परिचय सरकार कृषि को आधुनिक बनाने एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को उचित अनुदान, आर्थिक सहायता के आलावा कृषि के आधुनिकरण के लिए एवं किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कृषि अनुसन्धान केन्द्रों की स्थापना की गई है।यह अनुसन्धान केंद्र किसानों की आय एवं उत्पादकता कैसे बढ़ाई जाए इस पर लगातार नए-नए शोध कार्य करके नई-नई टेक्नोलोजी को विकसित कर रहे है।इन्ही कृषि अनुसंधानों का नतीजा है की आज देश की विविध जलवायु क्षेत्रो के लिए बीजों की विभिन्न प्रजातीयां या संकर किस्में विकसित की गई है जो न केवल प्रति एकड या हैक्टर ज्यादा उत्पादन देती है बल्कि इसके साथ-साथ ही उनकीरोग प्रतिरोधकता क्षमता भी अधिक हैं। इसी क्रम में सूरजमुखीकी खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत अच्छी खबर है।अभी हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, राजेंद्र्नगर, हैदराबाद, तेलंगाना द्वारा सूरजमुखी की नई संकर किस्म तिलहनटेक-एसयुएनएच-1 के नाम से विकसित की है।इसे भारत देश के उत्तराखण्ड, जम्मु एवं कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्यों में खेती के लिए जारी और अधिसूचित किया गया है। यह संकर एआरएम-243ए (सीजीएमएस वंशक्रम/मादा) x आरजीपी-100 (रेस्टोरर वंशक्रम/नर) के बीच संकरण से विकसित कि गईं है। संकर किस्म तिलहनटेक-एसयुएनएच-१ की उत्पादकता क्षमता नई संकर तिलहनटेक-एसयुएनएच-1कि बीज उपज का परीक्षणभारत देश के छ: राज्यों के कुल 29 स्थानो पर लगातार तीन वर्षो तक किया गया। अन्य किस्मों की अपेक्षा बारानी क्षेत्रोके राष्ट्रीय स्तर पर तिलहनटेक-एसयुएनएच-1से औसतन बीज उपज 2002 किलोग्राम प्रति हेक्टेयरमिली हे जो कि राष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 (1553 किलोग्राम/हेक्टेयर) एवं केबीएसएच-44 (1812 किलोग्राम/हेक्टेयर) की तुलना मे क्रमश: 28.21% और 10.48% ज्यादा दर्ज की गईं है। जबकि कर्नाटक राज्य में तीन स्थानों (बैंगलुरु, हिरियुर एवं गुंजेवु) पर वर्ष 2020 में खरीफ मौसम के दोरान किए गए एक बीज उपज परीक्षण में नवीन संकर ने औंसत 2344 किलोग्राम/हेक्टेयर बीज उपज दर्ज की जो कि क्षेत्रीय चेको जैसे केबीएसएच-78 (1631 किलोग्राम/हेक्टेयर), केबीएसएच-53 (1866 किलोग्राम/हेक्टेयर), एवं आरएसएफएच-1887 (2208 किलोग्राम/हेक्टेयर) की तुलना मे क्रमश: 43.7%, 25.6% एवं 6.1% श्रेष्ठता दर्ज की गईं ।इसने प्राइवेट कम्पनी के चेक जीके-2002 पर 11.2% उत्कृष्टता प्रदर्शित की है। रबी 2019-20 के दोरान भारत देश के कुल नों राज्यों के तैरह स्थानों पर राष्ट्रीय बीज उपज परीक्षण किया गया जिसमें नए संकर में 2091 किलोग्राम/हेक्टेयर कि औसत बीज उपज दर्ज की गईं जो की राष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 (1983 किलोग्राम/हेक्टेयर) एवं केबीएसएच-44 (1867 किलोग्राम/हेक्टेयर) की तुलना मे क्रमश: 5.5% और 12.1% की उत्कृष्टतादर्ज की गईं। सूरजमुखी संकर तिलहनटेक-एसयुएनएच-१ में तेल अंश एवं तेल उपज की उत्पादकता क्षमता चुकि: सूरजमुखी एक खाद्य तिलहन फसल हे जो अपने उच्च गुणवता वाले खाद्य तेल के लिए जानी जाती हैं। इसका तेल मुख्यता: खाद्य तेल के रुप मे दक्षिण भारत में काफी लोकप्रिय है। आज हमारा भारत देश दुसरे देशो से खाद्य तेलो का आयात कर रहा हे उसमें सूरजमुखी का तेल भी हैं। अत: देश को खाद्य तेल में आत्मरिर्भर बनाने के लिए सूरजमुखी के उच्च तेल एवं उच्च उपज वाले संकरो या प्रजातियों को विकसित करना अति आवश्यक हैं। इसी बात को ध्यान मे रखते हुए नए संकर को तीन वर्षो तक बीज उपज के साथ-साथ तेल अंश और प्रति हेक्टेयर तेल की उपज (किलोग्राम/हेक्टेयर) की जांच के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 28 स्थानो पर परीक्षण किया गया। नवीन संकर ने राष्ट्रीय परिक्षण में औसत तेल का अंश 37.5% पाया गया है जबकि राष्ट्रीय चेक केबीएसएच-44 और डीआरएसएच-1 में औसत तेल का अंश क्रमश: 32.5% एवं 37.8% दर्ज किया गया। नए संकर में तेल का अंश सबसे ज्यादा तेल अंश वाले संकर डीआरएसएच-1 के लगभग बराबर था। अगर हम प्रति हैक्टर तेल उपज की बात करें तो यह तिलहनटेक-एसयुएनएच-1में खरीफ मौसम के दोरान 746 किलोग्राम/हेक्टेयर थी जो हमारे राष्ट्रीय चेक केबीएसएच-44 और डीआरएसएच-1 की तुलना में 27.09% और 27.30% श्रेष्ठता दर्ज की गई है। जबकि रबी मौसम के दोरान तैरह स्थानो पर किए गए परीक्षण मे नए संकर मे 759 किलोग्राम/हेक्टेयर तेल उपज दर्ज कि गईं जो की राष्ट्रीय चेक केबीएसएच-44 (592 किलोग्राम/हेक्टेयर) से 28.2% उत्कृष्ट थी। सूरजमुखी संकर तिलहनटेक-एसयुएनएच-१ की रोग प्रतिरोधक क्षमता भारत वर्ष मे सूरजमुखी के मुख्य रोगों मे पत्ती धब्बा रोग, वायरस जनित नेक्रोसीस, पाऊड्री मिल्ड्यु एवं डाऊनी मिल्ड्युमुख्य है जो फसल को काफी नुकसान पहुचाते है और उपज की हानि करते हैं। पत्ती धब्बा रोग,नेक्रोसीस एवं पाऊड्री मिल्ड्यु मुख्यता: खरीफ के मौसम मे लगने वाले रोग है। लेकिन डाऊनी मिल्ड्यु एक ऐसा रोग हे जो दोनो मौसम में फसल उपज को काफी नुकसान पहुंचाता हैं।यह बीज के साथ-साथ मृदा जनित रोंग हे इसलिए इसकी रोकथाम बहुत जरुरी हैं। वैसे तो इसकी रसायनों के द्वारा बुवाईं से पुर्व बीज उपचार से काफी हद तक रोकथाम कि जा सकती है। लेकिन रसायनों के ज्यादा उपयोग़ से मृदा दुषित हो रही हे। इसलिए बेहतर यहि होगा कि रोग प्रतिरोधी प्रजातियों और संकरो का विकास किया जाए।इसी को मध्य नजर रखते हुए नए डाऊनी मिल्ड्यु प्रतिरोधी संकरतिलहनटेक-एसयुएनएच-1का विकास किया।तीन वर्षो के डाऊनी मिल्ड्युसिक प्लॉट में परीक्षण के बाद यह पत्ता चला कि नया संकर डाऊनी मिल्ड्यु रोग के लिए प्रतिरोधी हैं।जबकि राष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 मेंडाऊनी मिल्ड्यु 83.3% और केबीएसएच-44 मे 56.7% तक रोग की व्यापकता दर्ज की गईं। रबी 2019-20 के परीक्षण में भी तिलहनटेक-एसयुएनएच-1 डाऊनी मिल्ड्यु प्रतिरोधी मिला। जबकि चेक डीआरएसएच-1 एवं केबीएसएच-44 में रोग की व्यापकता क्रमश: 90% एवं 50% दर्ज की गईं थी। नया संकर डाऊनी मिल्ड्यु प्रतिरोधी होने के कारण इस रोग के लिए किसानों को किसी भी रसायन से बीज उपचार करने की जरुरत नहीं हैं। यह संकर न केवल रसायनों से मृदा को दुषित होने से बचायेगा बल्कि रसायनों के पैसे भी बचाने मे मदद करेगा। इसमें पत्ती धब्बा रोग की व्यापकता भी राष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 एवं केबीएसएच-44 से कम थी। सूरजमुखी संकर तिलहनटेक-एसयुएनएच-१ की कीट प्रतिरोधक क्षमता सूरजमुखी की फसल में बहुत सारेकीट लगते हे उनमें से लिफहोपर, एफिड्स, जैसिड्स, सफेद मक्खी, हरे रंग की सुंडी व हेड बोरर का प्रकोप अधिक होता है। इनमें से लिफहोपर ज्यादा नुकसान पहुचांता हैं। वैज्ञानिक परिक्षणों से पता चला हे कि अगर समय पर इसकी रोकथाम न की जाए तो यह सूरजमुखी की फसल में 45 प्रतिशत तक कि हानि कर सकता हैं। वेसे तो इसका नियंत्रण रसायनो के छिड्काव से किया जा सकता है लेकिन कीट प्रतिरोधी प्रजाति या संकर इसका अच्छा विकल्प हो सकता हैं। दो वर्षो के बहुस्थानिए परीक्षणों से पत्ता चला कि नया संकर लिफहोपर के लिए मध्यम प्रतिरोधी हैं। इसमेंलीफहॉपर इंजरी ग्रेड1.2 थी। जबकिराष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 एवं केबीएसएच-44 में लीफहॉपर इंजरी ग्रेड क्रमश: 1.9 एवं 2.4 थी।दोनो राष्ट्रीय चेक डीआरएसएच-1 एवं केबीएसएच-44लीफहॉपर अतिसंवेदनशीलथे।नया संकर स्टेम बोरर के लिए भी अन्य संकरो से बेहतर था। जबकी सफेद मक्खी, थ्रिप्स शीर्ष छेदक में अन्य संकरो जैसा ही था। अन्य मुख्य विशेषताएं नए संकर तिलहनटेक-एसयुएनएच-1 के बीजपत्र पर एंथोसायनिन रंग मध्यम से सशक्त होता हैं। इसके पौधों की ऊंचाईं लगभग 180 से 200 सेंटीमीटर हैं जो कि लम्बा केटेगरी में आती है। अगर पत्तियों के आकार की बात करे तो यह मध्यम आकार के साथ-साथ मध्यम हरे रंग की होती हैं। पत्ती की आकृति हृदयाकार होती हैं। अगर पत्ती दातुएं की बात करे तो यह मध्यम होती हैं। पत्ती डंठल पर एंथोसायनिन रंग बहुत ही हल्के रंग का होता हैं जो इसको डीआरएसएच-1 से अलग पहचानने मे मदद करता हैं। पौधें का तना मध्यम आकार का होता हे जो पौधों के बडे आकार और प्रति शीर्ष बीज ज्यादा होने के बावजुद सीधा खड़ा रखने मे मदद करता है। इस संकर में पौधें का शीर्ष पकने के बाद नीचे की तरफ झुका हुआ होता हैं। इस संकर के शीर्ष का औसतन व्यास 15 से 20 सेंटीमीटर के लगभग होता हैं। तने का रंग मध्यम हरा है। इसको 50% पुष्पन तक पहुचने में औसत 60 से 70 दिन लगते हे और यह 90 से 100 दिन मे पककर तैयार हो जाता हैं। यह मध्यम अवधि का संकर हैं। बीज की आकृति अंडाकार लम्बी होती है। इस संकर के 100 बीजो का भार लगभग 4 से 6 ग्राम के आसपास होता है जो मध्यम केटेगरी मे आता है।बीज कवच के आधार का रंग काला होता हैं और बीज कवच पर बहुत ही हल्के भूरे रंग की धारियां होती हैं। बीज मे छिलके का अंश औसतन मध्यम जो कि 25 से 30% के बीच होता हैं।इस संकर की सबसे खास बात यह हे कि इसके पुरे शीर्ष में बीज का भराव एक समान होता हे और साथ ही शीर्ष के मध्यम भाग मे भी बीज भराव अच्छा होने के कारण प्रति एकड/हेक्टेयर ज्यादा बीज उपज देता हैं। अनुशंषित क्षेत्र भारत सरकार के राजपत्र दिनांक 24 दिसम्बर, 2021 के आधारपर तिलहनटेक-एसयुएनएच-1कोउत्तराखंड, जम्मूऔर कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना राज्यों के बारानी क्षेत्रो के लिएअनुसंशित एवं जारी किया गया हैं। बीज उपलब्धता की जानकारी के लिए: बीज की उपलब्धता एवं अधिक जानकारी के लिए निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, राजेंद्र्नगर, हैदराबाद पर सम्पर्क कर सकते हैं। सोर्स: एच.पी. मीना, एम. सुजाता एवं प्रद्युमन यादव भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, राजेंद्रनगर, हैदराबाद-500 030 *****