हाईवुड कटिंग हाईवुड कटिंग के लिए, 3-4 वर्षों से पुराने रोग से ओजपूर्वक मुक्त बढ़ने वाली परिपक्व बेलों जिनसे पिछले वर्षों में अक्तूबर की छंटाई के बाद अच्छी फसल का उत्पादन हुआ है। बहुत की युवा और बहुत ही पुरानी बेलों या जिनमें पिछले वर्ष के दौरान भारी फल आए हों, से कटिंग नहीं ली जानी चाहिए। मध्यम आकार वाली 8-10 सेंटी मीटर लम्बी केनें वांछनीय है। चयनित केनों के मध्यम भाग से पेंसिल साइज की 30-45 सेंमी. लम्बी कटिंग वाली मोटी जिसमें कम से कम 3-4 गांठ हों, से कटिंग की जाती है। कटिंग के निचले सिरे पर गांठ के 1 सेंमी नीचे सीधा कट किया जाना चाहिए, जब कि शीर्ष पर कट 2-3 सेमी ऊपर किया जाता है। इसके तुरन्त बाद कलमों को बिस्तर में या नर्सरी में पॉलिथीन बैगों में रोपित किया जाता है। रोपण में देरी के मामले में, कलमों को 5-7.5 डिग्री सेल्सियस पर रेत या चूरा को जमीन में गाड कर इकट्ठा किया जाता है। नर्सरी में, सुविधाजनक लम्बाई वाले 1.2m चौड़ाई के अच्छी प्रकार से तैयार किए गए फलैट बेडों की कलमों को रोपित किया जाता है। एक पत्ता मिट्टी, FYM, रेत और सुपर फास्फेट के मिश्रण को अच्छी तरह से क्यारी में लगाने से पहले मिट्टी में मिलाया जाता है। कलमों को रोपित करने से पहले कम से कम दो नोड्स को मिट्टी के अन्दर होना चाहिए और जिसमे एक कोपल मिट्टी के ऊपर हो। कलमों को रोपित करते समय पोलेरटी को बनाए रखने में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऊपर से नीचे की ओर लगाई गई अंगूर की कलमें विकसित नहीं हो पाती है। फुरों से मिट्टी को पीछे धकेला जाता है और प्रत्येक कलम के चारों ओर मजबूती से दबाया जाता है। कलमों को पॉलिथीन बैग में भी लगाया जा सकता है। पॉली बैग (25x15 सेमी और 150-200 गेज) सल्फरफासफेट सहित मिट्टी, रेत और एफवाईएम की बराबर मात्रा में भरा होना चाहिए। प्रत्येक बैग में एक या दो कलमों को लगाया जाए। उगाने की अवधि के दौरान सामान्य बिमारियों को नियंत्रित करने के लिए निवारक स्प्रे किया जाता है। चिप बडिंग रूटस्टॉकों पर बेलों के प्रजनन के लिए चिप बडिंग सबसे अच्छी प्रणाली है। इस विधि में एक पच्चर के आकार के लकड़ी के एक हिस्से के साथ कली (चिप) युक्त टुकड़ा वांछित किस्म से निकाल दिया जाता है। अकुंरित कलमें फल वाली होनी चाहिए और इन्हें अच्छी तरह से परिपक्व स्वस्थ बेंत से लिया जाना चाहिए, परिपक्व स्तर पर बराबर हो और उस रूटस्टॉक के बराबर मोटाई हो। जमीन से 10-15 सेमी ऊपर रूटस्टॉक पर चिप को समायोजित करने के लिए पर्याप्त एक निशान किया जाता है। इस नाच में चिप को रखा जाता है और कलियों को प्रदर्शित करते हुए एक पॉलीथीन स्ट्रिप में लपेट दिया जाता है। आमतौर पर दो बडिंग 15 सेमी के अलावा हर परिपक्व स्टेम पर की जाती है। जब ये कलियां लगभग 15 सेमी तक अंकुरित और बढ़ जाती है तो इससे ऊपर के रूटस्टॉक हिस्से को काट दिया जाता है। कली संयुक्त से नीचे रूटस्टॉक पर अंकुरों को नियमित रूप से हटाया जाता है। रूटस्टॉकस प्राय: कुछ मिट्टी बोर्न की समस्याओं की वजह से रूटस्टॉक के उपयोग करने की आवश्यकता महसूस की गई है। निम्नलिखित रूटस्टाकों को मिट्टी प्रतिरोधक/जलवायु संबंधी समस्याएं और बेल ग्रोथ और उत्पादकता का कुशलतापूर्वक प्रयोग करने के लिए एक संभावित उपकरण के रूप में चिहिन्त किया गया है- उद्देश्य रूटरूटॉक के नाम सूखा सहनशीलता 110 रिचटर , 140 रूगेरी , 1103 पानलसेन, SO 4 और सेंट जार्ज खारापन सहनशीलता डोग्रिज 1613, रामसे और 140 रूगेरी गोल कीडा प्रतिरोधी 1613, डोग्रिज सॉल्ट क्रीक (रामसे), हारमोनी और फ्रिडम अंगूर का प्रजनन स्रोत: भारत सरकार का राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड