बुआई गर्मी के मौसम में लोबिया की बुआई फरवरी-मार्च में की जाती है। उन्नत किस्में लोबिया की उन्नत किस्में काशी गौरी, काशी कंचन, पूसा कोमल (बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी), पूसा सुकोमल (मोजैक वाइरस प्रतिरोधी), अर्का गरिमा, लोबिया 263, पूसा फागुनी तथा पूसा दो फसली आदि में से उपयुक्त प्रजाति का चुनाव करें। बीज की मात्रा साधारणतः 20-25 कि.ग्रा. बीज/ हैक्टर की दर से पर्याप्त होता है। बीज की मात्रा प्रजाति तथा मौसम पर निर्भर करती है। बेलदार किस्मों के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 80-90 सें.मी. तथा झाड़ीदार किस्मों के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-60 सें.मी. तथा बीज से बीज की दूरी 10-15 सें.मी. रखी जाती है। बुआई से पहले बीज का राइजोबियम कल्चर से उपचार कर लेना चाहिए। बुआई के समय मृदा में बीज के जमाव के लिए पर्याप्त नमी का होना बहुत आवश्यक है। उर्वरक लोबिया की अच्छी फसल लेने के लिए 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फाॅस्फाेरस तथा 50 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हैक्टर खेत में अंतिम जुताई के समय मृदा में मिला देना चाहिए तथा 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की मात्रा फसल में फूल आने पर प्रयोग करें। फलियों की तुड़ाई लोबिया की नर्म व कच्ची फलियों की तुड़ाई 4-5 दिनों के अंतराल पर करें। बेलदार किस्मों में 8-10 तुड़ाई तथा झाड़ीदार किस्मों में 3-4 तुड़ाई की जा सकती है। स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012