भूमिका किसानों की आवश्यकता, भूमि उपयोग, प्रकार एवं उपलब्धता के आधार पर जेट्रोफा का पौधरोपण किया जाता है | खण्ड (ब्लाक) पौधरोपण, खेत की मेंड़ों व नालियों के किनारे पर, सड़क व रेलवे पटरियों के किनारों पर एवं कृषि वानिकी के रूप में मुख्यत: इसका पौधरोपण किया जाता है | खण्ड या ब्लाक पौधारोपण ब्लाक पौधरोपण मुख्यत: बंजर, अनुपजाऊ, रेतीला पठार अथवा खाली पड़ी भूमियों पर किया जाता है | ब्लाक के चारों तरफ कांटेदार तारों या पत्थर की दीवार सुरक्षा दृष्टि से बनवाना जरूरी है अथवा कम खर्चे के हिसाब से खेत के चारों तरफ जेट्रोफा के पौधों का 50-50 सें.मी. की दूरी पर रोपण करके बाढ़ बनवाना अधिक उचित है | गड्ढे तैयार करना जेट्रोफा को लगाने के लिए गड्ढे खोदने का कार्य अप्रैल-मई के महीने में करना चाहिए ताकि जून-जुलाई तक ये गड्ढे सूर्य की धूप में खुले रहें और इनमें मिट्टी भुरभुरी तथा बारीक होने के साथ-साथ इनमें व्याप्त कीड़े-मकोड़े भी मर जाएं | सामान्यत: बेकार प्रति व कम उपजाऊ भूमि में खेती हेतु जेट्रोफा के पौधों के बीच की दूरी 2 मीटर x 2 मीटर पर रखी जाती है | उपजाऊ तथा सिंचित क्षेत्र में पौधों के बीच की दूरी 2 या 3 मीटर तथा कतार से कतार की दूरी 3 मीटर रखी जा सकती हैं | कृषि वानिकी पद्धति में पंक्तियों के बीच में 4 तथा पौधों के बीच में 2 मीटर की दूरी रखी जाती है | खेत के चारों ओर सुरक्षा पंक्ति के रूप में जेट्रोफा के पौधरोपण हेतु पौध से पौध की दूरी 50-100 सें.मी. रखी जा सकती है | अत: आवश्यकतानुसार दूरी पर 45x 45 x 45 सें. मी. के गहराई के गड्ढे खोद दिए जाते हैं | पौधरोपण के समय बरतने वाली सावधानियां जेट्रोफा के छोटे पौधे बहुत ही मुलायम होते हैं | इन्हें पौधशाला से लगाए जाने वाले स्थान पर ले जाने में काफी सावधानियां रखनी पड़ती हैं जो निम्नलिखित हैं – नर्सरी की क्यारी से पौधे उठाने से कुछ समय पहले (10-12 घंटे) सिंचाई अवश्य कराएं ताकि पौध/थैली उठाने से पौधे की जड़ अथवा तने को हानि न पहुंचे| वाहन में रखते समय पौधों को सीधे पकड़ कर न उठायें बल्कि थैलियों के नोचे हाथ लगाकर पौधों को सीधा रखा जाए | पौधों को क्यारियों से उखाड़ने, वाहन में रखने तथा खेत में उतारने के समय यह ध्यान रखें कि एक पौधे के ऊपर दुसरा पौधा न रखा जाए | पौधों को खेत में लगाने से पहले छायादार वृक्ष के नीचे रखें और शीध्र ही रोपित कर दें | पौधरोपण सायंकाल या बदली वाले मौसम में करें | गड्ढों का भराव का मिश्रण जेट्रोफा के पौधों को खेत में बने गड्ढों में रखकर उसके भराव का मिश्रण पहले ही तैयार किया जाता है | यह मिट्टी के प्रकार व किस्म के ऊपर निर्भर करता है कि मिश्रण के अवयव किस अनुपात में हों | अवयवों के अनुपात की जानकारी निम्न प्रकार रखनी चाहिए – क्रम संख्या मिट्टी की किस्म भराव के मिश्रण का अनुपात 1 हल्की/बलुई/ कम उपजाऊ ¾ भाग कम्पोस्ट खाद + ¼ भाग मूल मिट्टी + 100 ग्राम नीम की खली 2 दोमट 1/3 भाग कम्पोस्ट खाद + 2/3 भाग मूल मिट्टी + 100 ग्राम नीम की खली 3 भारी दोमट ½ भाग कम्पोस्ट खाद + ½ भाग मूल मिट्टी + 100 ग्राम नीम की खली 4 काली चिकनी 1/3 भाग कम्पोस्ट खाद + 1/3 भाग मूल मिट्टी + 1/3 भाग रेत + 100 ग्राम नीम की खली पौधरोपण की तकनीक 1. ब्लाक या खण्ड पौधरोपण पौधरोपण का उचित समय मानसून के अच्छी तरह बरसने के बाद का है | इस समय हवा में भी आर्द्रता पर्याप्त होती है और जमीन में भी नमी बन जाती है | गड्ढों में लगाने वाले पौधे पूर्णत: स्वस्थ एवं समान ऊँचाई के होने चाहिएं | पौधे को सावधानी से उठाकर उसे गड्ढ़े के बीचोबीच रखकर ब्लेड की सहायता से पॉलिथीन फाड़कर अलग कर दें और मिट्टी सहित पौधे की पिण्डी को चारों तरफ से भराव मिश्रण से अच्छी तरह दबा दें | परन्तु ध्यान रखें कि पैरों से दबाते समय पौधों की जड़ें क्षतिग्रस्त न हो जाएं | लेकिन मिट्टी का मिश्रण इतना दबाकर भरें कि सिंचाई के समय पौधे के साथ की मिट्टी नीचे न बैठ जाए अन्यथा पौधा टेढा होने के साथ-साथ जड़ों में हवा पहुंचने के कारण सूख सकता है | जिन क्षेत्रों में कम वर्षा होती है वहां पौधरोपण हेतु गड्ढा बनाकर वर्षा के पानी को संरक्षित करें | ढलान वाले क्षेत्रों में अर्धचन्द्राकार खोदकर गड्ढा बनाएं | रूट ट्रेनर पौधरोपण करने वाले गड्ढों को पहले ही भराव मिश्रण द्वारा भर लें तथा मिट्टी को अच्छी तरह हल्की-2 दबा दंं | फिर ट्रेनर सेल के आकार का गड्ढा बना लें | ट्रेनर सेल के छिद्र से खिसका कर पौधा निकाल लें और इन छोटे-2 गड्ढों में लगा दें | पौधों को सावधानी पूर्वक पैरों से दबाए | 2. खेत के मेंड़ों व पानी की नालियों की पटरियों के पास पौधरोपण जेट्रोफा के खेत के चारों तरफ मेंड़ों के पास, बगीचों के चारों ओर बाढ़ के रूप में अथवा पानी की नालियों की पटरी के पास रोपित किया जा सकता है | इस प्रकार रोपण से किसानों को जेट्रोफा उत्पादन के अतिरिक्त मेड पर बाढ़ बनाने से जानवरों से फसलों की रक्षा भी हो जाती है | इस तरह हरे बाढ़ लगाने में 75 सेंमी. से 1 मीटर की पौधों के बीच की दूरी पर पौधे पीछे बताई गई विधि के अनुसार रोपित कर दिए जाते हैं | 3. कृषि-वानिकी के रूप में पौधरोपण एक ही समय तथा एक ही भूमि पर कृषि फसलें एवं वृक्ष प्रजातियों को विशेष ज्यामितीय विधि द्वारा रोपण करके दोनों फसलों की उपज प्राप्त करने को कृषि वानिकी पद्धति कहते हैं | जेट्रोफा का वृक्षारोपण इस पद्धति में बीज उत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त है | परन्तु कृषि फसलें इतनी ऊँचाई वाली न हों कि वे जेट्रोफा के पौधों को पनपने ही न दें | हमारा मुख्य उद्देश्य जेट्रोफा के पौधों के क्षेत्रों का पूर्ण विकास करके अच्छे व पर्याप्त मात्रा में बीज प्राप्त करना हैं | अत: हमारी मुख्य फसल जेट्रोफा की वृद्धि में किसी अन्य फसल द्वारा हानि नहीं पहुंचनी चाहिए | इसलिए शुरू के 1-2 वर्षो में सामान्यत: कम बढ़ने वाली फसलों को ही इस प्रणाली के अंतर्गत उगानी चाहिए| तदोपरान्त केवल छाया ष सकने वाली तथा कम बढ़ने वाली फसलें ही बुआई के लिए चुननी चाहिएं | इस पद्धति में जेट्रोफा के पौधों की पंक्तियों के बीच में दूरी अधिक रखी जाती है ताकि कृषि क्रियाएं करने में आसानी रहे व ट्रेक्टर भी आसानी से घूम सके | इसलिए इन्हें 5 x 2 मीटर, 4 x 3 मीटर या 3 x 3 मीटर की दूरी पर रोपित किया जाता है | इस प्रणाली के अंतर्गत निम्नलिखित फसलों का चयन स्थान, जलवायु, पानी एवं भूमि के प्रकार के अनुसार किया जा सकता है- • दलहनी व तिलहनी फसलें – मुंग, उडद, तिल, चना, मटर, मसूर, सरसों इत्यादि | • सब्जियां – अदरक, शकरकंद, आलू, गाजर, मिर्च, करेला, टमाटर, खीरा एवं कद्दू आदि | • औषधीय एवं सुगन्धित फसलें – मेंथा, अश्व-गंधा, हल्दी, कलिहारी, केवांच, कालमेधय, सनाय, सर्पगंधा, इसबगोल इत्यादि | स्रोत: राष्ट्रीय तिलहन एवं वनस्पति तेल विकास बोर्ड,कृषि मंत्रालय, भारत सरकार