परिचय भारत फलों और सब्जियों के उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2019-20 में कुल 974 मीट्रिक टन फल और 844 मिलियन टन सब्जियां उत्पादिन की गईं। आम हमारे देश में सबसे महत्वपूर्ण फल है। यह अपनी सुगंध, बेहतर स्वाद और पोषक तत्व के लिए विख्यात है। आम को भारत में उष्ण और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। इसकी लोकप्रियता के साथ-साथ इसमें बहुत से पोषक तत्व होते हैं, जो मनुष्य की पोषण संबंधी आवश्यकता को पूरा करते हैं। आम की फसल को कई कीट हानि पहुंचाते हैं। इससे बहुत आर्थिक हानि होती है। आम की बेहतर और गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त करने के लिए उसमें लगने वाले कीटों का उचित समय पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक हो जाता है। आम का उत्पादन हमारे देश में लगभग जासभी स्थानों पर होता है। इसमें उत्तर प्रदेश का प्रथम स्थान है। वर्तमान में आम की फसल में अधिक कीटनाशियों का प्रयोग हो रहा है। इससे उत्पादन में लागत तो बढ़ी है, इसके साथ-साथ हमारे मित्र कीट भी मर रहे हैं। फलों में कीटनाशकों का अवशेष रह जाता है, जिससे अनेक रोग हो रहे हैं। इसलिए एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धति का चयन कर कम लागत में कीटों से फसल का बचाव कर सकते हैं। प्रमुख कीट और उनका प्रबंधन आम का मधुआ कीट ये कीट आम की नई पत्तियों, टहनियों और पुष्प गुच्छों से रस चूसकर हानि पहंचाते हैं। इस कीट के निम्फ पत्तियों से रस चूसते हैं। इससे पुष्प मुरझा कर झड़ जाते हैं। प्रबंधन ब्यूबेरिया बेसियाना का 2 कि.ग्रा./एकड़ छिड़काव करें। नीम तेल 300 पीपीएम या 2 मि.ली./लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। एमिडाक्लोरोप्रिड 0.3 मि.ली./ लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। तनाछेदक कीट इस कीट की इल्लियां पौधों के तने के अंदर ही अंदर घुसकर खाती रहती हैं और अनियमित सुरंग बनती रहती है। इससे पौधा आंशिक या पूर्णरूप से सूख जाता है। यह कीट तनों पर बुने हुए जालों में फंसे उनके मल की मौजूदगी से पहचाना जा सकता है। प्रबंधन प्रभावित पौधों के छेदों को किसी पतले तार से साफ कर उनमें डाई क्लोरोबास की 2-3 मि.ली./लीटर मात्रा पानी में घोलकर छेद में डालकर गीली मिट्टी से बन्द कर देते हैं। कार्बोफ्यूरॉन 3 जी 5 ग्राम/छेद मिट्टी से बन्द कर देते हैं। दहिया कीट इस कीट के निम्फ और वयस्क बौर एवं फलों से रस चूसते हैं। तीव्र प्रकोप की दशा में प्ररोह और बौर सूख जाते हैं तथा प्रारंभिक अवस्था में फल भी सूख जाते हैं। प्रबंधन इसकी रोकथाम के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करनी चाहिए। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में तने के चारों ओर 25 सें.मी. चौड़ी 400 गेज पॉलीथीन की पट्टी जमीन से 1 मीटर की ऊंचाई से बांध देनी चाहिए। इसके साथ ही निचले सिरे पर ग्रीस लगा देनी चाहिए या मोनॉक्रोटोफॉस 1.5 मि.ली./लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। फल मक्खी इस कीट की मादा फलों की परिपक्व अवस्था में फलों के अंदर अंडे देती है। अंडे से मैगट निकलकर गूदे को फल मक्खी से प्रभावित फल खाकर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके बाद फल जमीन पर गिर जाते हैं, जोकि खाने के लिए उपयोगी नहीं रहते हैं। प्रबंधन इसकी रोकथाम के लिए फेरोमोन का घोल मिथाइल यूजेनॉल 0.8 प्रतिशत एवं मैलाथियान 0.08 प्रतिशत के साथ बनाकर डिब्बे में भरकर पेड़ों पर टांग देने से नर मक्खियां आकर्षित हो कर मैलाथियान द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं। एक एकड़ बाग के लिए चार ट्रैप लगाने चाहिए। प्रमुख कीट गुठली का घुन इस कीट की मादा फलों के अंदर अंडे देती हैं। इससे ग्रब निकलकर गुठली में प्रवेश करके गुठली को खाकर नष्ट कर देते हैं, और फल गिर जाते हैं। गिरे हुए फलों को नष्ट कर देना चाहिए। इसके लिए प्रकोपित फलों को एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिए। गॉल मिज इस कीट के लार्वा बौर के डंठल, पत्तियों, फूलों और छोटे-छोटे फलों के अंदर रहकर हानि पहंचाते हैं। इनके प्रभा से फल एवं फल नहीं लगते हैं और फल गिर जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करनी चाहिए तथा फॉसमेडन 0.05 प्रतिशत (203 ग्राम/एकड़) का छिड़काव बौर घटने की स्थिति में करना चाहिए। फलछेदक कीट इस कीट के लार्वा, जब फल मटर के आकार के होते हैं. तब से ये परिपक्वता तक फल में घुसकर फल के गूदे तथा बाद में उसके बीज को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे फल शुरुआती अवस्था में गिर जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए गिरे हुए प्रकोपित फलों को एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिए। अधिक प्रकोप होने पर नीम ऑयल 3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए या क्लोरात्रिनिलीप्रोले 18.5 ई.सी. 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी के साथ घोलकर छिड़काव करना चाहिए। दीमक कीट यह मृदा के अंदर जीवनयापन करने वाला कीट है। यह दीमक जड़ को खाता है। इसकी रोकथाम के लिए 10 ग्राम प्रति लीटर ब्यूबेरिया बेसियाना के घोल का छिड़काव करें या तने को मोनोक्रोटोफॉस 1 मि.ली./लीटर से कुँच करें। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), गजेन्द्र सिंह शोध छात्र, कीट विज्ञान विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ-250110 (उत्तर प्रदेश), अर्चना अनोखे सरसो अनुसधान केद्र, भरतपुर (राजस्थान)।