<h3 style="text-align: justify;">पुष्पावस्था</h3> <p style="text-align: justify;">मूंगफली की फसल में बुआई के 35-40 दिन पुष्पावस्था से पेगिंग के होते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">सिंचाई की व्यवस्था </h3> <p style="text-align: justify;">इस समय पर पानी की कमी होने पर मूंगपफली की उत्पादकता काफी कम हो जाती है। इसलिए इस समय यदि वर्षा नहीं होती है, तो सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">मिट्टी चढ़ाने का कार्य </h3> <p style="text-align: justify;">इस समय यदि पेगिंग हो गई है, तो पौधों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाने का कार्य करने से फलियों का विकास अच्छा होता है और पैदावार में बढ़ोतरी होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सूक्ष्म पोषक तत्व</h3> <p style="text-align: justify;">इस समय सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन की कमी दिखने पर 0.2 प्रतिशत बोरेक्स के घोल का प्रयोग करें। इसी प्रकार जिंक की कमी होने पर 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट और 0.25 प्रतिशत चूने का प्रयोग करना चाहिए। मूंगफली फसल बोने के 40 दिनों बाद इंडोल एसिटिक एसिड 0.7 ग्राम को एल्कोहल (7 मि.ली.) में घोलें तथा 100 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करें। फिर एक सप्ताह बाद 6 मि.ली. इथराल (40 प्रतिशत) 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से मूंगफली की पैदावार 17-27 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">कॉलर रॉट रोग</h3> <p style="text-align: justify;">कॉलर रॉट रोग से मूंगफली की रोकथाम के लिए फफूंदीनाशक कार्बेन्डाजिम या मैंकोजेब का प्रयोग करना चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">टिक्का रोग </h3> <p style="text-align: justify;">मूंगफली के टिक्का रोग की रोकथाम के लिए खड़ी फसल पर जिंक मैग्नीज कार्बामेट 2.0 कि.ग्रा. या जिनेब 75 प्रतिशत की 2.5 कि.ग्रा. दवा प्रति हैक्टर की मात्रा से 1000 लीटर पानी में घोलकर 10 दिनों के अंतराल पर 2-3 छिड़काव करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और ऋषि राज सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली।</p>