<h3 style="text-align: justify;">मृदा की जांच</h3> <p style="text-align: justify;">रबी फसल की कटाई के बाद किसान इस महीने खेत खाली होने पर मृदा की जांच जरूर करवाएं।</p> <h3 style="text-align: justify;">मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों की पूर्ति</h3> <p style="text-align: justify;">तीनवर्षों में एक बार अपने खेतों की मृदा परीक्षण जरूर करवाएं, ताकि मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फाॅस्फाेरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज व अन्य) की मात्रा और फसलों में कौन सी खाद कब व कितनी मात्रा में डालनी है, का पता चले।</p> <h3 style="text-align: justify;">मृदा में खराबी की जानकारी </h3> <p style="text-align: justify;">मृदा जांच से मृदा में खराबी का भी पता चलता है, ताकि उन्हें सुधारा जा सके। जैसे कि क्षारीयता को जिप्सम से, लवणीयता को जल निकास से तथा अम्लीयता को चूने से सुधारा जा सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">मृदा स्वास्थ्य कार्ड</h3> <p style="text-align: justify;">प्रयोगशाला के प्रभारी से नमूनों की जांच के उपरांत मृदा स्वास्थ्य कार्ड अवश्य प्राप्त करें। ताकि आगामी खरीफ की फसल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग किया जा सके। </p> <h3 style="text-align: justify;">किसान इस महीने करें हरी खाद की बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">मृदा की सेहत ठीक रखने के लिए देसी गोबर की खाद या कम्पोस्ट बहुत लाभदायक है। पिछले कुछ वर्षों में गोबर की खाद का प्रयोग कम हुआ है। अप्रैल में गेहूं की कटाई और जून में धान, मक्का की बुआई के बीच 50-60 दिनों खेत खाली रहते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">हरी खाद बनाने लिए बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">इस समय कुछ कमजोर खेतों में हरी खाद बनाने के लिए ढैंचा, लोबिया या मूंग लगा दें आरै जून में धान रोपने से एक-दो दिनों पहले या मक्का बोने से 10-15 दिनों पहले मृदा में जुताई करके मिला दें, इससे मृदा की सेहत सुधरती है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(भाकृअनुप) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोष नगर, हैदराबाद।</p>