जनवरी पाले से बचाव के लिए खड़ी फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। शरदकालीन गन्ने के साथ ली गई विभिन्न अन्तःफसलों जैसे सरसों, तोरिया, मसूर, आलू, धनिया, लहसुन, मेथी, गेंदा प्याज तथा गेहूं आदि आवश्यकतानुसार निराई, गुड़ाई, कीट प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। बसतंकालीन बुआई की तैयारी शुरु कर दें। इसके लिए मृदा परीक्षण के बाद ही उर्वरकों का प्रयोग करें। बसंतकालीन बुआई के लिए कुल क्षेत्रफल का 1/3 भाग शीघ्र पकने वाली प्रजातियों के अंतर्गत रखें। इसके साथ ही बुआई के लिए स्वस्थ बीजों का चयन कर उनका विशेष प्रबंध करें। गन्ने से खाली हुए खेत की तैयारी कर पशुओं के लिए चारे की फसल एवं सब्जियों की खेती करें। अगेती पौधे की फसल की कटाई तापमान यदि कापफी कम हो तो न करें। इससे पेड़ी गन्ने में फुटाव उत्तम नहीं होगा। फरवरी पौध गन्ने की कटाई जमीन से सटाकर करें, जिससे फुटाव अच्छा होगा। यथासंभव पोगले न छोड़ें, इससे पेड़ी प्रबंध में कठिनाई होगी साथ ही उत्पादन अपेक्षित नहीं होगा। शरदकालीन गन्ने में सिंचाई एवं निराई, गुड़ाई तथा खरपतवार का नियंत्रण करें। गन्ना बीज जिन खेतों में रोकना हो उनमें सिंचाई आदि का विशेष ध्यान रखें। बुआई पूर्व बीज नर्सरी में यूरिया के प्रयोग से फुटाव अच्छा होता है। पेड़ी गन्ने की देखभाल करें, खाली जगह पर गैप फिलिंग करें तथा सिंचाई व गुड़ाई के बाद एनपीके आदि उर्वरकों का प्रयो कुल क्षेत्र के अनुसार प्रजातीय संतुलन को ध्यान में रखकर बुआई करें। गन्ना बीज उपचार के लिए पारायुक्त रसायन एग्लाल 3 प्रतिशत (560 ग्राम), एरिटान 6 प्रतिशत (280 ग्राम) या एमईएमसी 6 प्रतिशत (280 ग्राम), या बाविस्टीन 110 ग्राम को घोलकर टुकड़ों को उपचारित करें। बुआई के समय दीमक व अंकुरबेधक के नियंत्रण के लिए फोरेट-10 जी 25 कि.ग्रा. या सेविडाल 4:4 जी 25 कि.ग्रा. या क्लोरोपाइपफॉस-20 ई.सी. 5 लीटर/है. की दर से प्रयोग करें। गन्ने की बुआई के समय सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, सल्पेफट, सुपर शुगर कैन स्पेशल आदि का 25 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से) का भी प्रयोग करें। मार्च अच्छी उपज के लिए उत्तम प्रजातियों एवं बुआई की नई तकनीकों यथा ट्रेंच पद्धति का प्रयोग करें। सफेद गिडार के नियंत्रण के लिए बुआई के समय बबरिया वेसियाना एवं मेटारेजियम 5 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से 60:40 के अनुपात में प्रयोग करें। आय को बढ़ाने तथा संसाधनों के समुचित प्रयोग के लिए गन्ने के साथ-साथ उड़द, मूंग, प्रफांसबीन मक्का आदि की फसलें लें। सहफसल में उर्वरकों की अतिरिक्त मात्रा का प्रयोग करें। शरदकालीन गन्ने में यदि फरवरी में यूरिया की टापॅ ड्रेसिंग न की तो मार्च में सिंचाई के पश्चात 132 कि.ग्रा. यूरिया/ हेक्टेयर की दर से टॉप ड्रेसिंग करें। बावक गन्ने की कटाई उपरांत खेत में मेड़ जोतने के बाद ठूंठों की छंटाई पंक्तियों के दोनों तरफ गुड़ाई एवं रिक्त स्थानों में पूर्व अंकुरित पौधों से भराई करें। ऐसीटोबेक्टर एवं पीएसबी 5 कि.ग्रा./ हेक्टेयर की दर से प्रथम सिंचाई के उपरांत पौधों के कूंड़़ बनाकर डालना गन्ने चाहिए या बुआई के समय प्रयोग करें। कंडुआ रोग दिखाई देने पर पौधों को नष्ट कर दें। चोटीबेधक के अंड समूह को एकत्रित कर नष्ट कर दें। बसंतकालीन गन्ने में खरपतवार नियंत्रण के लिए 2 कि.ग्रा. ऐतरा जीन सक्रिय तत्व पानी में घोल बनाकर बुआई के तुरंत बाद छिड़काव करें। अप्रैल गन्ने के अच्छे फुटाव के लिए गुड़ाई कर कूंड़ बनाकर यूरिया खाद की दूसरी मात्रा का प्रयोग करें। शरदकालीन गन्ने के साथ अंतःफसल की कटाई यदि हो गई हो तो सिंचाई करें एवं उर्वरक की शेष मात्रा कूंड़ बनाकर डाल दें। यदि गेहूं के बाद गन्ने की बुआई कर रहे हैं तो लाइन से लाइन की दूरी घटाकर 65 सें.मी. कर लें। बीज की मात्रा भी बढ़ाकर प्रयोग करें, जिससे खेत में पौधों की संख्या उचित मात्रा में रहें। इसी माह में पायरिला का प्रकोप हो सकता है। यदि मित्रा कीट (अंड परजीवी) इपीरिकीनिया मिलेनोल्युका खेत में है तो कीटनाशी का प्रयोग न करें, बल्कि सिंचाई कर हल्के यूरिया का प्रयोग करें। मई सूखे से बचाने के लिए आवश्यकतानसुार सिंचाई करते रहें। इस माह में अगेती चोटीबेधक के नियंत्रण के लिए सिंचाई करते रहें। साथ ही सेवीडॉल 4:4 जी फोरेट-10 जी फरटेरा या कारटॉफ 25 कि.ग्रा./ हेक्टेयर या क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. 1 लीटर 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें, जब अंडे एवं पतंगें दिखाई पड़ें। अगेती चोटीबेधक के लिए ट्राइकोकार्ड 4/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। फसल की अच्छी बढ़वार कीट नियंत्रण एवं पोषक तत्वों की कमी के लिए यूरिया मक्रैोन्यूट्रीएंट का 2 प्रतिशत घोल एवं कीटनाशक रसायन जेसे एंडोसल्फान मेटासिड या क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. का 1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। यदि बसंतकालीन बुआई के समय खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्रोजीन का प्रयोग किया है तो इस माह 2-4 डी 1 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व का छिड़काव करें। जून उर्वरक की शेष मात्रा इस माह अवश्य पूर्ण कर लें। गुड़ाई पूर्ण करने के पश्चात मिट्टी चढ़ाई का कार्य अवश्य करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई करें। यदि देर से अर्थात अप्रैल में बुआई के समय नाइट्रोजन का उपयोग किया है तो इस माह में खरपतवार नियंत्रण के लिए 2, 4 डी. 1 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जुलाई गन्ने के जिन खेतों का ब्यात पूरा हो चुका है उनमें मिट्टी चढ़ा दें। चोटीबेधक की मादा तिल्ली जुलाई में पत्तियों की निचली सतह पर समूह में अंडे देती हैं। अंडे वाली पत्तियों को नष्ट कर दें तथा कार्बोफ्रयूरॉन 3 जी. 25 क्विंटल/हेक्टेयर की दर से अवश्य प्रयोग करें। चोटीबेधक के नियंत्रण के लिए ट्राइकोकार्ड 4/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। गुरदासपुरबेधक के नियंत्रण के लिए सूखे अगोले को काटकर जमीन में दबा दें तथा क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी./लीटर का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। जल निकासी का उचित प्रबंधन करें। वर्षा के दिनों में पर्याप्त वर्षा न होने पर 8-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। सूखे से बचने, जल के समुचित उपयोग एवं बिजली की कमी से निपटने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रयोग करें। सफेद गिडार के नियंत्रण के लिए लाइट ट्रैप या पौधों पर कीटनाशी छिड़काव कर नियंत्रण करें। शरदकालीन गन्ने को गिरने से बचाने के लिए बंधाई अवश्य करें। अगस्त गुरदासपुरबेधक एवं सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए जल निकास की व्यवस्था करें। मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. या क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. 1-1 .5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। गन्ने की दूसरी बंधाई अवश्य करें। अगस्त में गन्ने पर चढ़ने वाले खरपतवार यथा आइपोमिया प्रजाति (बेल) की बढ़वार होती है जिसे खेत से उखाड़कर फेंक दें अथवा मेट सल्फुरॉन मिथाइल (एमएसएम) 4 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर जब इसमें छोटे पौधों के खेत में दिखाई पड़े तो प्रयोग करना चाहिये सितबंर गन्ने की तृतीई बंधाई का कार्य पूर्ण कर लें। शरदकालीन बुआई के लिए खेत की तैयारी शुरु कर दें। पायरिला का प्रकोप अधिक होने पर क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी./लीटर या मानोक्रोटोफॉस 36 ई.सी.10-15 लीटर/ हेक्टेयर की दर से उपयोग करें। अक्टूबर शरदकालीन बुआई प्रारंभ कर दें, वैज्ञानिक बुआई विधी या ट्रेंच विधि का प्रयोग करें यथासंभव गन्ने की लाइनें पूरब से पश्चिम की ओर होनी लाइन से लाइन की दूरी 90 सें.मी. रखें। गन्ना बीज की पारायुक्त रसायन से अवश्य उपचारित करें। आय बढ़ाने के लिए शरदकालीन बुआई में सहफसली पद्धति को अवश्य अपनायें। नवम्बर फसल की अच्छी बढ़वार के लिए 12-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें अच्छी पेड़ी लेने के लिए गन्ने की कटाई सतह से करें, ताकि फुटाव अच्छा हो। चीनी मिल को गन्ना निर्धारित कलैडेंर अनुसार पर्ची प्राप्त होने पर कटाई कर आपूर्ति करें। अगेती प्रजाति की पेड़ी गन्ना चीनी मिल को साफ-सुथिरी स्थिति में आपूर्ति करें। गन्ना संबंधी किसी भी कठिनाई पर संबंधित समिति, चीनी मिल एवं जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। समिति कर्ज की कटौतीपूर्ण करने के लिए करने के लिए कर्जे की पर्ची प्राप्त कर गन्ने की आपूर्ति प्राथमिकता पर करें। कर्जे की कटौती के संबंध में संबंधित समिति से संपर्क करें। दिसबंर अंत में फसल में निराई-गुड़ाई करें। आवश्यकतानसुार सिंचाई करते रहें। पेड़ी फसल काटने के बाद यदि गेहूँ की बुआई करना चाहते हैं तो गेहूं की पछेती किस्मों का चुनाव करें। खेतों में जीवांश खाद्य गोबर, कम्पोस्ट, मैली को डालकर या फैलाकर जुताई कर दें। पाले से फसल को बचाने के लिए सिंचाई करें। स्त्रोत : खेती पत्रिका, भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर।