रामतिल इथियोपिया और भारत में उगाई जाने वाली एक तिलहन फसल है रामतिल को एक गोण तिलहन फसल के रूप में माना जाता है इसके बीज में 18 से% 24 प्रोटीन तथा तेल की मात्रा 32 से 42 % होती है। फूल आने से पहले की अवस्था में पूरे पौधों का उपयोग हरी खाद के रूप में किया जा सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों, सीमांत और उप सीमांत भूमि पर और जंगलों के आसपास इसकी खेती होती हैं। यह मिट्टी के संरक्षण में काफी मदद करता हैं। रामतिल मुख्य रूप से भारत में इनपुट की कमी की परिस्थितियों में आदिवासी इलाकों में असिंचित मिट्टी पर उगाया जाता है। इथियोपिया और भारत दुनिया के प्रमुख रामतिल बीज उत्पादक देश हैं। यह भारत, केन्या, युगांडा, सूडान, मलावी और अन्य अफ्रीकी देशों में भी उगाईजाती है। इसकी खेती भारत के आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, नगर हवेली और पश्चिम बंगाल राज्यों में की जाती है । तेल: हालांकि रामतिल को एक गौण तिलहन फसल माना जाता है। पर इसका तेल सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। रामतिल का तेल धीमी गति से सूखता है। जिसका उपयोग भोजन, पेंट, साबुन और रोशनी के लिए किया जाता है। इसका उपयोग जैतून के तेल के विकल्प के रूप में किया जाता है। इसमें रेपसीड, तिल और अलसी के तेल की मिलावट की जा सकती है। तेल का उपयोग खाना पकाने में किया जाता है। तेल निकालने से प्रेस केक का उपयोग पशुओं के चारे के लिए किया जाता है। रामतिल तेल का उपयोग बायोडीजल बनाकर संभावित वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है। रामतिल के बीज में प्रमुख फैटी एसिड लिनोलिक, ओलिक, पामिटिक और स्टीयरिक एसिड होते हैं। लिनोलिक (70-75%) तथा ओलिक(10-15%) प्रमुख फैटी एसिड है। यह बीटा सिस्टरोल का प्रमुख स्त्रोत है। रामतिल के बीज के तेल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट उपचार प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं । वे घाव या घाव के स्थान पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सुधार करके त्वचा में संक्रमण को भी रोक सकते हैं। रामतिल तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं यह तेल ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है और महीन रेखाओं, झुर्रियों और उम्र के धब्बों को कमता है। रामतिल तेल का इस्तेमाल कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जाता है। तेल के स्वास्थ्य लाभ : इसमे लिनोलिक एसिड का उच्च स्तर होता है। जो की एक आवश्यक वासिय अमल है। रामतिल के बीज के तेल में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो इसे गठिया, बुखार तथा उच्च रक्तचाप से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद हैं। रामतिल के बीज के तेल में कुछ एंटी-पैरासिटिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। तथा यह समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता हैं। बाहरी संक्रमणों के लिए त्वचा पर रामतिल के बीज के तेल का उपयोग किया जाता है और आंतरिक सुरक्षा के लिए भोजन में इसका सेवन किया जाता है। इसका तेल शरीर को सर्दी और फ्लू से बचाने में बेहद फायदेमंद होता है। इस तेल के अर्क की छाती, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर नियमित रूप से मालिश करने से फ्लू और सर्दी के सामान्य लक्षणों से राहत मिलती है। अफ्रीका में रामतिल बीज का प्रयोग रुमेटीइड के उपचार के लिए किया जाता है एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में रामतिल सीड सप्लीमेंट से हीमोग्लोबिन का स्तर काफी बढ़ जाता है। रामतिल के बीज का तेल घावों के कारण होने वाली जलन से तुरंत राहत देता है। बीज का उपयोग: रामतिल के पौधे का सेवन भेड़ें करती हैं मवेशियों को केवल रामतिल साइलेज ही खिलाया जा सकता है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए रामतिल का उपयोग हरी खाद के रूप में भी किया जाता है। रामतिल बीज का उपयोग मानव भोजन के रूप में किया जाता है। बीज को कुचल कर दाल के बीज के साथ मिलाया जाता है इसके बीज में हल्के पीले तेल में अखरोट जैसा स्वाद और सुखद गंध होती है। इथियोपिया में रामतिल बीज सबसे महत्वपूर्ण तेल फसल है और भारत में एक गौण फसल है और पक्षी के दाने के रूप में उपयोग की जाती है। रामतिल स्प्राउट्स को लहसुन और 'तेज' के साथ मिलाकर खांसी के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें नियासिन, ओलिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, स्टीयरिक एसिड, राइबोफ्लेविन और एस्कॉर्बिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं जिनमें अच्छी उपचार क्षमता होती है। इसमे खनिज प्रचुर मात्रा मे होते है। तेल निकालने के बाद बचे हुए खल में 6-12% तेल होता है। खल में लगभग 24% प्रोटीन और 25% क्रूड फाइबर होता है। विटामिन: विटामिन K का उच्च स्तर रामतिल के बीज के तेल की विशेषता को बढ़ावा देने वाला सबसे अनूठा तत्व है। आहार में विटामिन K का महत्व हाल ही में बढ़ा है। विटामिन K एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो एक कोएंजाइम के रूप में कार्य करता है और रक्त के थक्के और हड्डियों के चयापचय में भाग लेने वाले कई प्रोटीनों के संश्लेषण में शामिल होता है। रक्त का थक्का जमाने वाले एजेंट के रूप में विटामिन K का महत्व सर्वविदित है। विटामिन K हृदय रोग के जोखिम को कम करता है, कैंसर कोशिकाओं को मारता है, और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार कर सकता है। एफ्लाटॉक्सिन: रामतिल ऑयल केक को अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों में 6 महीने से अधिक समय तक संग्रहीत किये जाने पर यह एस्परगिलसनिगर मोल्ड इन्फेक्शन हो सकता है जो एफ्लाटॉक्सिन बी1 एक कार्सिनोजेनिक विष उत्पन्न करता है जो बाद में मवेशियों के दूध में पाया जा सकता है दुष्प्रभाव और एलर्जी: रामतिल के बीज के तेल का अत्यधिक उपयोग रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा करके और रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ाकर रक्तस्राव विकार पैदा कर सकता है। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को इसकी सलाह नहीं दी जाती है। रामतिल बीज कुछ लोगों में एलर्जी संबंधी चकत्ते पैदा कर सकता है। इससे पेट खराब, उल्टी या कब्ज भी हो सकता है। सोर्स: प्रद्युमन यादव, जे श्रावंती, केएसवी पी चंद्रिका, एचपी मीणा, एच डी पुष्पा एवं एम सुजाता भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, राजेंद्रनगर, हैदराबाद