परिचय ‘ढाक के तीन पात’ या टेसू’ के फूल को कौन नहीं जानता| इसे ही पलास, परसा, छिऊल, या खगरा और अंग्रेजी में बस्टर्ड टीक या बंगाल कीनो, बंगला में पलास, परसा यह कमरकस, उड़िया में मुरका, तेलगू में मोदुगा या पालाडुलु, मलयालम में पिलाचम या मुरुक्का मरम, मुंडारी में मुरुद, संथाली में मुरूप दारे मुरूप, कोल में मुरुद तथा वैज्ञानिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा है| इस पर लाख की खेती यानि लाख कीट पालन से वृक्षों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता| रंगीनी लाख कीट से एक वर्ष में दो फसलें ली जाती हैं जिसे बैसाखी (ग्रीष्मकालीन) और कतकी (वर्षाकालीन) फसल कहते हैं| बैसाखी फसल हेतु लाख कीट या बीहन को वृक्षों पर अक्तूबर या नवम्बर maah maaमाह में तथा कतकी के लिए जून या जुलाई माह में चढ़ाया जाता है| वैसाखी और कतकी फसल बीहन चढ़ाने के बाद क्रमशः 8 और 4 माह में तैयार हो जाती है| कीट पालन की सामान्य प्रक्रियायें वृक्षों की काट-छांट : वृक्षों पर बीहन चढ़ाने या क्रीड़ा छोड़ने (कीट संचारण) के पहले वृक्षों की काट-छांट इसलिए आवश्यक है क्योंकि लाख कीट नर्म, मुलायम और रसदार टहनियों पर अच्छा पलता है| काट-छांट की प्रक्रिया, कीट छोड़ने के 6 maah माह पहले सबसे उपयुक्त है अत: बैशाखी फसल जो अक्तूबर या नवम्बर में लगायी जाती है उसकी काट-छांट अप्रैल माह में करना चाहिए| यदि पहले से पेड़ पर लाख नहीं हो तो यह प्रक्रिया मार्च में जब फली आना प्रारंभ हो जाये तभी कर लेना चाहिए| काट-छांट हल्की करें| अंगूठे (2.5 से.मी. व्यास) से मोटी टहनियाँ न कांटें| 1. 25 से.मी. से 2.5 से.मी. व्यास की टहनियों को एक हाथ (एक से डेढ़ फीट) की ऊंचाई से कांटे| 1. 25 से.मी. से व्यास से कम मोटाई की टहनियों को उनके उत्पति के स्थान से कांटे| सूखी, रोगग्रस्त, टूटी या फटी हुई टहनियों को क्षतिग्रस्त स्थान से कांटे, सूखे ठूँठ को भी उनके उत्पति स्थान से काट कर निकाल दें| काट-छांट के लिए तेजधार वाली दावली का प्रयोग करें| टहनियाँ तिरछी, साफ और एक बार में कांटे| पहली बार काट-छांट करते समय पेड़ों को उचित स्वरुप देने हेउ थोड़ी मोटी डाल को भी काटा जा सकता है| कीट संचारण पेड़ों पर कीट संचारण की प्रक्रिया कई स्थानों पर बीहन लाख की डंडियों को बांधकर किया जाता है, जो तीन प्रकार से किया जाता है (i) पारम्परिक या कृषक विधि-एक से तीन फीट परिपक्व लाख कीट युक्त टहनी पत्ती सहित नये पेड़ों पर फंसा देते हैं (ii) वैज्ञानिक तरीके के अंतर्गत बीहन लाख डंडियों को बण्डल बनाकर सुतली से कंही-कंही बांधते हैं (iii) शत्रु कीटों से सुरक्षा हेतु 60 मेश नाईलान की जाली में भरकर पेड़ों पर बांधते हैं| प्रत्येक सौ-सौ ग्राम को 60 मेश की नाईलान जाली थैले (27X12) से मी. या सुविधानुसार नाप) में भरकर प्लास्टिक सुतली से थैले के दोनों ओर बांध दें तथा सुतली थोड़ी बड़ी रखें, जिससे वृक्षों की डालियों पर इसे सुतली द्वारा बांधा जा सके\ जाली न मिलने पर बीहन लाख की 100 ग्राम की डंडियों का प्लास्टिक सुतली से बांधकर तब पेड़ों की डालियों पर कई स्थानों पर बांधें| बण्डल बांधने के आस-पास की टहनियों पर यदि कीट भर जाए तो बण्डल खोलकर दूसरे ऐसे स्थान पर स्थानान्तरित कर दें, जहाँ की टहनियाँ खाली हों| फूंकी उतारना लाख शिशु कीट का जैसे ही बीहन लाख से निकलना समाप्त हो जाये वैसे ही लाख लगी खाली डंडी ही फूंकी कहलाती है| छिली लाख शीघ्र से शीघ्र बेच दें अन्यथा इसमें विद्यमान शत्रु कीट तितली और वयस्क पर जीवी बनकर नयी फसल पर अंडे देंगें| फसल कटाई परिपक्व फसल का उपयोग बीहन लाख के रूप में करना है तो फसल कटाई, शिशु कीट निकलने का समय ध्यान में रखकर करना चाहिए| अरी या कच्ची फसल जिसे अप्रैल में काटना है, कभी भी काट सकते हैं| अक्तूबर या नवम्बर मी बीहन काटते समय सिर्फ पपड़ी वाली लाख डंडी काटें तथा छुटपुट दाने वाली टहनियाँ छोड़ दें, जिसमें से इसी समय शिशु कीट निकलकर खाली जगह में बैठेगें और अप्रैल में वृक्षों की काट-छांट करते समय अरी (कच्ची) लाख भी मिल जाएगी| अप्रैल में अरी खंड के वृक्षों से कच्ची लाख पूर्ण रूप से कांटे और इसी समय मरी टहनियाँ यदि हों तो उसे भी काट दें| दवा छिड़काव शत्रु कीटों की रोकथाम तथा कोहरे (कुहासा) से होने वाले नुकसान से फसल को बचाने के लिए कीटनाशक/फुफंदनाशक छिड़कने की आवश्यकता पड़ सकती है| पलास पर फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस.सी. 0.0.0 7% का छिड़काव शत्रु कीटों की रोकथाम के लिए तथा कारबेन्डाजिम फुफंद के लिए आवश्यक है| पहला छिड़काव बीहन चढ़ाने या कीट निर्गमन के 30 दिन पर तथा दूसरा 60 दिन पर| कीट और फुफंदनाशक दवा बनाने के लिए 1 5 ली.पानी में लगभग 22-25 मि.ली. फिप्रोनिल तथा उसी में कारबेन्डाजिम (10 ग्राम पाउडर) मिलाकर बनायें | खंड प्रणाली पलास के कुल वृक्षों को तीन खंड में बाँटकर खेती कर सकते हैं| दो खण्ड से बीहन लाख तथा शेष एक का बैसाखी अरी फसल के उत्पादन हेतु उपयोग करते हैं पहले बीहन खंड से प्राप्त बीहन का उपयोग दूसरे बीहन खंड तथा अरी खंड के वृक्षों को कीट संचारण हेतु उपयोग करते हैं| अतः पहले बीहन खंड के वृक्षों से 2,4,6,8 इत्यादि वर्षों में तथा दूसरे बीहन खंड के वृक्षों से 3,5,7,9 इत्यादि वर्षों में प्रति वर्ष अक्तूबर maahमाह में नियमित रूप से बीहन मिलेगा जबकि अरी खंड के वृक्षों से प्रति वर्ष अप्रैल में कच्ची लाख मिलेगी| स्रोत:-भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) नामकुम, राँची|