<div id="MiddleColumn_internal"> <h3><span>परिचय </span></h3> <p style="text-align: justify; ">आँवला एक अत्यंत ही कठोर फलदार पौधा है जो सूखे एवं असिंचित क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता है। आँवले के फल, फूल, पत्ती, छाल, जड़ का बहुत ही औषधिक महत्व है। आँवले के क्या औषधीय गुण हैं तथा इसकी सफल खेती कैसे करें:</p> <h3><span>औषधीय दृष्टि से आँवले का क्या महत्व है?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले को “अमृत फल” कहा गया है क्योंकि इसमें अनेक प्रकार के खनिज तत्व, विटामिन, एंटीऑक्सीडेटन्ट, फीनाल आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। आँवले का प्रयोग च्यवनप्राश, त्रिफला में प्राचीन समय से हो रहा है। इससे अनेक प्रकार के परिरक्षित पदार्थ जैसे – जैम, मुरब्बा, कैन्डी, शरबत आदि बनाये जा सकते हैं। प्रमुख औषधीय गुण हैं –</p> <p style="text-align: justify; ">1. एक चम्मच कच्चे आँवले के रस को शहद के साथ सेवन से क्षय रोग, दमा, खून का बहना, स्कर्वी, मधुमेह, खून की कमी, याददास्त, बालों के झड़ने, ठंडक आदि में फायदा पहुँचाता है।</p> <p style="text-align: justify; ">2. एक चम्मच ताजे आँवले के रस को 1 कप करेले के जूस में मिलाकर 21 दिनों तक सेवन से इन्सुलिन का स्राव बढ़ जाता है।</p> <p style="text-align: justify; ">3. प्रतिदिन आँवले के सेवन से शरीर में नयी स्फूर्ति रहती है।</p> <p style="text-align: justify; ">4. पत्तियों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुँह के छाले ठीक होते हैं।</p> <p style="text-align: justify; ">5. नयी पत्तियों को पीसकर मट्ठा के साथ सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है।</p> <p style="text-align: justify; ">6. आँवले के जड़ के सेवन से पीलिया रोग दूर होता है।</p> <p style="text-align: justify; ">7. फूल को खाने से मृदुरंचक-पेट साफ़ होता है।</p> <h3><span>आँवले की सफल खेती कैसे करें?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले की खेती के लिए जमीन का चुनाव करके मई के महीने में 10 मी. लाइन से लाइन<img class="image-right" title="Amala" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/91593e93094d92f92a94d93092393e93293f92f94b902-91593e-938902915941932/91493792794092f-92a94c92794b902-915940-916947924940/91d93e93091692394d921-92e947902-91493792794092f-90f935902-93894191790292794092f-92a94c92794b902-915940-93594d92f93593893e92f93f915-916947924940/Amala.jpg/@@images/0fbf65f9-24f5-4658-a0bf-3aa50a20569b.jpeg" alt="Amala" />तथा 10 मी. पौधे से पौधे की दूरी रखते हुए रेखांकन कर लें। निश्चित स्थान पर जून के महीने में 3 फुट लम्बा, 3 फुट चौड़ा और 3 फुट गहरा गड्ढा खोद लें। 15 दिन खुला छोड़ने के बाद गड्ढे में 20-25 कि.ग्रा. गोबर की खाद, 2 किलो करंज की खल्ली, 100 ग्रा. दीमक नासी पाउडर को मिट्टी के साथ मिलाकर भर दें। जुलाई माह में जब एक बरसात हो जाय तब गड्ढे के बीचोबीच खुरफी की सहायता से उन्नत किस्म के कलमी पौधों की रोपाई कर दें। रोपाई के बाद पानी दे दें। यदि बरसात हो रही है तो पानी की आवश्यकता नहीं होती। पौधों की समुचित देखभाल करते रहें और सर्दी के महीने में नये पौधों पर पुवाल या घास की छाया कर दें।</p> <h3><span>आँवले की कौन-कौन सी किस्में लगानी चाहिए?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले की नरेन्द्र आँवला-7, कंचन, नरेन्द्र आँवला-6, कृष्णा, चकैया, लक्ष्मी-52 किस्मों की रोपाई करने से किसानों को भरपूर पैदावार मिलेगी। पौधा लगाते समय यह ध्यान रखें कि एक साथ कम से कम 2 किस्में अवश्य लगायें अन्यथा फलोत्पादन प्रभावित होगा।</p> <h3><span>आँवले के पौधों में खाद कितना, कब और कैसे दें?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले के पौधे को प्रतिवर्ष जुलाई-अगस्त में खाद देने की जरूरत होती है। एक वर्ष के पौधे को 200 ग्रा. यूरिया, 350 ग्रा. सिं.सु.फा., 80 ग्रा. म्यूरेट ऑफ़ पोटाश की आवश्यकता होती है। यह मात्रा प्रतिवर्ष बढ़ाते रहना चाहिए और जब पौधा 10 वर्ष का हो जाय तब उसमें 2 कि.ग्रा. यूरिया, 3.5 कि.ग्रा. सिं.सु.फा., 800 ग्रा. म्यूरेट प्रतिवर्ष देना चाहिए। इसके साथ ही साथ गोबर की सड़ी हुई 70-80 कि.ग्रा. खाद प्रति वृक्ष प्रतिवर्ष देना चाहिए। अम्लीय मिट्टी में प्रत्येक तीसरे साल 2 कि.ग्रा. चूना प्रति पौधा के पद से देना चाहिए। खाद का प्रयोग थालों में नाली विधि से करनी चाहिए।</p> <h3><span>आँवले के फलों को कीड़ों एवं बीमारियों से कैसे बचाएं?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले के अच्छे गुणवत्ता के फल प्राप्त करने के लिए फलों पर बोरिक अम्ल (4 ग्रा./ली. पानी) के घोल का 2-3 छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करें। छिड़काव का सबसे उचित समय अगस्त-सितम्बर है। इसी समय यदि फलों में फलछेदक कीड़े का प्रकोप दिखाई पड़ता है तो इसी के साथ 1.5 मि.ली. मोनोक्रोटोफास दवा प्रति लीटर के दर से मिलाकर छिड़काव कर दें।</p> <p style="text-align: justify; "><span>आँवले के पेड़ों में कभी-कभी तना छेदक कीट लगता है, जो डालियों को कमजोर बना देता है और वे सूख या टूट जाती हैं। पता चलते ही छिद्रों को साइकिल की तीली से साफ़ करके उसमें पेट्रोल/मोनोसिल से भीगी रुई ठूंसकर बंद कर दें।</span></p> <h3><span>आँवले के फल झड़ने से बचाने के लिए क्या करें?</span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">उत्तर: आँवले के फलों को झड़ने से बचाने के लिए जब फल मटर के दाने जैसे हों तो उस पर प्लैनोफिक्स नामक दवा 2 मि.ली./5 ली. पानी में मिलाकर 15 दिनों के अंतराल पर 2 छिड़काव करें। यह अवस्था जुलाई-अगस्त में आती है।</p> <p style="text-align: justify; "><span>अत: यदि आँवले के पौधों को ठीक ढंग से रखरखाव किया जाय तो उनसे प्रति वृक्ष 150-200 कि.ग्रा. फल प्रतिवर्ष प्राप्त किया जा सकता है।</span></p> <p style="text-align: justify; "><strong> स्त्रोत एवं सामग्रीदाता : </strong><a class="external_link ext-link-icon external-link" href="http://sameti.org/" target="_blank" title=" समेति, कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)">समेति, कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार</a></p> </div>