फल बेधक (फूट बोर) कीट लीची का सबसे अधिक हानिकारक कीट है जिसके बचाव के लिए बागवानों को फरवरी माह से ही कार्य-योजना एवं अमल की तैयारी करने की जरूरत है। अत: इस कीट के प्रकोप के लक्षण एवं प्रबंधन के विकल्प की जानकारी यहाँ दी जा रही है। लक्षण वैसे तो यह कीट साल भर लीची पर पलते हैं पर फलन के समय में इस कीट की दो पिढ़ीयाँ अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं। पहली पीढ़ी में जब लीची के फल लौंग दाने के आकार के होते हैं (अप्रैल प्रथम सप्ताह) तब मादा कीट पुष्पवृंत के डंठलों पर अंडे देती है जिनसे 4-5 दिन में पिल्लू (ला) निकलकर विकसित हो रहे फलों में प्रवेश कर बीजों को खाते हैं, जिसके कारण फल बाद में गिर जाते हैं। अगर ऐसे फलों को गौर से देखा जाए तो फलों पर छिद्र दिखाई देते हैं। दूसरी पीढ़ी फल परिपक्व होने के 15-20 दिन पहले (मई प्रथम सप्ताह) होती है जब इसके पिल्लू डंठल के पास से फलों में प्रवेश करते हैं एवं फल के बीज और छिलके को खाकर हानि पहुँचाते हैं। पिल्लू लीची के गूदे के रंग के होते हैं। ये अपनी विष्ठा फल के अंदर जमा करते हैं जो ग्रसित फलों में डंठल के पास छिलने से दिखाई पड़ते हैं। फल बेधक ग्रसित लीची के फल शुरूआती अवस्था में, फल तुड़ाई के समय,एवं पिल्लू प्रबंधन फल लगने से पहले मंजर निकलने एवं फूल खिलने से पहले-निम्बीसीडीन 0.5% या नीम तेल या निम्बिन 4 मिली./ली. पानी के घोल या वर्मीवाश 5% के छिड़काव से कीटों की रोकथाम की जा सकती है। फल लगने के बाद प्रथम कीटनाशी छिड़काव फल लगने के 10 दिन बाद अर्थात फल मटर-दाने के आकार होने पर थियाक्लोप्रिड (21.7 एस.सी.) या इमिडाक्लोप्रीड (17.8 एस. एल.) 0.7-1.0 मिली./ लीटर पानी की दर से करें । दूसरा छिड़काव ऊपर दिये गये किसी एक कीटनाशी का छिड़काव प्रथम छिड़काव के12-15 दिन बाद करें । तीसरा छिड़काव (सामान्य मौसम की दशा में) – फल पकने के 10-12 दिन पहले (फल मेंलाली की शुरूआत हाने पर) इनमें से कोई एक कीटनाशी का छिड़काव करें। नोवाल्यूरॉन (10 प्रतिशत ई.सी.) 1.5 मिली./लीटर पानी, या इमामेक्टिन बेन्जोएट (5 प्रतिशत एस.जी.) 0.7 ग्राम/लीटर पानी, या लेम्डा-साईहेलोथ्रिन (5 प्रतिशत ई.सी.) 0.7 मिली./लीटर पानी मौसम प्रतिकूल होने अर्थात थोड़े दिनों के अंतराल पर बारिश के होने की दशा में, दूसरे छिड़काव एवं फल पकने के बीच एक अतिरिक्त छिड़काव, ऊपर्लिखित संस्तुत तीनोंकीटनाशी में से कोई भी एक, की आवश्यकता पड़ सकती है। और क्या करें बागीचों को साफ-सुथरा रखें, खासकर मिरचैया/क्रोटन घास को पनपने न दें । शुरूआती अवस्था के गिरे हुए फलों को इकट्ठा कर जहाँ तक संभव हो गहरे गड्ढे में दबादें। छिड़काव करते समय इस बात का ध्यान रखें की दवा पूरे वृक्ष पर बराबर मात्रा में पड़े औरवृक्ष का कोई भाग छूटे नहीं । सामूहिक प्रयास द्वारा आस-पास के बागीचों का प्रबंधन भी इसी प्रकार का होना आवश्यक हैताकि उपरोक्त संस्तुति ज्यादा कारगर हो। छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें, क्योंकि यदि छिड़काव के 24 घंटे बाद तक वर्षाहोती है तो पुनः अतिरिक्त छिड़काव करना पड़ेगा। जब भी रसायनिक दवाओं का छिड़काव करें तो घोल में स्टीकर/डिटर्जेंट/सर्फ पाउडर (एकचम्मच/15 लीटर घोल) जरूर डालें। क्या न करें मंजर निकलने से फल लगने के दौरान कोई भी कीटनाशी का छिड़काव न करें। एक ही कीटनाशी का छिड़काव हर बार न करें। स्त्राेत : भाकृअनुप-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र,मुशहरी, मुजफरपुर-842002 (बिहार)