लक्षण प्रश्नः कंडुआ रोग के खेत में लक्षण क्या होते हैं? उत्तरः संवर्धक शिखर क्षेत्रा का चाबुक जैसी आकृति में परिवर्तन जिसमें लाखों की संख्या में काले पाउडर जैसे बीजाणु उपस्थित रहते हैं। ये पारभासी सफेद चांदी जैसी झिल्ली से ढके रहते हैं। लक्षण दिखने की अवधि प्रश्नः इसके लक्षण कब प्रकट होते हैं? उत्तरः सभी अवस्थाओं में रोग के लक्षण देखे जा सकते हैं। अधिक लक्षण गन्ने के बनने के दौरान देखे जाते हैं। पेड़ी में लक्षण बहुत पहले देखे जा सकते हैं। अति तीव्र संक्रमण के कारण पेड़ी में फुटाव के समय ही चाबुक का बनना देखा जा सकता है। चाबुक का बनना प्रश्नः कंडुआ रोग में चाबुक का बनना क्यों देखा जाता है? उत्तरः कंडुआ रोग कवक व्यवस्थित ढंग से गन्ने को संक्रमित कर शीर्ष मेरिस्टेम को भी संक्रमित करता है। शीर्ष मेरिस्टेम को संक्रमित कर कवक वृद्धि कर रही शाखा को चाबुक की तरह की आकृति में परिवर्तित कर उसमें लाखों की संख्या में काले पाउडर जैसे बीजाणु जो पारभासी सफेद चांदी जैसी झिल्ली से ढके रहते हैं पैदा कर देते हैं। रोग का फैलाव प्रश्नः यह रोग कैसे फैलता है? उत्तरः प्रथम स्तानांतरण संक्रमित गन्ना बीज के टुकड़ों से होता है। खेत में चाबुकों के पफटने से बीजाणु, हवा द्वारा एक से दूसरे गन्ने में स्थानांतरित होते हैं। झाड़ीदार गन्ने प्रश्नः प्रभावित गन्ने झाड़ीदार कैसे हो जाते हैं? उत्तरः मेरिस्टेम के संक्रमित होने से शीर्ष का प्रभुत्व खत्म हो जाता है जिससे बाजू वाली शाखाएं वृद्धि के लिये प्रेरित हो जाती हैं और पौधे झाड़ीदार प्रदर्शन करते दिखते हैं। उत्पादन मे हानि प्रश्नः किन हालातों में कंडुआ रोग के कारण उत्पादन में अधिक हानि होती है? उत्तरः जब पेड़ी की फसल में शुरुआती अवस्था में ही कंडुआ रोग तीव्र रूप में आ जाता है तो उत्पादन में बहुत कमी आ जाती है। गर्म रोगोपचार प्रश्नः क्या गर्म रोगोपचार इस रोग के लिये कारगर है? उत्तरः हां, बीज टुकड़ों को कवकनाशी (ट्राइडाइमेफोन 0.1 प्रतिशत) के घोल से 30 मिनट तक उपचारित करने से बीज में से रोगजनक को खत्म किया जा सकता है। प्रभावित फसल की पेड़ी प्रश्नः क्या प्रभावित फसल की पेड़ी ली जा सकती है? उत्तरः वह फसल जिसमें 2 प्रतिशत से अधिक संक्रमण दिखाई दे, उसकी पेड़ी फसल नहीं लेनी चाहिये। गन्ना बीज का प्रयोग प्रश्नः रोग के किस स्तर तक फसल को गन्ना बीज के लिये प्रयोग किया जा सकता है उत्तरः संक्रमण के 1 प्रतिशत स्तर तक ही फसल को गन्ना बीज के लिये प्रयोग किया जा सकता है। स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर),पूसा राेड़,नई दिल्ली।