<h3 style="text-align: justify;">स्वस्थ गन्ना बीज उत्पादन</h3> <p style="text-align: justify;">श्री ज्ञान घई, गांव काच्छवा, जिलाः करनाल, हरियाणा वर्ष 2009 से भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्राीय केंद्र, करनाल की बीज उत्पादन गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के मुखय हितधारकों जैसे-चीनी मिलों और किसानों के लिए गन्ना प्रजाति को.-0238 का हजारों टन स्वस्थ गन्ना बीज उत्पादन किया है। उन्हें गेहूं फसल की कटाई के बाद भी (अप्रैल-मई के दौरान) को.-0238 प्रजाति की खेती करने पर लगभग 400 क्विंटल की गन्ना उपज मिल रही थी। 3-4 वर्ष तक इस किस्म के साथ अनुभव के आधार पर उन्हें एहसास हुआ कि वह और भी बेहतर कर सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="173" height="152" /></p> <h3 style="text-align: justify;">प्रो ट्रे एवं नर्सरी ट्रे</h3> <p style="text-align: justify;">उन्होंने भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, करनाल की बीज उत्पादन टीम के साथ विभिन्न खेती तकनीकों पर प्रयोग करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। उन्हें प्रो ट्रे में गन्ना पौध तैयार करने के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने शरद, वसंत और ग्रीष्मकालीन बीज की फसल पौध रोपाई के लिए अगस्त से अप्रैल तक विभिन्न अवधि के दौरान खांचों वाली नर्सरी ट्रे में पौध नर्सरी तैयार की। वर्ष 2015 की जुलाई में 4.5 फीट पंक्ति से पंक्ति की दूरी पर खेत में क्यारी तैयार करके फूलगोभी की फसल लगाई तथा सितंबर में नाली में दो फीट पौधे से पौधे की दूरी पर को.-0238 प्रजाति के पौधों का रोपण किया। इस प्रकार सितंबर से नवंबर के दौरान फूलगोभी की बिक्री से प्रीमियम मूल्य (25-30 रुपये प्रति कि.ग्रा.) प्राप्त हुआ। </p> <h3 style="text-align: justify;">अंतर्वर्ती फसल प्रणाली का सफल प्रयाेग</h3> <p style="text-align: justify;"> श्रमिकों और अन्य निवेश के लिए किए गए सभी व्यय घटाने के बाद, फूलगोभी से 80,000 रुपये बचाए। श्री घई ने अक्टूबर में फूलगोभी की फसल की कटाई शुरू कर दी थी, इसलिए नवंबर के मध्य तक टमाटर को अंतर्वर्ती फसल के रूप में लगाया, जब तक फूलगोभी की फसल का उत्पादन पूरा हुआ, तब तक <a href="../../../../../../../../agriculture/crop-production/91593f93893e92894b902-915947-93293f90f-92e94c93892e-90692793e93093f924-91594393793f-93893293e939/92e93e93993593e930-91594393793f-91593e93094d92f/दिसंबर-माह-के-कृषि-कार्य/सब्जी-वाली-फसलें/टमाटर-की-फसल">टमाटर की फसल</a> फल देने लगी। उन्होंने मध्य नवंबर के दौरान अंतःफसल टमाटर में अंतर्वर्ती फसल के रूप में क्यारी के बीच में (फूलगोभी की कटाई के तुरंत बाद) प्याज (एकल पंक्ति) की रोपाई की। टमाटर की फसल से लगभग 35000 रुपये अर्जित किए और हरी प्याज (दिसंबर-जनवरी) की बिक्री से 15,000 रुपये कमाए।</p> <p style="text-align: justify;">फरवरी तक गन्ना फसल में टिलरिंग (लगभग 10-15 टिलर/पौधा) पूरी हुई और फसल लगभग 5-6 फीट लंबी थी। फर गन्ना फसल की उचित देखभाल की तथा सितंबर के दौरान बीज फसल के रूप में कटाई की गई। उन्हें 650 क्विंटल/एकड़ (टॉप और पत्तियों सहित) की उत्पादकता मिली और 1,95,000 रुपये की बीज फसल बेची गई। बीज खरीदने वाली एजेंसी द्वारा कटाई और लोडिंग शुल्क का वहन किया जाता है। इसलिए गन्ना बीज फसल के लिए उसका व्यय न्यूनतम था (45,000 रुपये की पट्‌टा दर + 15,000 रुपये गन्ना फसल की देखभाल)। अंतः फसल के अधिकांश क्रियाकलापों जैसे-खाद-उर्वरक, <a href="../../../../../../../../agriculture/91594393793f-906917924/90591c94893593f915-90692693e928/91693092a92493593e930-92893f92f90292494d930923">खरपतवार नियंत्रण</a>, सिंचाई आदि से गन्ना की फसल भी लाभान्वित हुई।</p> <h3 style="text-align: justify;"> 5 गुना अधिक आय </h3> <p style="text-align: justify;">वह अपने क्षेत्र में सामान्य किसान द्वारा गन्ना फसल से प्रति एकड़ प्राप्त होने वाली 35-40 हजार रुपये (खर्चे में 40-45 हजार रुपये की लीज दर सम्मिलित) आय की तुलना में 2,11,500 रुपये एकड़ का लाभ प्राप्त करने में सफल रहे। इसलिए उन्होंने परंपरागत गन्ना खेती विधि की तुलना में लगभग 5 गुना अधिक आय हासिल की। अब उनके गांव के अधिकांश गन्ना किसान पौध नर्सरी विधि से स्वस्थ पौधों द्वारा चौड़ी पंक्ति विधि से गन्ना खेती करते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), रविन्द्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पादप प्रजनन), प्रधान अन्वेषक बीज परियोजना,एम.आर. मीना गन्ना वैज्ञानिक (पादप जनन), पूजा, वैज्ञानिक (पादप कार्यिकी), एम.एल. छाबड़ा, प्रधान वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), एस.के. पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक(कीट विज्ञान), भाकृअनुस-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, करनाल और बक्शी राम निदेशक, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर</p>