परिचय आंवला हमारे देश का प्राचीन और उपयोगी फल है जिसे इंडियन गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता है। यह यूफोर्बिएसी कुल का पौधा है, जिसे भारत में आसानी से उगाया जाता है। वर्तमान में इसकी खेती भारत में 50,000 हे. क्षेत्रफल पर हो रही हैं जिससे 2 लाख मीट्रिक टन आंवले का उत्पादन हो रहा है। परंतु इसे अधिक समय तक ताजे रूप में भंडारित करके नहीं रखा जा सकता है,, क्योंकि यह जल्दी ख़राब हो जाता है। इसके लिए विशिष्ट गुण और विविध उपयोग के कारण प्रकृति के अनमोल उपहारों में इसका स्थान सर्वप्रथम है। कई ग्रंथों में इसे अमृत फसल की संज्ञा भी दी गई। प्राचीन ऋषि – मुनियों को औषधियों में यह सबसे महत्वपूर्ण अवयव रहा है। आज भी इसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियां हैं, जो मुख्यता आंवले से बनाई जाती है। प्राचीन काल से ऋषि – मुनियों द्वार कहा जाता रहा है कि मनुष्य को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए आंवले का सेवन करना चाहिए। आम लोगों के बीच आंवला ताजे फल के रूप में कम स्विक्रित्क है। अपने कसैले तथा अम्लीय स्वाद के कारण यह फल सीधे उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है। पेड़ से तोड़ने के बाद यह 5 से 6 दिन के अंदर ही खराब हो जाता है। परंतु इसका प्रसंस्करण करने से इसको लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके प्रसंस्करित उत्पादों में प्रमुख हैं कैंडी, मुरब्बा एवं अचार। इसके अतिरिक्त आंवले का जूस, बर्फी, लड्डू, सुपारी अधि कुछ अपेक्षाकृत नये उत्पाद हैं, जिनका प्रचलन दिन – प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। विगत वर्षों हुई है। इसके कारण आंवला प्रसंस्करण स्तर पर वृद्धि तथा कुछा नये एवं परिष्कृत उत्पादों को आवश्यकता भी बढ़ गई है। खुली अर्थव्यवस्था के तहत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी उच्च गुणवत्तायुक्त आंवले के उत्पादों की मांग में काफी वृदि हुई है। इन बदली स्थितियों को ध्यान में रखकर आंवला प्रसंस्करण क्षेत्र में उन्नत तकनीकों तथा बेहतर उत्पादों की नितांत आवश्यकता है। आंवला के प्रसंस्करण के प्रकार संसाधित आंवला पदार्थों में सर्वप्रथम है आंवले की कैंडी। आंवले की मीठी और चटपटी फांके उत्तम तथा पौष्टिक उत्पाद हैं। इसमें विटामिन – सी की मात्रा लगभग 100 मिलीग्राम प्रति सौ ग्राम होती है। आंवला कैंडी की लोकप्रियता का कारण अच्छी ग्राहयता, कम जगह घेरना तथा अतिपोषण के साथ साथ ज्यादा समय तक भंडारण क्षमता है। इस प्रकार आधुनिक जीवनशैली की उपभोग प्रणाली की समस्त आवश्यकताओं को पूर्ण करने के कारण इस उत्पाद का भविष्य काफी उज्ज्वल है। कैंडी एक ऐसा खाद्य उत्पाद है, जिसकी मांग बच्चों से लेकर वृद्ध में एक समान है। कैंडी बनाना एक आसान प्रक्रिया है, जिसकी सहायता से किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। कैंडी दो प्रकार की होती है: मीठी एवं मसालेदार। दोनों की ही अपनी अपनी महत्ता है। बहुत सरे लोग, जो मीठी कैंडी नहीं खा सकते उनके लिए मसालेदार कैंडी एक सुनहरा विकल्प है। मीठी कैंडी के लिए मुख्यता चीनी की आवश्यकता होती है और मसालेदार कैंडी के लिए अलग – अलग चटपटे मसलों की। जहाँ मीठा खाने में लोग हिचकिचाते हैं, वहीं चटपटा लोगों को बहुत प्रिय होता है। इस दृष्टि से मसाला कैंडी एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। आंवला कैंडी को किसान बहुत ही न्यूनतम आदानों के साथ बना सकते हैं। इसमें न तो उच्च तकनीक की जरूरत है और न ही बहुत निवेश की। यह एक ऐसी प्रौद्योगिकी, जिसकी सहायता से किसान अपनी आय दोगुनी एवं चौगुनी भी कर सकते हैं। थोड़े से मनोबल, धैर्य एवं अक्लमंदी से इस कारोबार को सफलता की सीढ़ियों तक पहुँचाया जा सकता है। आंवला का मूल्य संवर्धन के लिए आर्थिक विश्लेषण 2000 किग्रा. आंवला से तैयार विभिन्न मूल्यवर्धित उप्तादों का विवरण एवं लाभ आंवला मात्रा दर (रूपये) कुल मूल्य रूपये) आंवला स्क्वैश 370 लीटर 120/- 44,400/- आर. टी. एस. 100 लीटर 50/- 5,000/- कैंडी 150 लीटर 200/- किग्रा. 3,000/- मुरब्बा 450 किग्रा. 150/- किग्रा. 67,500/- श्रैड 15 किग्रा. 30/- किग्रा. 450/- लड्डू 500 किग्रा. 150/- किग्रा. 75,000/- आंवला पाउडर 50 किग्रा. 5100 ग्राम 25,000/- 2000 किग्रा. आंवला के मूल्य संवर्धन से अर्जित कुल आय (रूपये) 2,20350/- निवेश लागत (रूपये) सामग्री मात्रा मूल्य कुल लागत कच्चा आंवला 2000 किग्रा. 5/- 10,000/- श्रमिक 10 श्रमिक 250/- दिन 2,500/- शक्कर 1000 किग्रा. 40/- किग्रा. 40,000/- अन्य लागत (कस्टम हायरिंग) 2000 किग्रा. 1/- दिन 2,000/- कुल 54,500/- कुल लाभ 2,20350/- कुल लागत 54,500/- नेट लाभ 1,65,850/- लाभ : लागत अनुपात 30-4-:1 आंवले के मूल्य संवर्धन के लिए कुछ ध्यान रखने योग्य तथ्य आंवले के बड़े – बड़े फसल लेने पर गूदा की मात्रा ज्यादा होने से उत्पाद अच्छी क्वालिटी का है। जहाँ तक संभव हो बिना रेशे वाले आंवले ही लें। आंवले की कंचन और कृष्णा किस्म जैम और कैंडी के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस उत्पाद को बनाते समय यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि प्रयोग में लाये जाने वाले सभी बर्तन स्टेनलेस स्टील के हो। सुखाते समय तापमान करने के बाद एक बार सील अवश्य देख लें। भंडारण के लिये किसी साफ एवं नमी रहित जगह का ही चुनाव करें आंवला की मीठी और चटपटी कैंडी बनाने की विधि पके हुए धब्बा रहित आंवला फल लें साफ ठंडे पानी से धो लें 5 -7 मिनट तक उबाल कर बीज निकाल दें और फांके अलग कर लें इन फांकों को नमक – फिटकरी के घोल में 24 घंटे के लिए डुबो दें फलों को ताजे ठंडे पानी से धो लें ताकि सारा नमक फिटकरी निकल जाएं फलों को चीनी और पानी के घोल में डालकर धीमी आंच पर गर्म करें इस मिश्रण को 50 डिग्री ब्रिक्स होने तक पकाएं और थोड़ा ठंडा करें 24 घंटे बाद फलों को चाशनी से अलग करें। इस चाशनी को फिर से धीमी आंच पर गर्म करें और गाढ़ा होने दें लेखन: प्रेरणा नाथ और एस. जे. काले स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार