परिचय बढ़ती हुई जनसंख्या, घटती जोत का आकार, जलवायु परिवर्तन, बाजार में कृषि उत्पादों की मांग और उनके दाम इन सबको सोच समझकर अगर कृषक अपनी खेती में मेहनत करें, तो यह लाभप्रद रोजगार सिद्ध हो सकता है। यही कार्य किया एक जुझारू, मेहनती, रचनात्मक, अभिनव तथा आधुनिक सोच वाले युवा श्री लोकराज मौर्य ने। आपके पिता श्री हरपाल मौर्य, उत्तर प्रदेश सरकार के नलकूप विभाग में एक कर्मचारी थे, जो वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त होने के पश्चात खेती को परंपरागत विधि से ही कर रहे थे। परिवार 3.5 एकड़ क्षेत्रफल में गोभी, मेन्था, गेहूं एवं आलू की खेती करके तथा उपज को स्थानीय बाजार में बिक्री कर किसी तरह जीवनयापन कर रहा था। इसके अतिरिक्त परिवार में 3 भैंस तथा उनके 3 पड्डे/पडिया भी थे, जिनसे परिवार के पोषण तथा दिन-प्रतिदिन के खर्चे चलते थे। श्री लोकराज को नौकरी करने के लिए घर से दूर रहना पड़ता था। पिताजी के कृषि कार्य को देखने के लिए सिर्फ उनके छोटे भाई ही सहायता कर रहे थे। श्री लोकराज मौर्य कम्प्यूटर साइन्स में स्नातकोत्तर हैं तथा बरेली शहर से 40 कि.मी. दूर स्थित ग्राम राजपुर कलां, तहसील-आंवला के निवासी हैं। आपने 10 वर्षों तक विप्रो नामक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नेटवर्क इंजीनियर के पद पर कार्य करने के बाद वर्ष 2018 में बहुराष्ट्रीय कम्पनी की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। खेती में नई तकनीकी को अपनाकर नए आयाम स्थापित करने का दृढ़ संकल्प किया। आपने कृषि विज्ञान केन्द्र, बरेली से सम्पर्क किया तथा यहां से मिले संरक्षित खेती के सुझाव तथा तकनीकी सलाह पर अमल करते हुए उद्यान विभाग, नाबार्ड एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग से वर्ष 2019 में एक एकड़ क्षेत्र में पॉलीहाउस का निर्माण कर रंगीन शिमला मिर्च (पीले एवं लाल रंग की) की खेती की शुरुआत कर संरक्षित खेती को स्वरोजगार एवं आय का जरिया बनाया। पॉलीहाउस पॉलीहाउस में खेती करना बदलते समय में कम क्षेत्रफल में अधिक मूल्य एवं गुणवत्ता वाली फसलों का अधिक उत्पादन करने वाली तकनीक है। इसकी मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसी को इन्होंने बदलते भारत की बदलती कृषि के लिए चुना। शिक्षा विकास का सबसे बड़ा अस्त्र होती है और यही बात श्री लोकराज जी ने सिद्ध की। आपने पॉलीहाउस तकनीकी को अपनाने का निर्णय करने के बाद उसमें उगाये जाने वाले उत्पादों के बारे में सोच-विचार किया कि कौन से उत्पाद के लिए पॉलीहाउस सफल सिद्ध हो सकता है। इस क्रम में उन्होंने तकनीकों से संबंधित विस्तृत जानकारी, सरकार द्वारा चलायी जा रही परियोजनाओं, बैंक से मिलने वाली सब्सिडी आदि का बहुत ही गहराई से अध्ययन किया। इसमें आपने विभिन्न संस्थानों, कार्यालयों और प्रांतों का भ्रमण भी किया। आपने बहुत से सफल और असफल कृषकों की परियोजनाओं का भी अध्ययन किया तथा उनकी सफलताओं के साथ-साथ असफलताओं का भी बड़ी बारीकी से विश्लेषण किया। इसके बाद आपने अपने पिताजी के सेवानिवृत्ति पर मिली धनराशि का सदुपयोग कर तथा शेष राशि बैंक ऋण के माध्यम से लेकर वर्ष 2019 में पॉलीहाउस का निर्माण किया। पूर्ण पॉलीहाउस के निर्माण में आपका कुल 40 लाख रुपये व्यय हुआ। इसमें राष्ट्रीय उद्यान मिशन के तहत कुल 25 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया तथा 19.66 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त कुछ और धन व्यय करके अपने पॉलीहाउस की गुणवत्ता में सुधार कर उसे और बेहतर बनाया। सारणी आय-व्यय गणना वर्ष उत्पादन/एकड़ उत्पादन/एकड़ लागत लाभ आंकलन टिप्पणी कुल लागत(रुपये/एकड़) कुल आय (रुपये/एकड़) शुद्ध आय (रुपये/एकड़) 2019-20 40.0 लाख योजना अन्तर्गत 40.0 लाख रुपये (रुपये 19.66 लाख सरकारी अनुदान) 2019-20 250 क्विंटल 9.98 लाख 20.00 लाख 10.02 लाख बैंक को देय लोन की किश्त 3.50 लाख रुपये वार्षिक 2020-21 350 क्विंटल 11.50 लाख 31.50 लाख 20.00 लाख पॉलीहाउस में रंगीन शिमला मिर्च की खेती का चुनाव इसलिए किया क्योंकि बरेली जनपद देश की राजधानी नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मध्य स्थित होने के कारण ये दो बड़े बाजार 6 से 7 घण्टे की दूरी उपलब्ध थे, जहां इसकी बहुत ज्यादा मांग है। इन बाजारों में रंगीन शिमला मिर्च बेंगलुरु तथा हिमाचल प्रदेश से आती है। इसके साथ ही बरेली एवं आसपास के शहरों में भी इसकी मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। श्री लोकराज ने रंगीन शिमला मिर्च के बीज से लेकर उसकी पूर्ण तुड़ाई तक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। देश में सबसे अधिक कीटनाशक का प्रयोग करके उत्पादित होने वाली सब्जियों में से एक शिमला मिर्च या रंगीन शिमला मिर्च है और इसीलिए कीटनाशक को न्यूनतम प्रयोग करने के प्रयास पर भी आपने खासा ध्यान दिया । उत्पादों में कीटनाशक के बचे हुए अवशेष हमारे खान-पान को अत्यधिक प्रभावित कर रहे हैं, जिसकी वजह से मानव शरीर विभिन्न रोगों से ग्रसित हो रहा है। इसके साथ ही दूसरे देशों में कृषि उत्पाद के निर्यात के लिए भी कीटनाशक अवशेषों की जांच की जाती है, जिनकी मात्रा अधिकतम अवशेष स्तर से कम ही होनी चाहिए, तभी आपके उत्पाद को दूसरा देश खरीदेगा। श्री लोकराज आनलाइन माध्यम से नीदरलैंड से रंगीन शिमला मिर्च का बीज आयात करते हैं। 60-70 प्रतिशत जैविक खाद, जैविक तरल पदार्थ जैसे-बायो एनपीके, माइकोराइजा, वर्मीकम्पोस्ट खाद आदि का ही प्रयोग करते हैं। जैविक पदार्थों के प्रयोग से इन रसायनों पर होने वाला खर्चा कम होता है। गुणवत्ता बनी रहती है और इसकी शेल्फ लाइफ भी अन्य सब्जियों की तुलना में अधिक होती है। आप नई प्रौद्योगिकी फर्टिगेशन पद्धति से पौधों में पानी के साथ-साथ पोषक तत्व प्रदान करते हैं। तापमान व नमी के लिए ह्यूमीडिफायर व फौगर का प्रयोग करते हैं। इससे फसल उत्पादन व गुणवत्ता बढ़ने के साथ-साथ पानी की भी बचत होती है। पौधे की अधिक लम्बाई के कारण आप धागों से इन पौधों को बांधते हैं, जिससे नए कल्ले व टहनियों को विकसित होने में सहायता मिलती है। सामान्य पॉलीहाउस सामान्यत पॉलीहाउस में रंगीन शिमला मिर्च 10 माह की फसल है। आप निरन्तर वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के सम्पर्क में रहकर इसकी अवधि को बढ़ाकर 11 माह तक ले जाने में सफल रहे हैं। इसके लिए आप माइकोराइजा का प्रयोग करते हैं, जो नई जड़ों के निर्माण में सहायता करता है तथा एक माह तक न्यूनतम लागत में अतिरिक्त पैदावार प्राप्त होती है। प्रायः पॉलीहाउस की एक बड़ी समस्या मृदा में निमेटोड का आक्रमण होने की है। एक बार यह समस्या हो जाने के बाद इसका निस्तारण नहीं हो पाता है। श्री लोकराज ने विशेषज्ञों के सहयोग तथा अपनी मेहनत से इसको भी नियंत्रित करने में सफलता पायी है।फसल की तुड़ाई के बाद विपणन के लिए रंगीन शिमला मिर्च के आकार, रंग, कठोरता, वजन व अन्य गुणों को ध्यान में रखते हुए उसकी ग्रेडिंग, वजन तथा पैकिंग करते हैं। इसके बाद रंगीन शिमला मिर्च का गन्तव्य मेट्रोपालिटन शहरों के लिए परिवहन किया जाता है। पॉलीहाउस से वह सीधा अपना उत्पाद दिल्ली की आजादपुर मंडी, बरेली जिले की घरेलू मांग, कानपुर, लखनऊ, चंडीगड़ आदि बड़े शहरों में विक्रय एवं नेपाल को निर्यात भी कर रहे हैं। आपके पॉलीहाउस में रंगीन शिमला मिर्च (लाल व पीली शिमला मिर्च) के प्रथम वर्ष 2019-20 में उत्पादन अवधि कम होने तथा लॉकडाउन के कारण विक्रय संबंधी समस्यायें होने के कारण 250 क्विंटल की उपज हुई। औसत 8000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री कर आपको लगभग 10 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित हुई। वर्ष 2020-21 में 350 क्विंटल की उपज हई और औसत विक्रय दर 9000 रुपये प्रति क्विंटल से लगभग 20 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित हुई। रंगीन शिमला मिर्च की खेती इसके साथ का पूर्ण प्रबंधन श्री मौर्य स्वयं ही करते हैं। अपने ही गांव के पांच युवाओं को वर्षभर रोजगार प्रदान करते हैं। रंगीन शिमला मिर्च की आधुनिक संरक्षित खेती करके श्री लोकराज का जनपद में एवं कृषक समाज में मान-सम्मान बढ़ा है। प्रशासन द्वारा कृषकों के कल्याण के लिए बनी विभिन्न जनपद स्तरीय समितियों के आप सदस्य है। कृषि विज्ञान केन्द्र, बरेली में एक विशेषज्ञ के रूप में कृषकों को अतिथि व्याख्यान देते हैं। आकाशवाणी के बरेली एवं रामपुर केन्द्र से रेडियो वार्ताओं द्वारा भी कृषकों को लाभान्वित करते हैं