<h3>सरसों की फसल</h3> <p style="text-align: justify;">जब 75 प्रतिशत फलियां सुनहरे रंग की हो जायें तो सरसों की फसल की कटाई एवं मड़ाई करके दाने अलग कर लेना चाहिए। देर से कटाई करने पर दानों के झड़ने की आशंका रहती है। कटाई की हुई सरसों को खलिहान में अधिक समय तक नहीं रखें, अन्यथा पेन्टेड बग कीट दानों का तेल चूस लेगा, जिससे हानि होने की आशंका रहेगी। यदि किन्हीं कारणों से खलिहान में काटी गई फसल को रखना जरूरी हो तो खलिहान की भूमि पर मिथाइल पेराथियान 2 प्रतिशत पाउडर का छिड़काव पहले ही कर दें। दानों को अच्छी प्रकार से सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">अलसी की फसल</h3> <p style="text-align: justify;">अलसी की फसल की कटाई उस समय पर करें, जब पौधे सुनहरे पीले रंग के होने लगते हैं और कैप्सूल भूरे रंग के साथ सूखने और खुलने लगते हैं। रसे के लिए अलसी की कटाई उसी समय पर शुरू करें, जब पौधे हरे रंग के होते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">सूरजमुखी की खेती</h3> <p style="text-align: justify;"><a href="../../../../../../../agriculture/crop-production/91593e93094d92f92a94d93092393e93293f92f94b902-91593e-938902915941932/92493f932939928/93894293091c92e941916940-915940-916947924940">सूरजमुखी की खेती </a>किसी भी प्रकार की मृदा में जा सकती है। इसकी खेती उस मृदा में भी की जा सकती है, जिसमें धान की खेती नहीं की जा सकती है। उतार-चढ़ाव वाली, कम जल धारण क्षमता वाली भूमि में फसलें अधिकतर उगाई जा रही हैं। हल्की मृदा में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">संकर किस्में</h3> <p style="text-align: justify;">सूरजमुखी की संकर किस्में जैसे-एच. एस.एफ.एच.-848, एम.एस.एफ.एच-17, मारुति, के.वी.एस.एच.-41 के.वी.एस.एच.-42, के.वी.एस.एच-44 व वी.एस.एच.-53 के.वीएस.एच.-44, डी.आर.एस.एच.-1, पी.एस.एफ.एच.-118, पी.एस..एफएच.-569, सूरजमुखी, एस.एच.-332, के.वी.एस.एच.-1 तथा सूरजमुखी की संकुल किस्में जैसे-डी.आर.एस.एफ-108, को.-5, टी.ए.एस.एफ.-82, एल.एस.एफ.-8, पफुले रविराज, सूर्य एवं माडर्न उपयुक्त हैं। </p> <h3 style="text-align: justify;"> बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">सूरजमुखी की बुआई 15 मार्च तक पूरी कर लें। संकर प्रजाति का बीज 5-6 कि.ग्रा./ हैक्टर तथा संकुल प्रजाति का स्वस्थ बीज 12-15 कि.ग्रा./हैक्टर पर्याप्त होता है। बोने से पहले बीज का कार्बेन्डाजिम की 2 ग्राम मात्रा अथवा थीरम की 2.5 ग्राम मात्रा से उपचार अवश्य करें।</p> <table style="border-collapse: collapse; width: 100%;" border="1"> <tbody> <tr> <td style="width: 98.6043%;"> <p style="text-align: justify;">सूरजमुखी</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccdownld.jpg" width="184" height="161" /></p> <p style="text-align: justify;">सूरजमुखी के फूल, सूरज की दिशा में मुड़ जाने के कारण इसे सूरजमुखी कहा जाता है। सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। बेहतर मुनाफा देने वाली इस फसल को नगदी खेती के रूप में भी जाना जाता है। सूरजमुखी देखने में जितना खूबसूरत होता है, स्वास्थ्य के लिए उससे कहीं ज्यादा फायेदमंद भी होता है। इसके फूलों व बीजों में कई औषधीय गुण छिपे होते हैं। दिल को स्वस्थ रखने से लेकर यह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव करता है। इसके अलावा सूरजमुखी के तेल का सेवन करने से लीवर सही तरीके से काम करता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों के रोग भी नहीं होते हैं। यह त्वचा को निखारने के साथ बालों को भी मजबूत बनाता है। इसका तेल हल्के रंग, अच्छे स्वाद और उच्च मात्रा में लिनोलिक एसिड से युक्त होता है, जो कि दिल के मरीजों के लिए अच्छा होता है। सूरजमुखी के बीज में खाने योग्य तेल की मात्रा 48 से 53 प्रतिशत तक होती है।</p> </td> </tr> </tbody> </table> <h3 style="text-align: justify;">उर्वरकाें का प्रयाेग </h3> <p style="text-align: justify;">सामान्यतः सूरजमुखी की फसल में उर्वरकाें का प्रयाेग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। मृदा परीक्षण न होने की दशा में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फाॅस्फाेरस, 40 कि.ग्रा. पाेटाश एवं200 कि.ग्रा. जिप्सम प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय कूंड़ों में प्रयोग करें। सूरजमुखी की बुआई के 15-20 दिनों बाद खेत से फालतू पौधों को निकालकर पौधे से पौधे की दूरी 20 सें.मी. कर लें और उसके पश्चात सिंचाई करें।</p> <p style="text-align: left;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर, सस्य विज्ञान संभाग,भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>