प्राकृतिक रबराइज्ड फूलदान प्राकृतिक रबराइज्ड फूलदान/गमले पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ, वजन में हल्के, लचीले तथा अधिक समय तक उपयोग में आते हैं। उच्च लचीलापन और अपेक्षाकृत कम मजबूती इनकी कमियां हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए भाकृअनुप-केन्द्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सिरकॉट), मुम्बई ने कृषि अवशेषों को प्राकृतिक रबड़ के साथ प्रबलित करते हुए फूलदान बनाने की नई तकनीक का विकास किया है। इस तकनीक द्वारा इष्टतम लचीलेपन के साथ अधिक मजबूत गमले व फूलदान बनाए जा सकते हैं। संस्थान को कपास, केले के रेशे, हरे व भूरे रंग के नारियल की भूसी, धान की भूसी और कृषिजन्य अपशिष्टों/बायोमास के विभिन्न प्रारूपों को प्राकृतिक रबड में कंपोजिट करके उत्तम उत्पाद निर्मित करने का सफल अनुभव है। पारंपरिक मिट्टी तथा प्लास्टिक के फूलदानों के विकल्प के रूप में विकसित किए गए इस उत्पाद की निर्माण तकनीक बहुत ही सरल एवं पर्यावरण अनुकूल है। पारम्परिक रूप से, बगीचे में या ऑफिस,घरों व गलियारे में उपयोग होने वाले गमले/फूलदान मिट्टी, प्लास्टिक अथवा सिंथेटिक (कृत्रिम) रबड़ से बने होते हैं। हालांकि इनका प्रयोग व्यावसायिक तौर पर किया जाता है, परंतु इनके कुछ नुकसान भी हैं, जो इस लेख में बताए गए हैं। उत्पाद की तकनीकी विशेषताएं कृषि अवशेषों द्वारा प्रबलित रबरयुक्त कंपोजिट गैर-टायर क्षेत्र में प्राकृतिक रबर का मूल्यवर्धन सामान्य रूप से स्थिर व अटूट लचीलेपन के कारण बढ़ती हुई पौधों की जड़ों को कम से कम नुकसान। जैव-विघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) मिट्टी के गमले/फूलदान बड़ा आकार और भारी होने के साथ इनमें कोई लचीलापन नहीं होता। उच्च तापमान की परिस्थितियों में जल का वाष्पीकरण अधिक होता है। इससे पौधों को ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है। सामान्य रखरखाव के दौरान इनके टूटने की आशंका अधिक होती है इसलिए बार-बार प्रतिस्थापन करना पड़ता है। घरों की आंतरिक सजावट में उपयोग के दौरान इन फूलदानी से मिट्टी व जल का रिसाव होता है, जो अवांछनीय है। प्लास्टिक के गमले/फूलदान गर्मियों के मौसम में, प्लास्टिक की पतली परत बाहरी तापमान से कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करती और उससे पौधों की जड़ों को नुकसान होता अधिक समय तक सूर्य की रोशनी में रहने से इनका रंग फीका पड़ जाता है तथा कुछ समय पश्चात ये नाजुक/भंगुर हो जाते हैं। प्लास्टिक के फूलदानों से जल व मिट्टी के अवांछनीय रिसाव की समस्या है। सामान्य रखरखाव के दौरान सतह पर खरोंच आने की आशंका रहती है। उपयोग सभी प्रकार के आंतरिक एवं बाहरी सजावट प्रयोजन के लिए उपयुक्त, जैसे ड्राइंग रूम, बरामदा, बालकनी, गैराज टैरेस फार्मिंग होटल लाउंज रिसेप्शन हॉल पेट्रोल पम्प कार्यालय एवं सभा कक्ष हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन निर्माण तकनीक विभिन्न कृषि अवशेषों को प्राकृतिक रबड़ के साथ प्रबलित करके एक नए रबड़ कंपोजिट का निर्माण किया गया है। इसके लिए चयनित अवशेषों के बारीक टुकड़ों को इच्छित अनुपात में प्राकृतिक रबड़ के साथ मिश्रित किया गया। इसके बाद भिन्न-भिन्न आकर्षक रंगों को भी इस मिश्रण में डाला गया। रबरयुक्त कंपोजिट शीट को विशिष्ट तापमान और दबाव की परिस्थिति में विभिन्न आकारों में ढाला गया। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप नवीन गमलों का विकास किया गया। वर्तमान उत्पादों की तुलना में विशेषताएं पारम्पारिक गमलों की तुलना में 10-15 गुना अधिक टिकाऊ किफायती एवं वाजिब दाम परिवहन तथा रखरखाव में आसानी आकर्षक रंग व रूप कार्यालय/घरों में आंतरिक सजावट के लिए बेहतर विकल्प महंगे फर्नीचर पर रखे जाने पर कोई दाग या खरोंच नहीं पर्यावरण अनुकूल कॉर्पोरेट हाउस से लेकर आम लोगों के घरों, बगीचे या अन्य आंतरिक सजावट के लिए एक बेहतर विकल्प सिरकॉट, मुम्बई द्वारा ग्राहकों को प्राप्त हुआ है। 'प्राकृतिक रेशायुक्त रबराइज्ड गमले एवं फूलदान' की अन्य जानकारी के लिए संस्थान के माटुंगा स्थित मुख्यालय में एग्रीबिजिनेस इंक्युबेशन सेंटर से संपर्क करें या circotrabi@gmail.com पर इमेल कर सकते हैं। स्रोत : फल-फूल पत्रिका(आईसीएआक) ए.के. भारीमल्ला, मनोज कुमार महावर, पी.जी. पाटील, प्राची म्हात्रेवरिष्ठ वैज्ञानिक, वैज्ञानिक, निदेशक, पुस्तकालयाध्यक्ष, भाकृअनुप-केकप्रौअनुसं, मुंबई (महाराष्ट्र)।