परिचय भारतीय किसान खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों को भी व्यावसायिक स्तर पर उगाकर सामान्य से अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। इसी क्रम में किसान गिलोय लगा सकते हैं, जो आसानी से लग जाती है। इस पर कीटनाशकों, हानिकारक रसायनों एवं रासायनिक खाद पर होने वाला व्यय भी बच जाता है। गिलोय (तिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) एक प्रकार की बेल है, जो आमतौर पर जंगलों-झाड़ियों में पाई जाती है। प्राचीनकाल से ही गिलोय को एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके फायदे को देखते हुए हाल के कुछ वर्षों से लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढी है और अब लोग गिलोय को अपने घरों में लगाने लगे हैं। अभी भी अधिकांश लोग गिलोय की सही पहचान नहीं कर पाते हैं। जानकारी के लिए बता दें, कि गिलोय की पहचान करना बहुत ही आसान है। इसकी पत्तियों का आकार पान के पत्तों के जैसा होता है और यह गहरे हरे रंग का होता है। गिलोय को गुडूची, अमृता आदि नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद कहता है कि गिलोय की बेल, जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसके गुणों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती है। इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय की बेल को औषधि के लिहाज से सर्वोत्तम माना जाता है। गिलोय के विभिन्न भागों जैसे-जड़, पत्ती, तने के प्रयोग से जीव-जन्तु व मानव अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। गिलोय अपने औषधीय गुणों के कारण दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसके नियमित सेवन से शरीर के कई रोग दूर हो जाते हैं एवं शरीर स्वस्थ रहता है। गिलोय में कई पोषक तत्व पाये जाते हैं जैसे-ग्लूकोसाइड, टीनोस्पोरिन , पामेरिन, टीनोस्पोरिक एसिड, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन आदि। गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटीऑक्सीडेंट एवं एंटी-पायरेटिक आदि गुण मौजूद होते हैं। कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं जैसे-शरीर में सूजन, दर्द , बुखार, गठिया, डायबिटीज, मूत्र संबंधी रोग, पाचन संबंधी समस्या, रक्त शोधन आदि में यह लाभदायक है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाकर शरीर को रोगों से लड़ने में सहायता प्रदान करती है। बहुत कम औषधियां ऐसी होती हैं, जो वात, पित्त एवं कफ, तीनों को नियंत्रित करती हैं, गिलोय उनमें से एक है। वर्तमान में कोरोना महामारी (कोविड-19) से पूरा देश लड़ रहा है। इस विषाणु से बचने के लिए चिकित्सक भी गिलोय का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं। यह कई रोगों से लड़ने में शक्ति प्रदान करती है, जिस कारण इसे शक्तिवर्धक औषधि भी कहते हैं। गिलोय सेवन से लाभ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना कई ऐसे बच्चे व वयस्क हैं, जो जल्द ही बीमार हो जाते हैं। ऐसे लोगों को गिलोय का जूस या वटी का निरंतर सेवन करवाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। डायबिटीज विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट की तरह काम करती है और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित रखने में असरदार भूमिका निभाती है। यह बढ़ते हुए ब्लड शुगर लेवल (रक्त में शर्करा की मात्रा) को कम करती है। इन्सुलिन (हार्मोन) स्राव को बढ़ाती है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। इस प्रकार गिलोय मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत उपयोगी औषधि है। अस्थमा अस्थमा अथवा दमा रोग से पीड़ित मरीजों के उपचार में गिलोय को चबाने या गिलोय वटी के सेवन से लाभ मिलता है। अपच पाचन संबंधी समस्याओं जैसे-कब्ज, के अपच या एसिडिटी से जो लोग परेशान रहते थ हैं, उनके लिए गिलोय अत्यंत फायदेमंद औषधि है। इसका काढ़ा, पेट के कई रोगों को दूर रखता है। अपच और कब्ज से छुटकारा पाने के लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करें। गठिया गिलोय में एंटी-आर्थराइटिक गुण होते हैं। इन्हीं गुणों के कारण यह गठिया रोग में आराम दिलाने में कारगर है। खासतौर पर, जो लोग जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं, उन्हें निरंतर गिलोय के सेवन से आराम मिलता है। एनीमिया गिलोय में आयरन होने के कारण यह शरीर में खून की कमी को दूर करने में सहायक है। आमतौर पर महिलायें एनीमिया से ज्यादा पीड़ित रहती हैं। गिलोय खून की कमी को दूर कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। महिलाओं को गिलोय का जूस 10-15 मि.ली. शहद अथवा पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से लाभ मिलता है। आंखों की समस्या गिलोय का प्रयोग आंखों की समस्या को दूर करता है। इसके निरंतर प्रयोग से आंखों की रोशनी बढ़ती है, जिससे चश्मे के बिना भी साफ देख सकते हैं। गिलोय को जल में उबालकर ठंडा करने के बाद पलकों को धोने से आंखों के कई प्रकार के फंगल एवं पैरासायटिक रोग दूर हो जाते हैं। बुखार गिलोय में एंटीपायरेटिक गुण होते हैं, जिसके निरंतर सेवन से पुराने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है। इसी वजह से मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर रोगों में इसके सेवन की सलाह दी जाती है। खांसी गिलोय में एंटीएलर्जिक गुण होते हैं, जिससे खांसी में जल्द राहत मिलती है। कई दिनों से खांसी ठीक न होने पर गिलोय काढ़ा बनाकर शहद के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करने से खांसी जल्द ठीक हो जाती है पीलिया रोग पीलिया में गिलोय का सेवन बहुत ज्यादा लाभदायक होता है। पीलिया रोग के उपचार के लिए गिलोय की पत्तियों को सुखाकर चूर्ण र बना लें। इस चूर्ण का सुबह-शाम सेवन करें , या गिलोय के 20-25 पत्तों को पीसकर दही छाछ में मिलाकर सेवन करने से पीलिया ठीक हो जाता है। गिलोय का सेवन अत्यंत सावधानीपूर्वक करना चाहिए अथवा चिकित्सक के परामर्शानुसार प्रयोग करना चाहिए। गिलोय को घरों में सजावटी पौधे के रूप में भी लगा सकते हैं। गिलोय सेवन जूस के रूप मेंगिलोय की पत्ती व बेल को अच्छी तरह से साफ कर एवं मसल कर रस निकाल लें। इसके बाद गर्म पानी में उबालकर ठंडा कर जूस बनाकर सेवन करें। काढ़े के रूप मेंगिलोय की बेल को साफ कर लें। उसमें 5 पत्ती तुलसी, 2 लौंग और 4 दाने काली मिर्च मिलाकर पानी में उबालें। इसके बाद ठंडा कर दिन में दो बार सेवन करें। गोलियों (वटी) के रूप मेंगिलोय की वटी (गोलिया) बाजार में उपलब्ध हैं। 2-2 गोलियां वयस्क को एवं 1-1 गोली बच्चों को दिन में दो बार दें अथवा चिकित्सक के परामर्श अनुसार सेवन करें। चूर्ण के रूप मेंगिलोय को सुखाकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी या शहद के साथ सेवन करना चाहिए। अनियंत्रित सेवन से नुकसान गिलोय के सेवन से नुकसान बहुत ही कम लोगों में देखा गया है। इसके अनियंत्रित मात्रा में सेवन से हानिकारक प्रभाव पड़ता है। गिलोय के अधिक सेवन से कभी-कभी अपच हो जाती है। इसके सेवन से पेट में जलन होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। गिलोय खून में शर्करा की मात्रा को कम करता है, जिससे मधुमेह के मरीजों को परेशानी हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। गिलोय के सेवन से परेशानी होने पर नजदीकी चिकित्सक से सलाह लें। स्रोत: फल-फूल पत्रिका(आईसीएआर), मनोज कुमार-सहायक प्राध्यापक, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय,मुरादाबाद, (उत्तर प्रदेश); शिवांशु तिवारी-एस.आर.एफ, गोविन्द वल्लब पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर, (उत्तराखंड)।