभेद झारखंड की ऊँची जमीन में सीधी बोआई के लिए भी उपयुक्त है। 2. कावेरी : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 85-90 सें.मी। फसल तैयार होने की अवधि 100- 105 दिन। दाना मध्यम आकार का और ऊपज क्षमता 30-40 क्विं./हे. है। जमीन में सीधी बोआई के लिए भी उपयुक्त है। 3. बिरसा धान-101 : बौना कद। पौघे की ऊँचाई 85-90 से.मी.। अति-अगात किस्म है क्योंकि फसल तैयार होने की अवधि 80-85 दिन है। दाना लम्बा-मोटा आकार का और उत्पादक क्षमता 30-35 क्विं./हे. है। ऊँची जमीन सीधी बोआई के लिये उपयुक्त है क्योंकि यह सूखा-अवरोधी किस्म है। यह किस्म गरमा-धान की खेती करने के लिए उपयुक्त है। मिश्रित खेती एवं “कैश – क्रौप’’ लेने के लिए उपयुक्त है। 4. बिरसा धान-102 : इसके पौघे लम्बे होते हैं तथा 90 से 100 दिनों में परिपक्व होते हैं। बीज मोटा तथा दाने लाली लिये होता है। इसमे सूखा रोधी क्षमता होती है तथा खर-पतवार से भी प्रतिस्पर्धा कर सकता है। लम्बी प्रजाति होने के कारण इसमें नाईट्रोजन की मात्रा 30-40 क्विं./हे. मात्रा देने से 20-25 क्विं./हे. उपज मिल जाती है। 5. बिरसा धान-105 : इसके पौघे अर्ध बौने (10-15 से.मी. ) बीज छोटे पुष्ट तथा दाने सफेद होते है। 85 से 90 दिनों में परिपक्व होते हैं। यह प्रजाति झुलसा, धड़-छेदक, गाल मिज के प्रति रोधी है। इसकी उपज क्षमता 3.2 से 3.5 टन / हेक्टेयर है। टांड़-2 के लिए उपयुक्त। 6. बिरसा धान-106 : इसके पौघे 75 से 80 सें.मी., बीज छोटे पुष्ट तथा दाने सफेद होते है। 90 से 95 दिनों में परिपक्व होते हैं। औसत उपज 3.5 / 4.0 टन / हेक्टेयर तथा धड़-छेदक, गाल मिज और झुलसा के प्रति साधारण प्रति- रोधी। टांड़ -2 के लिए उपयुक्त। सुखा के प्रतिरोधी। 7. बिरसा धान-107 : अर्ध बौना किस्म (65-70 से.मी.), बीज छोटे पुष्ट तथा दाने सफेद होते है। 90 से 95 दिनों में परिपक्व होते हैं। उपज क्षमता 3.0 से 3.5 टन / हेक्टेयर। यह प्रजाति झुलसा, धड़-छेदक, गाल मिज के प्रतिरोधी है तथा टांड़ -2 के लिए उपयुक्त तथा मध्यम भूमि (दोन-3) में रोप के लिए भी उपयुक्त हैं। 8. पूसा 2-21 (कन्नाजी) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-95 से.मी. और फसल तैयार होने की अवधि 105-110 दिन। दाना मध्यम-मोटा तथा उपज क्षमता 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर। छोटा नागपुर के दोन-3 में रोपा के लिए तथा गरमा-मौसम में भी खेती के लिए उपयुक्त किस्म है। 9. साकेत-4 (सीआर 44-35) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-95 से.मी. और फसल तैयार होने की अवधि 110- 115 दिन। दाना लम्बा महीन एवं उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त किस्म है। गरमा-मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है। 10. पूसा-33: अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 85-90 से.मी तथा फसल तैयार होने की अवधि 100- 115 दिन। दाना लंबा, महीन एवं थोड़ा सुगंधित है। उपज क्षमता 30-35 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त। उत्तरी बिहार में गरमा-मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है। 11. अन्नदा (एम.डबल्वू.-10): मध्यम कद। पौधे की ऊँचाई 100-105 से.मी. और फसल तैयार होने की अवधि 105-110 दिन है। इसके दाने छोटे एवं मोटे तथा सफेद चावल है। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त है। 12. बिरसा धान-201 : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 65-90 से.मी. और फसल तैयार होने की अवधि 100- 105 दिन है। दाना मध्यम-मोटा तथा उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर तथा दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त तथा ऊँची जमीन में सीधी बोआई भी की जा सकती है। झुलसा रोग तथा धड़-छेदक से मध्यम-अवरोधी किस्म है। 13. रत्ना (सी आर 44-11) : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-100 से.मी. और फसल तैयार होने का समय 120- 125 दिन है। दाना लम्बा-महीन तथा उत्पादन क्षमता 40 -45 क्विंटल/हेक्टेयर है। झुलसा रोग तथा धड़-छेदक से मध्यम-अवरोधी किस्म है। दोन-2 में रोपा के लिए उपयुक्त है। 14. अर्चना : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से. मी। फसल तैयार होने का समय 40-45 दिन है। दाना लम्बा-महीन तथा उत्पादन क्षमता 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर है। खरीफ में दोन -2 में रोपा के लिए उपयुक्त है। 15. सीता : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी। फसल तैयार होने का समय 40-45 दिन है। दाना महीन एवं उत्पादन क्षमता 45-50 क्विंटल/हेक्टेयर है। पत्र-लाछन रोग के प्रति अधिक सहिष्णु है। खरीफ में दोन-2 में रोपा के लिए उपयुक्त है। 16. जया : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-108 से.मी. है। दाना मध्यम-मोटा एवं पैदावार 50-55 क्विंटल/हेक्टेयर है। खरीफ में दोन-2 में रोपा के लिए उपयुक्त है। 17. आई.आर.-36 : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100 से.मी. व अवधि 115-120 दिन है। दाना लम्बा-महीन औऱ उपज क्षमता 55-40 क्विंटल/हेक्टेयर है। बहुत तरह की बीमारी एवं कीड़े-मकोड़े से अवरोधी किस्म है। जिंक या जस्ता की कमी वाले जमीन तथा अल्युमिनियम और जस्ता से टौक्सिक जमीन में भी यह अच्छा पैदा देने की क्षमता रखता है। सूखा सहन करने की क्षमता है। छोटानागपुर क्षेत्र के लिए दोन-2 में रोपा के लिए विशेष कर उपयुक्त है। गरम मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है। 18. सुजाता (बी.जीर 90-2) : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 110-115 से.मी. तथा अवधि 125 दिन है। लम्बा-महीन एवं सफेद दाना उपज क्षमता 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर है। दोन-2 जमीन में रोपा के लिए उपयुक्त है। 19. बिरसा धान-202 : मध्यम कद। पौधे की ऊँचाई 125-130 से.मी तथा अवधि 125 दिन है। चावल मध्यम एवं सफेद है। झुलसा एवं सांढ़ा कीट से मध्य अवरोधी झुलसा रोग एवं धड़-छेदक से मध्य अवरोधी है। 60 कि.ग्रा. नेत्रजन पर भी यह 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर उपज देती है। साथ-साथ मध्यम कद होने के कारण पुआल की भी प्राप्ति होती है। यह छोटानागपुर क्षेत्र के दोन-2 जमीन में रोपा के लिए उपयुक्त है। मध्यम जमीन में (दोन-2) इसकी सीधी बोआई संभव है। 20. राजेन्द्र धान 201 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी फसल तैयार होने की अवधि 135 दिन है। चावल मध्यम लंबा तथा पतला है। पत्र-अंगमारी रोग के लिए अवरोधी है। दोन जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त है। 21. राजेन्द्र धान-202 (आई.ई.टी.-2895) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90 -100 से.मी, दाना मध्यम। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर, फसल तैयार होने की अवधि 130-135 दिन है। सांढ़ा कीट के लिए अवरोधी प्रभेद है और छोटानागपुर के सांढ़ा कीट ग्रसित क्षेत्र में रोपा के लिए उपयुक्त। 22. आई.आर.-8 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई100-110 से.मी, फसल तैयार होने की अवधि 130-135 दिन है। दाना मध्यम, उपज क्षमता 45-50 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-2 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त। 23. राजश्री : मध्यम कद। पौघे की ऊँचाई 125-130 से.मी, आकार मध्यम एवं सफेद चावल है। फसल तैयार होने की अवधि 135-140 दिन है। कम नेत्रजनीय खाद पर भी 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर उपज देने की क्षमता है। दोन-2 एवं दोन-1 में रोपा के लिए यह उपयुक्त। 24. महसूरी : लम्बा कद। पौधे की ऊँचाई 130-140 से.मी. तथा फसल तैयार होने की अवधि 145-150 दिन। दाना मध्यम तथा उपज क्षमता 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर, अधिक नेत्रजण देने पर भी 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर ही उपज संभव है। यह प्रकाश –संवेदी एवं ठंढ-सहिष्णु है। अतः समय पर बिचड़े तैयार करना आवश्यक है जिससे जुलाई महीने के अन्दर ही रोपनी की जा सके। दोन-1 में रोपा के लिए उपयुक्त है। अधिक नेत्रजनीय खाद के प्रयोग से पौधे जमीन पर गिर जाते हैं और उपज में काफी कमी आ जाती है। 25. पंकज : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. तथा फसल तैयार होने की अवधि 155-160 दिन। दाना मध्यम मोटा और सफेद है। ठंढ-सहिष्णु एवं प्रकाश-संवेदी होने के कारण यह अनुशंसा की गई है कि इसकी रोपनी 15 जुलाई तक अवश्य कर लें। किसी कारण अगर जुलाई के अंत तक रोपनी करना संभव नहीं हो पाये तो इसकी खनहीं करें। उपज क्षमता 50-60 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त। 26. जगन्नाथ : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. मध्यम लंबा एवं सफेद चावल है। फसल तैयार होने की अवधि 155-160 दिन है। प्रकाश-संवेदी किस्म है। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त। 27. राधा : अर्द्ध बौना कद। पौघे की उँचाई 110-115 से.मी. तथा फसल तैयार होने की अवधि 140 -145 दिन है। दाना मध्यम एवं चावल सफेद है। पत्र-लक्षण से अवरोधी तथा उपज क्षमता 50-55 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त। 28. जयश्री : लम्बा कद और पौधे की ऊँचाई -130-140 से.मी. है। फसल तैयार होने की अवधि 145-150 दिन एवं दाना मध्यम-महीन है। कम खाद पर भी यह 35-45 क्विंटल/हेक्टेयर पैदा देने की क्षमता है। अधिक नेत्रजनीय खाद के व्यवहार से पौधे गिर जाते हैं। दोन-1 जमीन में सीधी बोआई के लिए यह उपयुक्त। यह प्रकाश-संवेदी एवं ठंढ-सहिष्णु किस्म है। अत: समय पर उसकी खेती करना आवश्यक है। 29. पानी धीन-2 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. फसल तैयार होने की अवधि 145-150 दिन है। दाना मध्यम एवं उपज क्षमता 45-50 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त है। उन्नत-किस्में 1. ब्राउन गोड़ा 23-19 (बी.आर.-16) : लम्बा कद है। पौधे की ऊँचाई 130-140 से.मी। फसल तैयार होने की अवधि 95-100 दिन, दाना मोटा तथा चावल लाल रंग का है। उपज क्षमता 20-25 क्विंटल/हेक्टेयर तथा सूखा-सहिष्णु किस्म है। छोटानागपुर क्षेत्र के ऊँची जमीन में सीधी बोआई के लिए उपयुक्त। 2. सी.एच.-1007 (बी.आर.-47) : लम्बा कद है। यह चीन-देशीय धान है और इसे बिहार में कश्मीर से लाया गया है। इस धान की अवधि 105-115 दिन है। धान में टूण्डा नहीं होता है तथा इसका रंग सुनहला है। चावल सफेद तथा मध्यम मोटा है। इसकी उपज क्षमता 30-35 क्विंटल/हेक्टेयर है। यह सीधी बोआई और रोपा दोनों विधि के लिए उपयुक्त है और धान छोटानागपुर के गोड़ा धान का स्थान ले सकता है। 3. सी.एच.-1039 (बी.आर.-48) : यह भी सी.एच.-1007 की तरह है। सिर्फ इसकी अवधि ज्यादा है अर्थात् फसल बौने से काटने की अवधि 110-120 दिन है। छोटानागपुर के दोन-3 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त है। 4. सी.एच.-10 ( बी.आर.-24) : लम्बा कद है। भदई धान का यह प्रभेद भी चीन-देशीय है तथा इसे नगीना (उतर प्रदेश) से प्राप्त किया गया है। यह 100-110 दिन में तैयार हो जाता है। इसकी उपज क्षमता 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर। यह छिंटा तथा रोपा दोनों के लिए उपयुक्त है। चावल सफेद तथा मध्यम मोटा है। छोटानागपुर के दोन-3 जमीन के लिए उपयुक्त है। 5. बी.आर.-34 (2206-बी) : लम्बे कद का लोकप्रिय किस्म। पौधे की ऊँचाई 140-150 से.मी.। यह भी प्रकाश-संवेदी किस्म है अर्थात् बाली तभी निकलेंगे जब दिन छोटे और रात लम्बी होगी। जून में इसमें फूल आते है। फसल की कटनी मध्य नवंबर तक हो जाती है। दाना मध्यम प्रकार का मटियाला सफेद रंग लिए होता है। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर तथा छोटानागपुर के दोन-2 जमीन के लिए उपयुक्त है। 6. बासमती -370 : लम्बा कद है। फसल तैयार होने की अवधि 120-125 दिन है। चावल सफेद तथा लम्बा पतला है। यह सुगंधित धान है। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर तथा छोटानागपुर के दोन-2 जमीन के लिए उपयुक्त है। 7. बी.आर.-8 (498-2ए) : इस धान का चयन भागलपुर के स्थानीय किशोर धान से किया गया है। यह लम्बे कद का लोकप्रिय किस्म है। पौधे की ऊँचाई 140-150 से.मी है। इसकी बोआई जून में की जाती है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में इसमें फूल आ जाते हैं और कटनी दिसम्बर के पहले सप्ताह में की जाती है। चावल मध्यम किस्म का तथा हलका लाल होता है। यह खाद की अधिक मात्रा सहन कर सकता है और 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज पायी जा सकती है। यह दखिनाहा तथा टीप वर्न जैसे रोगों से शीघ्र आक्रांत नहीं होता है छोटानागपुर के दोन-1 जमीन में रोपा के लिए उपयुक्त है। धान की खेती पर देखिये यह विडियो स्त्रोत: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, काँके, राँची- 834006