चाैड़ी पंक्ति विधि चाैड़ी पंक्ति विधि द्वारा लगातार 7-8 वर्षों से 100 टन प्रति एकड़ गन्ना उपज प्राप्त करने वाले श्री सुरेश कबाडे़, गांव कारंदवाड़ी, तहसील वालवा, जिला सांगली, महाराष्ट्र पूरे भारत में काफी चर्चित गन्ना किसान हैं। श्री कबाडे़ के पास लगभग 30 एकड़ जमीन है। उनके पिताजी का सपना था कि जिन्दगी में एक बार 1000 टन गन्ना निकालना है, लेकिन वे उस लक्ष्य तक कभी भी नहीं जा सके। 1000 टन उपज पूरी 30 एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती करने पर भी वे अधिकतम 956 टन प्रति एकड़ यानी 31.86 टन की औसत से गन्ना उपज प्राप्त कर पाये, जबकि आज श्री सुरेश कबाड़े जी 10 एकड़ में ही 1000 टन उपज प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2005-06 में पहली बार 4.5 फीट पंक्ति से पंक्ति एवं 2 फीट आंख से आंख की दूरी पर उन्होंने गन्ना किस्म को.-86032 की बुआई की। सभी खाद मृदा के अंदर जड़ के नजदीक कुदाली से नाली निकाल कर दी गयी। जब-जब यूरिया का इस्तेमाल करना था, तब-तब यूरिया को 48 घंटे पहले नीम कोटिंग किया गया। इसके कारण यूरिया का नाइट्रोजन धीरे-धीरे गन्ने को मिलता रहा। जैविक खाद का इस्तेमाल पहली बार जैविक खाद के भी इस्तेमाल का शेड्यूल बनाया। इसमें एजोटोबैक्टर, फॉस्फोरस सोल्यूब्लाइजिंग बैक्टीरिया, पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया, एसीटोबैक्टर इन सभी जीवाणुओं का उपयोग ड्रैचिंग के रूप में गन्ना रोपण के 35 दिनों में 50 दिनों में, 65 दिनों में और 80 दिनों में किया। पत्तियां निकालते समय कमजोर, अशक्त गन्ने, जो फसल कटाई तक नहीं रह पाते सब निकाल दिए। गन्नों की संख्या पर पूरा ध्यान दिया। प्रत्येक वर्ग फीट पर कम से कम एक गन्ना रहे। इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप प्रति एकड़ 43000 के आसपास गन्नों की संख्या रखने में कामयाब रहे। पर्याप्त दूरी के कारण गन्नों की मोटाई व समय पर पोषक तत्वों की आपूर्ति के कारण लंबाई भी अच्छी थी। उपज 107 टन प्रति एकड़ वर्ष 2006-07 के नवम्बर से दिसम्बर तक कटाई शुरू हो गई। कटाई के समय गन्ने में 46 से 48 पोरियां थी। प्रत्येक पोरी की लंबाई 9-10 इंच की थी और 48 पोरी के गन्ने की लंबाई अगोला (टॉप) छोड़कर 19 फीट थी। को.-86032 के 10 गन्नों का औसत वजन 30 कि.ग्रा. था तथा एक गन्ने का अधिकतम वजन 3.4 कि.ग्रा. मिला। उस वर्ष कुल 13 एकड़ में गन्ने का रोपण किया था, जिसमें कुल 1460.55 टन गन्ना निकला और प्रति एकड़ की औसत उपज 107 टन प्रति एकड़ थी। स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), रविन्द्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पादप प्रजनन), प्रधान अन्वेषक बीज परियोजना,एम.आर. मीना गन्ना वैज्ञानिक (पादप जनन), पूजा, वैज्ञानिक (पादप कार्यिकी), एम.एल. छाबड़ा, प्रधान वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), एस.के. पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक(कीट विज्ञान), भाकृअनुस-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, करनाल और बक्शी राम निदेशक, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर