<h3 style="text-align: justify;">युजु</h3> <h4 style="text-align: justify;">संकर फल</h4> <p style="text-align: justify;">यह संतरे एवं पपेड़ा के संकरण से तैयार संकर फल है, जो सिट्रिस वंश की रूटेसी कुल से संबंधित है। वैसे तो यह जापान में बहुत मशहूर फल है, परंतु कोरिया एवं चीन के लोग ही इसे खूब पसंद करते हैं। कोरिया के लोग इसे ‘युजा’ एवं चीनी लोग इसे ‘क्सियांग चेंग’ कहते हैं। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="183" height="206" /></p> <h4 style="text-align: justify;">अनोखा फल</h4> <p style="text-align: justify;">युजु के पौधे छोटे आकार या झाड़ीरूपी होते हैं, जिनमें लंबे-लंबे कांटे होते हैं। पत्तियां बड़ी-बड़ी एवं खुशबूदार होती हैं। युजु के फल छोटे ग्रेपफ्रूट जैसे होते हैं, परंतु छिलका खुरदरा होता है। छिलके का रंग पीला या हरा होता है। इसके फलों में जबरदस्त महक (खुशबू) होती है। यह नीबूवर्गीय फलों में अनोखा फल है, क्योंकि इसमें पाला सहने की अद्भुत क्षमता है। यह सर्दियों में -9 डिग्री सेल्सियस तापमान को सह सकता है। </p> <h4 style="text-align: justify;">युजु का उपयाेग</h4> <p style="text-align: justify;">युजु की उत्पत्ति हांलाकि चीन में हुई, परंतु यह जापान में अधिक लोकप्रिय हुआ। अब इसे व्यावसायिक स्तर पर चीन, जापान एवं कोरिया में पैदा किया जाता है। जापान में युजु को कई व्यंजनों में उपयोग करते हैं। इसे सॉस, सिरका, सीरप, चाय, दाल, मदिरा, चॉकलेट आदि में भी प्रयुक्त करते हैं। कोरिया में इसे मार्मेलेड एवं चाय बनाने में प्रयोग करते हैं। अब यह संयुक्त राज्य अमेरिका में भी लोकप्रिय हो रहा है। यहां लोग इसका जूस निकालते हैं। </p> <h3 style="text-align: justify;">लाइमक्वेट </h3> <h4>झाड़ीनुमा पौधा</h4> <p style="text-align: justify;">यह लाइम एवं कुमक्वेट का संकर फल है, जिसे ‘वाल्टर टेनीसन स्विंगल’ ने वर्ष 1909 में विकसित किया था। लाइमक्वेट एक छोटा सा पेड़ या झाड़ीनुमा पौधा होता है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/PI2.jpg" width="145" height="127" /></p> <h4 style="text-align: justify;">विटामिन ‘सी’ की अच्छी मात्रा</h4> <p style="text-align: justify;">इसकी पत्तियां नीबूवर्गीय फलों की तरह ही होती हैं। लाइमक्वेट में शुरू से भरपूर फल लगते हैं। फल छोटे-छोटे, ओवल आकार एवं पीत-हरे रंग के होते हैं, जिनमें बहुत कम बीज होते हैं। इसका छिलका मीठा, परंतु गूदा लाइम की तरह मीठा-कड़वा होता है। इसके सम्पूर्ण फल को खा सकते हैं या जूस एवं छिलके को अन्य फलों के जूस को सुवास देने के लिए प्रयुक्त कर सकते हैं। इसके फलों में विटामिन ‘सी’ की अच्छी मात्रा होती है। </p> <h4 style="text-align: justify;">पुष्पण व फलन </h4> <p style="text-align: justify;">लाइमक्वेट को घर के अंदर एवं बाहर कहीं भी लगाया जा सकता है। घर के अंदर इसे गमलों में लगाते हैं। रोपण के 5-7 माह बाद ही इसमें पुष्पण व फलन शुरू हो जाती है।</p> <h4 style="text-align: justify;">शीतरोधी </h4> <p style="text-align: justify;">इस फल को जापान, इजराइल, स्पेन, मलेशिया, दक्षिणी अफ्रीका, आर्मिनिया, इंग्लैंड एवं संयुक्त राज्य अमेरिका (मुख्यतः कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा एवं टैक्सास) के उन क्षेत्रों में उगाया जा रहा है, जहां का तापमान 10-30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। लाइमक्वेट, सामान्यतः लाइम से अधिक परंतु कुमक्वेट से कम शीतरोधी होता है। इसकी कुछ प्रमुख किस्में हैंः युस्टिस, लेकलैंड, तवारेस आदि। </p> <h3 style="text-align: justify;">टेंजोर </h3> <h4>टेंग एवं ऑरेंज </h4> <p style="text-align: justify;">यह नीबूवर्गीय फलों का एक संकर फल है, जो टेंजेरिन एवं नारंगी के संकरण से टेंजोर विकसित किया गया है। यह नाम टेंजेरिन के ‘टेंग’ एवं ऑरेंज के ‘ओर’ से मिलाकर बनाया गया है। इसके फलों का छिलका काफी मोटा होता है, जिसे आसानी से निकाला जा सकता है। गूदा चमकीले नारंगी रंग का, खट्टा-मीठा एवं पूर्णतः सुवास वाला होता है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC3.jpg" width="197" height="259" /></p> <p style="text-align: justify;">विश्व के कई हिस्सों में टेंजोर कम जाना पहचाना फल है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, इंडोनेशिया में यह काफी प्रचलित है। यही कारण है कि इसकी कई किस्में जैसे-मर्कट, टेंपल, किंग, हनी मर्कट, ऊमाटिल्ला, सेहोका आदि काफी प्रसिद्ध हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : फल-फूल पत्रिका(आईसीएआर), राम रोशन शर्मा’’खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012</p>