सुगन्धित पौधे - लेमन ग्रास का उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रश्न: प्रमुख रूप से कौन-कौन सुगन्धित पौधे हैं जिनकी खेती एवं प्रसंस्करण तकनीकी उपलब्ध हैं? उत्तर: सुगंधित पौधों के वर्ग में मुख्य रूप से जो पौधे हैं, वे हैं – लेमन ग्रास, सिट्रोनेला, तुलसी, जिरेनियम पामारोजा/रोशाग्रास। नींबू घास की दो प्रजातियाँ – सी. फ्लेसुसोयम – भारत में पाई जाती है, जबकि सी. स्टेरिट्स – दक्षिणी पूर्वी देशों में पाई जाती है। प्रश्न: सिट्रोनेला ग्रास एवं लेमन में पाये जाने वाले प्रमुख अवयवयों/घटकों के नाम उत्तर: सिट्रोनेला/नींबू घास की व्यवसायिक खेती तेल प्राप्ति के लिए की जाती है। इनकी पत्तियों को आसवित करके तेल निकाला जाता है। नींबू घास में मुख्य तेल “सिट्राल” पाया जाता है – 80-90%। इसमें नींबू जैसी तीक्ष्ण गंध होती है। नींबू घास – सिट्राल – अल्फा आयोनोन – विटामिन ए, बीटा आयोनोन – तीव्र गंध वाले तत्व। सिट्रोनेला के पत्तों को आसवित करके निम्न तत्व पाये जाते हैं, जो प्रमुख हैं – सिट्रोनेला 12-18% जिरेनियम 12-15% सिट्रोनेलोल 3.8% एवं अन्य घटक। प्रश्न: नींबू घास की अन्य प्रमुख बातें उत्तर: ग्रामनी फैमली की खेती भारत में तमिलनाडु, आसाम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में होती है। इसकों “चायना ग्रास”, “मालावार ग्रास”, “कोचीन ग्रास” आदि नामों से जाना जाता है। इसका विश्व में उत्पादन 1600 टन तेल, भारत में 600 टन, निर्यात 70 टन। भारत एवं ग्वाटेमाला लेमन ग्रास के प्रमुख उत्पादक देश हैं। प्रश्न: इन सुगंधित फसलों की कृषि तकनीकें उत्तर: यह बहुवर्षीय (5 वर्ष), बहुउद्देशीय तेलयुक्त सुगंधित घास है, जिसे उष्ण एवं उपोष्ण दोनों प्रकार के जलवायु एवं बलुई दोमट, दोमट या लेटेराइट मिट्टी में सहज रूप से खेती की जा सकती है एवं अम्लीय तथा क्षारीय दोनों तरह के मृदा में खेती की जा सकती है। ऐसी जलवायु “जो गर्म एवं आर्द्र हो, पर्याप्त धूप पड़ती हो एवं वर्षा की मात्रा 200-250 सें.मी. एवं जल जमाव न हो। यह एक आदर्श स्थिति होता है। ढ्लाऊ तट वाली जमीन। प्रश्न: नींबू घास की खेती की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? उत्तर: नींबू की खेती, सिट्रोनेला से अलग, बीज एवं स्लिप दोनों विधि से की जा सकती है: (1) बीज द्वारा: प्रति हे. 2.0 किलो बीज की जरूरत पड़ती है एवं बीजों को नर्सरी में अप्रैल-मई में तैयार की जाती है एवं लगभग 60 दिन बाद खेत में रोपाई करते हैं। पौधा x पौधा 60 सें.मी. पंक्ति से पंक्ति, 45-60 सें.मी.। नींबू घास में नवम्बर-दिसम्बर में फूल लगते हैं। जनवरी-फरवरी में बीज बन जाता है एवं प्रति पौध 100-200 ग्राम बीज होता है। बीज रोपाई एक कम उपयोगी विधि है। खाद मुख्यत: गोबर की खाद 10 टन/एकड़ + नेत्रजन (50 किलो) स्फूर (16 किलो), पोटाश (16 किलो) + 2 टन गोबर खाद प्रति कटिंग। (2) स्लिप द्वारा: स्लिप द्वारा उपयोगी होता है। सर्वप्रथम लेमन ग्रास के पुराने परिपक्व पौध/जुडडो को उखाड़कर, उनसे लगी पुरानी पतली जड़ एवं सूखी पत्तियों को काट लेते हैं। बाद में इन जुड्डों से 1-2 स्लिप अलग करते हैं। यही स्लिप प्लांटिंग मेटेरियल है। प्रति एकड़ – 15000 स्लिप की जरूरत होती है जो (1) 1.5 x 2 फुट की दूरी पर, (2) 2 x 2 फुट की दूरी पर। स्लिप का मूल्य 0.50 पैसा – 2 रु. तक होती है। प्रश्न: बिजाई का समय एवं विधियाँ उत्तर: बिजाई का उचित समय फरवरी-मार्च या जुलाई-अगस्त में कर सकते हैं। पानी की सुविधा हो तो वर्ष में कभी भी (अधिक गर्मी छोड़कर) हो सकती है। खेत में कुदाल द्वारा 5 से 8 सें.मी. के गहरे गड्ढे बनाते हैं। बुआई से पूर्व स्लिप लगी पत्तियाँ एवं पुरानी जड़े हटाकर गड्ढे में स्लिप को सीधा लगाकर मिट्टी से दबा देते हैं। रोपाई बाद पानी छोड़ देते हैं। दूरी 60 x 60, 60 x 45 सें.मी. । प्रश्न: बुआई के बाद अन्य विशेष सावधानियाँ – लेमन ग्रास उत्तर: * बुआई के बाद तुरन्त एक पानी दे देना चाहिए। गर्मियों में 10-12 दिनों के अंतराल पर पानी एवं सर्दियों में 8-10 दिन पर। जड़ पकड़ने के बाद फसल में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है परन्तु भूमि गीली चाहिए। फसल में पहली बार अधिक खरपतवार आता है, जिसे निराई-गुड़ाई से निकाल दें। पहली कटाई के बाद नींबू घास की बढ़वार बढ़ जाती है खरपतवार कम हो जाती है। खरपतवार कम करने के लिए बिजाई से पूर्व खेत में 0.5 किलो ड्योरान डाल सकते हैं। लेमन ग्रास में मुख्य रोग एवं कीट हैं – दीमक, शूटफ्लाई, व्हाईटफ्लाई। प्रश्न: लेमन ग्रास की कटाई एवं पत्तियों से तेल प्रसंस्करण की जानकारी एवं आवश्यक सावधानियाँ उत्तर: * बिजाई के लगभग 100-120 दिन पर पहली कटाई करते हैं। प्रथम कटाई के उपरांत प्रति 60-70 दिन बाद अगली कटाई करते हैं। कटाई की प्रक्रिया लगातार 5 साल तक चलती है एवं प्रति वर्ष 3-5 कटाई की जाती है। उर्वरता, पानी एवं अनुकूल परिस्थिति। प्राय: लेमन ग्रास पौधा का जु निरंतर बढ़ता है जिससे आगामी कटाई में फसल से मिलने वाली हर्ब में निरंतर वृद्धि होती है। अच्छी फसल के लिए प्रति कटाई के बाद 2 टन/एकड़ कम्पोस्ट डालते हैं। लेमन ग्रास से तेल निकालने के लिए पत्तियों को काटकर खेत में कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं – मुरझाने के लिए; फिर छोटे-छोटे पीस में काटकर आसवन टैंक में आसवन हेतु डालते हैं। इससे 3-4 घंटे में अधिक तेल प्राप्त होता हैं। तेल की मात्रा प्रथम वर्ष कम एवं अगले वर्ष 100 किलो – 250 किलो/हे. निकलता है। प्रश्न: उन्न्तशील प्रजातियाँ कौन-कौन सी हैं? उत्तर: इसकी प्रमुख प्रजातियाँ/किस्में प्रगति, प्रमाण, कावेरी, कृष्ण, RLL-16, GRL-1, OD-19. प्रश्न: आय-व्यय उत्तर: 6-8 हजार/हे. खर्च एवं 12-15 हजार/हे. आमदनी। तेल की कीमत – 250-350 रु. प्रति किलो। सुगन्धित पौधे –सेन्ट्रोनेला का उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रश्न: सिट्रोनेला घास के क्या महत्व हैं? उत्तर: सिट्रोनेला या जावा सिट्रोनेला एक सुगंधित घास है जिसका वैज्ञानिक नाम सिमबीपोगोनविनटेरियनस है जो पोएसी कुलमांहो जो बहुवर्षीय, बहुउद्देशीय घास है। इसके पत्तों को आसवित करके सिट्रोनेला ऑयल प्राप्त करते हैं। इसके मुख्य घटक हैं – सिट्रोनेलाल जेरेनियम सिट्रोनेलालएसिटेट, में जावा सिट्रोनेला ऑयल 32-45% है। इसमें जिरेनिय 11-15% होता है। प्रश्न: सिट्रोनेला ऑयल एवं इसके घटकों के क्या उपयोग हैं? उत्तर: इसके ऑयल एवं रासायनिक घटकों के कारण इसके उपयोग साबुन, क्रीम निर्माण, ऑडोमास इत्यादि में होता है। जिरेनियम घटक से इसका महत्व बढ़ जाता है। प्रश्न: प्रमुख प्रजातियाँ कौन-कौन हैं? उत्तर: जावा सिट्रोनेला एवं सिलोन सिट्रोनेला दो जातियाँ हैं। जावा सिट्रोनेला अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जिरेनियम की मात्रा अधिक होती है। जावा सिट्रोनेला के जुटटे अधिक फुटा हुआ है। पौधे की ऊँचाई थोड़ी कम एवं पत्ते चौड़े होते हैं एवं स्लिप थोड़ा मोटा होता है। लेमन घास: मुख्य प्रजातियाँ – मंजूषा, मंदाकिनी, बायो – 13। प्रश्न: मुख्य रूप से खेती वाले राज्य एवं विश्व में इसका पैदावार क्या है? उत्तर: मुख्य रूप से प. बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु इसके खेती वाले प्रमुख राज्य हैं। विश्व में इसकी तेल की उत्पादन लगभग 1600 टन/वर्ष है और भारत में लगभग 600 टन/वर्ष है। प्रश्न: खेती की तैयारी एवं आवश्यक सावधानी एवं उचित जलवायु क्या है? उत्तर: सिट्रोनेला फसल बलुई दोमट, दोमट एवं मृदा पी.एच. 6.0-7.5 में उचित होती है। आम्लीय या क्षारीय मृदा में खेती हो सकती है। उचित तापमान 9-35 डिग्री सें. के बीच, आर्द्रता 70-80% होती है। प्रश्न: भूमि की तैयारी कैसे करें? उत्तर: नींबू घास की तरह एक बार लगाने के बाद 5 साल तक फसल लेते हैं। खेत को अच्छी तरह तैयार कर दो-तीन बार क्रास में गहरी जुताई करके अन्तिम जुताई के साथ 10-15 टन/एकड़ गोबर की खाद डाल देते हैं। दीमक से सुरक्षा के लिए 10 किलो लिनडेन धूल/एकड़ डालते हैं। प्रश्न: सिट्रोनेला की बिजाई हेतु लगने वाले प्लांटिंग मटेरियल कौन-कौन से है? उत्तर: इसकी बिजाई स्लिप के द्वारा होती है। पुराने पौधे का जुट्टा निकालकर सूखे पत्ते एन जड़ अलग कर देते हैं। फिर एक-एक स्लिप को अलग कर लेते हैं। बुआई जुलाई-अगस्त या फरवरी-मार्च में उपयुक्त होता है। खेत में 5 से 8” गहरा गड्ढे करके, इन स्लिप को लाइनों में, 60 x 30 या 60 x 45 सें.मी. पर लगाते है एवं बिजाई उपरांत पानी छोड़ देते हैं। प्रति एकड़ 15,000 -22,000 स्लिप की जरूरत पड़ती है। प्रश्न: मुख्य बीमारियाँ कौन-कौन से हैं? उत्तर: तना छेदक: अप्रैल-जून, तने के पत्तियों में अंडे देता है। सुंडी तना को छेद देते हैं। 4-6 किलो/एकड़ कार्वोफुरान का छिड़काव। पीली पत्तियाँ: पत्तियाँ पीली पड़ने पर यानि फ़ॉस्फोरस की कमी की वजह से फेरस सल्फेट का छिड़काव। लाफ ब्लाइट (झुलसा रोग): बरसात में, सिट्रोनेला के पौधों पर कुरबुलेरिया एंडोपोगैसि नामक फफूंद-पत्ते सूख जाते हैं व काला पद जाता है। छिड़काव करें – डाइथेन एम – 45, 15 दिन के अंतराल पर 2 या 3 बार। प्रश्न: फसल की कटाई में सावधानियाँ एवं आसवन उत्तर: * एक बार लगाने के बाद पाँच वर्षों तक कटाई करते हैं। 3-5 कटाई/वर्ष। तेल की मात्रा उचित ध्यान देने से बढ़ता है। पाँच वर्षों तक तेल की मात्रा बराबर रहता है फिर घटने लगता है। प्रथम कटाई बिजाई के 120 दिन, फिर 60-70 दिन के अंतराल पर। फसल की कटाई भूमि से 15-20 सें.मी. पर से करनी चाहिए। प्रश्न: पत्तियों का प्रसंस्करण उत्तर: * सिट्रोनेला के पत्तियों को वाष्प आसवन/जल आसवन से करते हैं। आसवन में 3-4 घंटे लगते हैं एवं आसवन यंत्र नींबू घास वाली ही होती है। प्रति वर्ष 15-20 टन पत्तियाँ निकाली जाती है जिससे 100-150 किलो तेल निकलता है। द्वितीय एवं आगे वर्षो में 20-25 टन पत्ती/वर्ष एवं तेल 150-300 किलो। सामान्यत: 150-200 किलो पत्ती से 1 किलो तेल निकलता है। प्रश्न: खेती में अनुमानित लागत के बारे में बतायें? उत्तर: खेती के अवयव प्रथम वर्ष द्वितीय वर्ष तृतीय वर्ष चतुर्थ वर्ष पंचम वर्ष भूमि की तैयारी 1,000 - - - - प्लांटिंग मेटेरियल 11,000 - - - - 15,000 - - - - खाद/कीटनाशक 2,500 2,000 2,000 2,000 2,000 निराई-गुड़ाई 1,000 1,000 1,000 1,000 1,000 डिस्टेलेशन प्राप्ति 50/किलो 3,700 4,000 4,000 4,000 4,000 स्रोत: समेति तथा कृषि एवं गन्ना विकास विभाग, झारखंड सरकार