<h3 style="text-align: justify;">कददूवर्गीय सब्जियां</h3> <p style="text-align: justify;">कददूवर्गीय सब्जियों में प्रति हैक्टर 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 54 कि.ग्रा. यूरिया को दो भागों में बांटकर बुआई के 30 एवं 45 दिनों बाद टॉप ड्रैसिंग करें। कददूवर्गीय सब्जियों में मचान बनाकर उस पर बेल चढ़ाने से पैदावार में वृद्धि होगी और फल स्वस्थ होंगे। सभी सब्जियों में उचित जल निकास की व्यवस्था करें। पूसा संकर-3 लौकी की बुआई अगस्त तक की जा सकती है। इस किस्म में लौकी की तुड़ाई 50-55 दिनों में शुरू हो जाती है।</p> <h3 style="text-align: justify;"> फलछेदक कीटों का हमला </h3> <p style="text-align: justify;">खीरा तथा अन्य सब्जियों में फलछेदक कीटों का हमला होने का खतरा बना रहता है। किसान भाइयों को दवाइयों का छिड़काव समय-समय पर करते रहना चाहिए। दवाई छिड़कने के एक सप्ताह बाद ही फल तोड़ें तथा पानी से सब्जी अच्छी तरह धोयें। इस पफसल में 1-2 बोरा यूरिया छिड़कें, इससे पफल अच्छे लगेंगे।</p> <h3 style="text-align: justify;">बैंगन </h3> <p style="text-align: justify;">बैंगन में रोपाई के 30 दिनों बाद 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, मिर्च में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन तथा फूलगोभी में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की टॉप ड्रैसिंग प्रति हैक्टर की दर से करें। इस समय बैंगन में कोक्सीनेल्ला बीटल का प्रकोप होता है। इसकी रोकथाम के लिए क्विनॉलफॉस 2.0 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसके साथ ही शूट और फ्रूट बोरर के लिए कार्बोरिल 2.0 ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करना चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">भिंडी</h3> <p style="text-align: justify;">भिंडी की फसल में बुआई के 50 दिनों बाद 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 87 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हैक्टर की दर से दूसरी टॉप ड्रैसिंग करें एवं भिंडी की कटाई सही समय पर करें। सामान्यतः फूल आने के 8-10 दिनों के भीतर भिंडी की फली की तुड़ाई अवश्य करें। फलीछेदक कीटों के प्रकोप से बचने के लिए मैलाथियान (50 ई.सी.) 500-600 मि.ली. मात्रा का छिड़काव करते हैं। विशेष ध्यान रखें कि कीटनाशी का प्रयोग करने के 7-8 दिनों तक फली की तुड़ाई न करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">परवल </h3> <p style="text-align: justify;">परवल लगाने के लिए 15 अगस्त के आसपास का समय सर्वोत्तम रहता है। परवल की रोपाई 2×2 मीटर की दूरी पर 50 सें.मी. व्यास के 30 सें.मी. गहरे गड्ढे खोदकर करनी चाहिए। इसमें आधा भाग मिट्टी एक चैथाई सड़ी गोबर की खाद व एक चाैथाई बालू, 100 ग्राम नीम की खली, 5 ग्राम फ्यूराडॉन मिलाकर जमीन से 15 सें.मी. ऊंचाई तक भर देना चाहिए। मचान बनाकर परवल लगाने की दूरी 1.5×1.5 मीटर रखते हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="166" height="145" /></p> <h3 style="text-align: justify;">बंदगोभी</h3> <p style="text-align: justify;">बंदगोभी की पूसा अगेती, गोल्डन एकड़ किस्मों की बुआई की जा सकती है। अच्छी प्रकार से तैयार खेत में 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 120-60-60 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। बंदगोभी की नर्सरी में डम्पिंग ऑफ से बचाव के लिए ब्लैटोक्स का 205 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले बेसालीन 2.5 लीटर या स्टॉम्प 3.3 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव कर हल्की सिंचाई करें।</p> <p style="text-align: justify;">अगेती फसल में सिंचाई रोपाई के तुरन्त बाद तथा उसके पश्चात साप्ताहिक अंतराल पर व मध्यम व पछेती फसल में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">गाजर </h3> <p style="text-align: justify;">गाजर की पूसा मेघाली, पूसा यमदाग्नि व पूसा वृष्टि एवं मूली की पूसा चेतकी व पूसा देसी किस्मों की बुआई अगस्त तक की जा सकती है। ये 40-50 दिनों में तैयार हो जाती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">मिर्च</h3> <p style="text-align: justify;">मिर्च की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई, सिंचाई व जल निकास की उचित व्यवस्था करें। पौधों की अच्छी वृद्धि नहीं है, तो 50 कि.ग्रा. यूरिया खड़ी फसल में डालें तथा कीटों तथा रोगों से बचने के लिए 0.2 प्रतिशत इंडोफिल-45 व 0.1 प्रतिशत मेटासिस्टॉक्स नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">अदरक</h3> <p style="text-align: justify;">अदरक की फसल में 25 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 54 कि.ग्रा. यूरिया की दूसरी टॉप ड्रैसिंग बुआई के 60-70 दिनों बाद करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">हल्दी</h3> <p style="text-align: justify;">हल्दी की फसल में प्रति हैक्टर 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन या 87 कि.ग्रा. यूरिया की दूसरी टॉप ड्रैसिंग बुआई के 60-70 दिनों बाद करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">स्केल कीट का नियंत्रण</h4> <p style="text-align: justify;">हल्दी की फसल में स्केल कीट के नियंत्रण के लिए नीम के बीज का घोल (5 प्रतिशत) या नीम निर्मित कीटनाशी (निम्बेसिडीन, अचूक, निमेरिन) का छिड़काव (2.0 मि.ली./लीटर पानी) करने से पत्रा लपेटक, भृंग तथा स्केल कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">बेबीकॉर्न</h3> <p style="text-align: justify;">बेबीकॉर्न की अगस्त में बुआई करने से अच्छी गुणवत्ता वाला बेबीकॉर्न प्राप्त होता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">टमाटर</h3> <p style="text-align: justify;">खरीफ मौसम में टमाटर की पूसा सदाबहार, पूसा रोहिणी, पूसा-120, पूसा गौरव, पी.एच.-2 और पी.एच.-8 किस्मों की रोपाई कर सकते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">हरे प्याज </h3> <p style="text-align: justify;">हरे प्याज की रोपाई से पूर्व 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद या 8 टन नाडेप कम्पोस्ट खेत में मिला दें। अन्तिम जुताई के बाद 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 40 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से खेत में अच्छी तरह मिला दें।</p> <p style="text-align: justify;">शिमला मिर्च, टमाटर एवं गोभी की मध्यवर्गीय प्रजातियों की पौधशाला में बिजाई पूरे साप्ताहिक अंतराल पर कर सकते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">ग्वार</h3> <p style="text-align: justify;">ग्वार की तैयार फलियों की तुड़ाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करें। कीटों से बचाव के लिए 0.2 प्रतिशत मेटासिस्टाक्स नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">मूली </h3> <p style="text-align: justify;">मूली की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई की व्यवस्था करें। कीटों से बचाव के लिए 0.15 प्रतिशत मेटासिस्टाक नामक दवा का घोल बनाकर एक छिड़काव अवश्य करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">पालक</h3> <p style="text-align: justify;">पालक की पूर्व में बोई गई फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई करें। तैयार पत्तियों की कटाई करें व गड्डियां बनाकर बाजार भेजें।</p> <h3 style="text-align: justify;">बेर</h3> <p style="text-align: justify;">बेर में मिलीबग कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस (36 ई.सी.) 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और ऋषि राज सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली।</p>