<h3 style="text-align: justify;">कारक</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः कौन सा रोगजनक, घासीय शाखा रोग के लिये उत्तरदायी है? </p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः फाइटोप्लाज्मा </p> <h3 style="text-align: justify;">विशिष्ट लक्षण</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः घासीय शाखा रोग के विशिष्ट लक्षण क्या हैं? </p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः अधिक ब्यांतों का बनना, जो पतले, लंबे व हरिमाक्षयिता वाले होते हैं। अगर गन्ने प्रभावित होते हैं, तो वे छोटे रह जाते हैं और उनकी अक्षवत्तीय कलिकाओं में फुटाव देखा जाता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">पोषक तत्वों की कमी के लक्षण</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः घासीय शाखा रोग के लक्षणों को दूसरे आमतौर पर पाये जाने वाले पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों से अलग करते हुए कैसे पहचानें? </p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः अति अधिक ब्यांतों का बनना, जिनके साथ किसी हद तक या पूरी तरह से हरिमाक्षयिता पत्ते घासीय शाखा रोग में देखे जाते हैं। दूसरी ओर पोषक तत्वों की कमी के कारण अति अधिक ब्यांतों का बनना नहीं देखा जाता। इसके अलावा केवल घासीय शाखा रोग में प्रभावित गन्नों में अक्षवत्तीय कलिकाओं में ही पफुटाव देखा जाता है। लोहे की कमी के कारण हुई हरिमाक्षयिता के लक्षण फेरस सल्फेट के छिड़काव से खत्म हो जाते हैं। लेकिन घासीय शाखा रोग के कारण हुई हरिमाक्षयिता के लक्षण छिड़काव से दूर नहीं होते। इसके अलावा घासीय शाखा रोग केवल अलग-अलग शाखा समूहों में दिखाई देता है, जबकि पोषक तत्वों की कमी के कारण हरिमाक्षयिता के लक्षण खेत में टुकड़ों में दिखाई देते हैं। </p> <h3 style="text-align: justify;">पेड़ी में अधिक प्रभाव</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः यह रोग पेड़ी में क्यों अधिक तीव्र दिखाई देता है? </p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः रोगजनक की पौधा फसल में शुरुआती कम मात्रा के कारण इसमें कम हानि होती है। इस फसल से पेड़ी की फसल लेने से स्टब्बल्स में जो रोगजनक उपस्थित रहता है, वह नई निकलती शाखाओं को प्रभावित करना प्रारम्भ कर देता है। इन शाखा समूहों से पेराई योग्य गन्नों का बनना सम्भव नहीं होता। </p> <h3 style="text-align: justify;">फैलाव</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः इस रोग का रोगजनक कैसे फैलता है? </p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः संक्रमित गन्ने के बीज टुकड़े, रोगजनक का प्रथम स्रोत का काम करते हैं। कीट वैक्टर रोगजनक को खेत में एक गन्ने से दूसरे में फैलने में सहायक होते हैं। </p> <h3 style="text-align: justify;">तापमान उपचार</h3> <p style="text-align: justify;">प्रश्नः क्या इस रोग को तापमान उपचार द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है?</p> <p style="text-align: justify;">उत्तरः हां, घासीय शाखा रोगजनक को वातित भाप उपचार से बीज गन्ने के टुकड़ों से खत्म किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), पूसा राेड, नई दिल्ली। </p>