<h3 style="text-align: justify;">भूमिका</h3> <p style="text-align: justify;">जेट्रोफा के पौधों को अधिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं पड़ती है | नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की थोड़ी मात्रा तीव्र वृद्धि, पुष्पन और फलन के लिए दी जाती है | सीधे रूप में जेट्रोफा की बुआई करने से पहले प्रति गड्ढा 2-3 कि.ग्रा. गोबर की सड़ी हुई खाद के अलावा 20 ग्राम यूरिया, 120 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट तथा 10 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश दिया जाता है | रोपण करने की स्थिति में उपरोक्त उर्वरकों की मात्रा पौधे के पूरी तरह स्थापित हो जाने के बाद पास में डाली जाती है | यूरिया की मात्रा को दो बराबर हिस्सों में बांटकर अर्थात 10-10 ग्राम की दो मात्रा में से एक मात्रा एक माह बाद तथा दूसरी मात्रा दो माह बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दी जानी चाहिए | नाइट्रोजन 46 कि.ग्रा., फास्फोरस 48 किग्रा. तथा पोटाश 24 किग्रा. प्रति हेक्टेयर को वानस्पतिक वृद्धि तथा फल आने अवस्था में देनी चाहिए | जेट्रोफा की खली को भी जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है |</p> <h3 style="text-align: justify;">सिंचाई</h3> <p style="text-align: justify;">जेट्रोफा सुखा सहन करने वाला पौधा है और इसे अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है | रोपण करने की शुरूआती अवस्था में पानी देना बहुत ही आवश्यक होता है | लम्बे दिनों तक बरसात न होने की स्थिति में हल्की सिंचाई करनी चाहिए | यदि बलुई मिट्टी है तो प्रथम वर्ष 3-4 सिंचाई देने की व्यवस्था रखें | उसके उपरांत आवश्यकता अनुसार प्रति वर्ष एक सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है |</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियन्त्रण एवं खाली जगह को भरना</h3> <p style="text-align: justify;">जेट्रोफा पौधों को खरपतवारों से मुक्त रखना चाहिए | प्रथम माह में ही इनका अधिक जोर होता है | अत: निराई क्र देनी चाहिए | जिन गड्ढों के पौधे मर गए हैं उनकी जगह नए पौधे लगा दें | दुसरे माह में फिर निराई की आवश्यकता पड़ती है |</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्रोत: राष्ट्रीय तिलहन एवं वनस्पति तेल विकास बोर्ड,कृषि मंत्रालय, भारत सरकार</strong></p>