बड़ी मात्रा में गुड़ का इस्तेमाल दुनियाभर में मिठाइयों, बेकरी और कन्फेक्शनरी उत्पादों के साथ-साथ दवाइयों में बड़ी मात्रा में गुड़ का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे चीनी की तुलना में गुड़ की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अब गुड़ उत्पादक छोटे और मंझोले किसान भी इससे अधिक लाभ कमा सकते हैं। केन्द्र सरकार की स्टार्टअप योजना का लाभ उठाकर गन्ना किसान, गुड़ उत्पादन इकाई स्थापित करके उद्यमी भी बन सकते हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के कृषि एवं प्रसंस्करित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से वर्ष 2019-20 के दौरान विश्व को 1633.64 करोड़ रुपए यानी 227.90 मिलियन अमरीकी डाॅलर मूल्य के 3,41,155.34 मीट्रिक टन गुड़ और उसके उत्पादों का निर्यात किया है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत अब चीनी के साथ ही गुड़ का भी बड़ा निर्यातक बनकर उभर रहा है। चीनी के साथ गुड़ का उत्पादन भी देश में संगठित तौर पर हो सके, इसके लिए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के गन्ने से संबंधित विभिन्न शोध संस्थान और विभिन्न राज्य सरकारों के कृषि एवं गन्ना विभाग, किसानों को प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। सेहत के लिए लाभकारी है गुड़ गुड़ एक अशोधित प्राकृतिक चीनी है। यह बिना किसी रसायन के प्रयोग से उत्पादित किया जाता है। विश्व में कुल गुड़ उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अकेले भारत में किया जाता है। गुड़ को लोकप्रिय रूप से ‘औषधीय चीनी’ के नाम से जाना जाता है और पोषकता के आधार पर यह शहद के साथ तुलनीय है। 3000 वर्षों से इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में मीठे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में गुड़ को गले और पफेपफड़ों के संक्रमण और इलाज में पफायदेमंद समझा जाता है। शोधित चीनी मुख्य रूप से ग्लूकोज और प्रफक्टोज होती है, वहीं गुड़ में ग्लूकोज और सुक्रोज शामिल हैं। लेकिन इसमें खनिज और विटामिन भी होते हैं, जोकि शोधित चीनी में नहीं होते हैं। गुड़ के खनिज तत्वों में कैल्शियम, पफाॅस्पफोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, लौह और जिंक तथा तांबे की कुछ मात्रा होती है। विटामिन में पफोलिक एसिड और बी. काॅम्प्लेक्स शामिल हंै। इस प्रकार, गुड़ ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है उसके अलावा, यह गठिया रोग और पित्त के विकारों को रोकता है। इतना ही नहीं थकान को हटाने में भी मदद करता है। यह मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को शिथिल करने में, रक्तचाप को बनाए रखने तथा जल अवरोधन को कम करने में भी सहायक है। गुड़, हीमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाने में और खून की कमी को रोकने में भी मददगार है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय,भारत सरकार के अंतर्गत आने वाला खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग भी गुड़ एवं खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। इसमें गन्ना पेराई के लिए कोल्हू खरीदने के लिए गुड़ उत्पादन इकाई स्थापित करने को लेकर आर्थिक सहायता दी जा रही है। गुड़ का उत्पादन देश में सबसे ज्यादा गन्ना और गुड़ का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में छोटी-बड़ी मिलाकर 10 हजार से ज्यादा गुड़ उत्पादन इकाइयां हैं मुजफ्फरनगर जिले में एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी है। यहां पर गन्ना पैदा करने वाले किसानों के अलावा लाखों लोग गुड़ उद्योग से जुड़े हुए हैं। इन गुड़ उत्पादन इकाइयों को अत्याधुनिक बनाने के लिए भी काम किया जा रहा है। भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ भी गुड़ बनाने के लिए लोगों को प्रशिक्षित कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में चीनी मिलें बंद हो गई हैं, वहां गुड़ उत्पादन की भरपूर संभावनाएं हैं। ऐसे क्षेत्रों में बेरोजगार युवाओं को गुड़ उत्पादन में रोजगार देने के लिए गुड़ प्रसंस्करण और प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की जा रही है। संस्थान की तरफ से गुड़ उत्पादकता को बढ़ाने के लिए गुड़ उत्पादन की भठ्ठी और चिमनी का बेहतर डिजाइन तैयार किया गया है। इससे गुड़ उत्पादन में चिमनी से कम धुआं निकलेगा और पर्यावरण में प्रदूषण भी कम फैलेगा। स्त्राेत : खेती पत्रिका, आईसीएआर, दिल्ली।