बुआई गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल में भी गन्ना लगा सकते है, इसके लिए उपयुक्त किस्म सी.ओ.एच.-35 है। गन्ने में आवश्यकतानुसार फसल की मांग के अनुरूप सिंचाई एवं गुड़ाई करते रहें। जिन खेतों से गन्ने का बीज लेना है, उन खेतों में बीज लेने से 5-7 दिनों पूर्व सिंचाई करें। सिंचाई एवं गुड़ाई गन्ने में आवश्यकतानुसार फसल की मांग के अनुरूप सिंचाई एवं गुड़ाई करते रहें। वसंतकालीन गन्ना वसंतकालीन गन्ना, जो कि फरवरी में लगा है, में 1/3 नाइट्रोजन की दूसरी किस्त 1 बोरा यूरिया अप्रैल में डाल दें एवं खेत में खाली स्थानों को नर्सरी में उगाएं गए पौधों से भर दें। ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुआई ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुआई उत्तर प्रदेश,पंजाब, हरियाणा एवं उत्तराखंड में अप्रैल व मई में की जाती है। गन्ने की बुआई से पूर्व खेतों को अच्छी तरह से समतल कर लें, क्योंकि गन्ने की फसल खेत में 2-3 वर्षों तक रहती है। शीघ्र एवं कण अवधि में पकने वाली फसलों जैसे-मूंग, उड़द एवं लोबिया को, गन्ने की दो पंक्तियों के बीच में बो सकते हैं। इससे प्रति इकाई क्षेत्रों अतिरिक्त लाभ के अलावा मृदा की उर्वरा शक्ति भी बढ़ा सकते हैं। बीज एवं खेत की जुताई इस मौसम की गन्ने की फसल के लिए खेत की जुताई करके भलीभांति तैयार कर लें। बुआई के लिए लगभग 35,000-40,000 गन्ने की तीन आंख वाले टुकड़े की आवश्यकता होती है। इसके लिए 5-6 टन गन्ने का बीज पर्याप्त होता है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 75-90 सें.मी. के अन्तराल पर 10-15 सें.मी. गहरा कुंड, डेल्टा हल से बनाकर बोया जाता है। कटर प्लांटर द्वारा बुआई गन्ना कटर प्लांटर द्वारा केवल 5 श्रमिकों की मदद से एक हैक्टर की बुआई कर सकते हैं, जो कि सामान्यतः 30-40 श्रमिकों द्वारा की जाती है। इसके साथ ही इस गन्ना प्लांटर द्वारा एक दिन में 2 हैक्टर की बुआई कर सकते हैं। बुआई से पूर्व गन्ने के सेट को कवकनाशी जैसे कार्बेंडाजिम 0.2 प्रतिशत से 15 मिनट तक उपचारित करने से स्मट रोग को रोका जा सकता है। दो आंखों वाली या तीन आंखों वाली पोरियों को 6 प्रतिशत पारायुक्त ऐमीसान या 0.25 प्रतिशत मेन्कोजैब के 100 लीटर पानी के घोल में 4-5 मिनट तक डुबोकर लगाएं। उवर्रक प्रबंधन गन्ने में 150-180 कि.ग्रा./हैक्टर नाइट्रोजेन, 80 कि.ग्रा./हैक्टर फासफोरस, 60 कि.ग्रा./हैक्टर पोटाश प्रयोग करना लाभप्रद होता है, किन्तु उवर्रक प्रबंधन मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना चाहिए। स्त्रोत : खेती पत्रिका(भाकृअनुप) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोष नगर, हैदराबाद।