खेत की तैयारी पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल से करके पाटा देकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए। उन्नतिशील प्रजातियां प्रजाति उत्पादन क्षमता(कु./हे.) पकने की अवधि (दिन) उपयुक्त क्षेत्र टा-36 (पीली) 10-12 95-100 मध्य उत्तर प्रदेश टा-9 (काली) 12-15 90-95 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश भवानी (काली) 10-12 75-80 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश पी.टी.-303 (काली) 15-18 90-95 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश पी.टी.-30 (काली) 14-16 90-95 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश बीज दर 4 किग्रा. बीज एक हेक्टर क्षेत्रफल की बुवाई के लिए पर्याप्त होता है। बुवाई का समय तोरिया के बाद गेहूं की फसल लेने के लिए इनकी बुवाई सितम्बर के प्रथम पखवारे में समय मिलते ही अवश्य कर लेनी चाहिए, परन्तु भवानी प्रजाति की बुवाई सितम्बर के दूसरे पखवारे में ही करें। उर्वरक की मात्रा उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण की संस्तुति के आधार पर किया जाना सर्वोत्तम है। यदि मिट्टी परीक्षण सम्भव न हो पाये तो असिंचित क्षेत्रों में 50 किग्रा. नत्रजन तथा 20 किग्रा. फास्फोरस प्रति हे. की दर से अन्तिम जुताई के समय प्रयोग करना चाहिए। सिंचित क्षेत्रों में 100 किग्रा. नत्रजन तथा 50 किग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टर देना चाहिए। फास्फेट का प्रयोग सिंगिल सुपर फास्फेट के रूप में अधिक लाभदायी होता है क्योंकि इससे 12 प्रतिशत गन्धक की भी उपलब्धता हो जाती है। सिंगिल सुपर फास्फेट के न मिलने पर 2 कु. जिप्सम प्रति हे. का प्रयोग करें। फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा अन्तिम जुताई के समय नाई या चोंगे द्वारा बीज से 2-3 सेमी. नीचे प्रयोग करना चाहिए। नत्रजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई (बुवाई के 25 से 30 दिन बाद) टाप ड्रेसिंग के रूप में देना चाहिए। अधिकतम उपज के लिए 90 किग्रा. नत्रजन तक दिया जा सकता है। बुवाई की विधि बुवाई देशी हल से करनी चाहिए। बुवाई के बाद बीज ढकने के लिए हल्का पाटा लगा देना चाहिए। बुवाई 30 सेमी० की दूरी पर 3 से 4 सेमी० की गहराई पर कतारों में करना चाहिए। निराई गुडाई बुवाई के 15 दिन के अन्दर घने पौधों को निकालकर पौधों की आपसी दूरी 10-15 सेमी० कर देनी चाहिए तथा खरपतवार नष्ट करने के लिए 35 दिन की अवधि पर एक निराई-गुड़ाई भी कर देनी चाहिए। खरपतवार नष्ट करने के लिए 3.3 लीटर प्रति हे० पेन्डीमेथलीन 30% का प्रयोग बुवाई के 3 दिन के अन्दर प्रयोग करें। सिचाई तोरिया फूल निकलने तथा दाना भरने की अवस्थाओं पर जल की कमी के प्रति विशेष संवेदनशील है। अतः अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए इन दोनों अवस्थाओं पर सिंचाई करना आवश्यक है। यदि एक ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो तो वह फूल निकलने पर (बुवाई के 25-30 दिन बाद) करें। फसल सुरक्षा बीज शोधन बीज जनित रोगों से सुरक्षा के लिए यथासम्भव संशोधित उपचारित एवं प्रमाणित बीज ही बोना चाहिए। यह सम्भव न हो तो निम्नांकित विधि से बीजोपचार करके बुवाई करना चाहिए। यदि बीज जनित रोगों से सुरक्षा के लिए 25 ग्राम थीरम प्रति किग्रा० बीज की दर से बीज को उपचारित करके बोयें। खड़ी फसल पर कीट रोग उपचार अ- क्षेत्र 1. अल्टरनेरिया झुलसा पहचान इस रोग में पत्तियों तथा फलियों पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बनते हैं, जिसमें गोल-गोल छल्ले केवल पत्तियों पर स्पष्ट दिखाई देते हैं। उपचार झुलसा सफेद गेरूई तथा तुलासिता रोग की रोकथाम हेतु निम्नलिखित में से किसी एक रसायन का छिड़काव प्रति हेक्टर 800-1000 लीटर पानी में मिलाकर करें। जाइरम 27 प्रतिशत के 3 लीटर। मैकोजेब 75 प्रतिशत 2 किलोग्राम। जाइरम 80 प्रतिशत 2 किलोग्राम। जिनेब 75 प्रतिशत 2.5 किग्रा। 2. सफेद गेरूई पहचान इस रोग में पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफोले बनते हैं और बाद में पुष्प विन्यास विकृत होता है। उपचार इसकी रोकथाम भी उपयुक्त रसायनों से की जा सकती है। नोटः 30 दिन की फसल पर एक अवरोधक छिड़काव करना लाभदायक होगा। ब-कीट 1. आरा मक्खी पहचान इसकी गिडारें सरसों कुल की सभी फसलों को हानि पहुंचाती हैं, गिडारें काले रंग की होती है जो पत्तियों को बहुत तेजी से किनारे से अथवा भिन्न आकार के छेद बनाती हुई खाती हैं, जिससे पत्तियां बिल्कुल छलनी हो जाती हैं। उपचार निम्नलिखित किसी एक कीटनाशक रसायन का प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें डाइक्लोरवास 76 प्रतिशत ई.सी. 0.5 लीटर। मैलाथियान 50 ई.सी. 1.5 लीटर। क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत धूल 20 किग्रा.। 2. मॉहूं पहचान यह छोटा, कोमल शरीर वाला, हरे मटमैले रंग का कीट है, जिसके झुण्ड पत्तियों, फूलों उठलों, फलियों आदि पर चिपके रहते हैं एवं रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं। उपचार निम्नलिखित कीट नाशक रसायन की संस्तुत मात्रा प्रति हे. की दर से प्रयोग करे मिथाइल ओडिमेटान 25 ई.सी. 1.00 लीटर या डायजिनान 20 ई.सी. 1.25 लीटर या क्राइसोपर्लो कार्निया के 50000 अण्डे/लारवा/प्रति हे. 10-15 दिन के अन्तराल पर दो बार प्रयोग करें। फेनीट्रोथियान 50 ई.सी. 1.00 लीटर या क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. 0.75 लीटर या मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत ई.सी. 0.75 लीटर या क्यूनालफास 25 ई.सी. 1.5 लीटर प्रति हे. या 3. बालदार गिडार (भुड़ली) पहचान इस भुड़ली के शरीर का रंग पीला अथवा नारंगी होता है परन्तु सिर पर पीछे का काला होता है तथा शरीर पर घने काले बाल होते हैं उपचार इसकी रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपचार करें (क) प्रथम अवस्था में गिडार झुण्ड में पाई जाती है। उस समय उन पत्तियों को तोड़कर एक बाल्टी मिट्टी के तेलयुक्त पानी में डाल दिया जाय, जिससे गिडार नष्ट हो जायें। (ख) विभिन्न अवस्थाओं की गिडारों की रोकथाम हेतु निम्नलिखित में से किसी एक कीटनाशक रसायन का प्रति हेक्टर बुरकाव/छिड़काव किया जाये। डाइक्लोरवास डी.डी.वी.पी. 76 प्रतिशत ई.सी. 625 मिली.। कार्बराइल 10 प्रतिशत धूल 25 किग्रा.। क्लोरपायरीफास 20 .सी. 1.25 लीटर। क्यूनालफास 25 ई.सी. 1.25 लीटर। कटाई-मड़ाई जब 75 प्रतिशत फलियां सुनहरे रंग की हो जायें फसल को काटकर, सुखाकर व मड़ाई करके बीज अलग करना चाहिए। देर करने से बीजों को झड़ने की आशंका रहती है। बीज को खूब सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिए। जैसे ही फलियां सुनहरी पीले रंग की पड़ने लगे फसल काट ली जाय। इसका कोई कुप्रभाव उपज व तेल पर नहीं पड़ेगां मुख्य बिन्दु बुवाई 15-20 दिन के भीतर विरलीकरण अवश्य करें। पंक्तियों में समय से बुवाई सुनिश्चित करें। 25-30 दिन की अवधि पर पहली सिंचाई करें। आरा मक्खी एवं माहूं से बचाव अवश्य करें। स्त्राेत : पारदर्शी किसाना सेवा याेजना, कृषि विभाग, उत्तरप्रदेश।