पोपलर किस्में पोपलर की किस्में जैसे एल-51, एल-74, एल-188, एल-247, जी-3 व जी-48 कृषि वानिकी प्रणाली के लिए उपयुक्त हैं। पोपलर के नये पौधे कटिंग विधि से सफलतापूर्वक तैयार किये जा सकते हैं। इन पौधों को फरवरी के प्रथम पक्ष तक लगाने का समय है। मृदा पोपलर का पेड़ गहरी उपजाऊ अच्छे जल निकाल वाली मृदा में अच्छा होता है। नर्सरी तैयार करना इसे फरवरी में कलमों द्वारा 2×2 फीट दूरी पर नर्सरी में लगाया जा सकता है तथा अगले वर्ष पौधों को जनवरी-फरवरी में खेत में लगा सकते हैं। नर्सरी में कलमें लगाने से पहले कैप्टॉन या डायथैन (0.3 प्रतिशत) घोल में डुबोएं, ताकि रोगों से बचाव हो। पौधों को 3 फीट गहरे गड्ढे खोदकर ऊपर की आधी मृदा में गोबर की सड़ी खाद मिलाकर भरें तथा पूरा पानी लगाएं। पौधों को मेड़ों पर पंक्तियों में 10 फीट दूरी पर तथा सिंचाई नाली के दोनों ओर पंक्तियों में 7 फीट दूरी पर लगाएं। यदि खेत में अकेले पोपलर लगाना हो तो 16×16 फीट की दूरी रखें, इससे 270 पौधे लग जाएंगे। पौधे लगाने से पहले एक एकड़ में एक लीटर क्लोरोपायरीफॉस पानी के साथ दें। इससे दीमक पर नियंत्रण रहेगा। हर माह सिंचाई करते रहें। मेंथा फरवरी में बोयी जाने वाली मेंथा एक प्रमुख नगदी फसल है। उन्नत किस्में मेंथा की उन्नत किस्में कोशी, गोमती, हाइब्रिड-77 व एम.एस.एस.-1 आदि हैं। मृदा मेंथा फसल के लिए मध्यम से लेकर हल्की भारी मृदा उपयुक्त रहती है। जल निकास का उचित प्रबंध आवश्यक है। बुआई मेंथा की बुआई फरवरी में कर सकते हैं। बुआई के लिए 400-500 कि.ग्रा. जड़ें प्रति हैक्टर पर्याप्त होती हैं। जड़ों के 5-7 सें.मी. लंबे टुकड़े, जिसमें 3-4 गांठें हों, को काटकर 5-6 इंच की गहराई पर 45-60 सें.मी. की दूरी पर बनी पंक्तियों में बुआई करें। उर्वरक का उपयाेग अच्छी फसल लेने के लिए बुआई के समय 30 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 75 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 40 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। सिंचाई बुआई के तुरन्त बाद एक हल्की सिंचाई अति आवश्यक है। अन्य सिंचाइयां आवश्यकतानुसार 10-15 दिनों के अन्तराल पर करते रहें। मुलेठी मुलेठी एक बहुवर्षीय औषधि फसल है। यह खांसी दूर करने की दवाई बनाने के काम आती है। लगाने का समय इस फसल को फरवरी-मार्च में लगाया जा सकता है। हरियाणा मुलेठी नं. 1 पकने में 2.7 से 3 वर्ष का समय लेती है तथा 30 क्विंटल सूखी जड़ों की पैदावार देती है। बीजाई/रोपाई बीजाई/रोपाई के लिए 170 कि.ग्रा., 6 इंच लंबी 3-4 आंखों वाली स्वस्थ्य जड़ों को 3 पफीट दूरी पर 3/4 जड़ के हिस्से को जमीन में दबा दें। पौधों में आपसी दूरी 1.7 फीट रखें। खेत की तैयारी खेत की तैयारी के समय 17-20 गाड़ी गोबर की सड़ी-गली खाद के साथ एक बोरा सिंगल सुपर फॉस्फेट, आधा बोरा यूरिया डालें। बाकी आधा बोरा यूरिया फुटाव के एक माह बाद डालें। अच्छी फसल अच्छी फसल के लिए वर्ष में 6-7 सिंचाइयां करें। प्रति वर्ष जनवरी में जमीन से ऊपरी भाग को काट दें, ताकि फुटाव अच्छा हो। फसल को प्रतिवर्ष मार्च में 3/4 बोरा यूरिया सिंचाई के साथ दें। फसल लगने के 2.7-3 वर्ष बाद 1.7-2 फीट गहरी खुदाई करके जड़ें निकाल दें। स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012