<h3 style="text-align: justify; "><span>जैट्रोफा</span></h3> <p style="text-align: justify; ">कटाई-छंटाई: पौधों को गोल छाते का आकार देने के लिए दो वर्ष तक कटाई-छंटाई आवश्यक है| प्रथम कटाई में रोपण के 7-8 महिने पश्चात पौधों को भूमि से 30-45 से.मी. छोड़कर शेष ऊपरी हिस्सा काट देना चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>संकर धान</span></h3> <p style="text-align: justify; ">(1) बोआई हेतु प्रतिवर्ष संकर धान का नया बीज विश्वसनीय एवं अधिकृत बीज वितरक से प्राप्त करना चाहिए | झारखण्ड राज्य के लिए संकर धान की बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रो एग्रो 6444 किस्म का अनुमोदन किया गया है |</p> <p style="text-align: justify; ">(2) खेत की अंतिम तैयारी से पूर्व 100 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद तथा नेत्रजन, स्फुरद, व पोटाश, 500:500:500 ग्राम प्रति 100 वर्ग मीटर की दर से डालें |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>अरहर</span></h3> <p style="text-align: justify; ">अरहर की बुआई के लिए बिरसा अरहर 1, बहार, आय सी पो एच 2671 इन किस्मों की अनुशंषा की जाती है |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>सरगुजा</span></h3> <p style="text-align: justify; ">देशी हल के द्वारा खेतों को दो बार गहरी जुताई कर पाता लगा देने से खेत सरगुजा की बुआई के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाता है | अंतिम जुताई के समय लिंडेन धूल 25 कि. ग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से जमीन में मिला देने से दीमक का प्रकोप कम होता है |</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>हल्दी</span></h3> <p style="text-align: justify; ">उन्नत किस्में: झारखंड के लिए राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किस्म राजेन्द्र सोनिया अनुसंशित है | यह करीब 210 दिन में तैयार हो जाता है | इसमें कुरकुमीन 8 से 8.5% है |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>धान</span></h3> <p style="text-align: justify; ">(1) धान की बुआई के लिए अंनुशषित किस्म: टांड जमीन (सीधी बुवाई): बिरसा गोडा 102, बिरसा<img class="image-right" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/91593f93893e92894b902-915947-93293f90f-92e94c93892e-90692793e93093f924-91594393793f-93893293e939/91593f93893e928-91594393793f-92a90291a93e902917/May.jpg" /> धान 108, बिरसा विकास धान 109, बिरसा विकास धान 110 तथा वन्दना; मध्यम जमीन (रोपाई): बौनी किस्में (आई आर 36, आई आर 64, ललाट; सुगंधित धान (रोपाई) आर 10 तथा बिरसामती; नीची जमीन (रोपाई): स्वर्णा (एम टी यू 7029, तथा सम्भा महसुरी (बी पी टी 5204); संकर धान (रोपाई) प्रो अग्रो 6444; मध्यम व नीची जमीन बिरसा धान 202 तथा राजश्री |</p> <p style="text-align: justify; ">(2) बुआई के पहले एवं अंतिम जुताई के समय 20 किलो स्फुरद (120 किलो किंगल सुपर फास्फेट) तथा 20 किलो पोटाश (50 किलो म्यूरेट ऑफ़ पोटाश) खाद का प्रयोग करें | सीधी बुआई में नत्रजन खाद का व्यवहार बुआई के समय न करें |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>आम</span></h3> <p style="text-align: justify; ">आम के पौधों को 10 X 10 मी. की दूरी (आम्रपाली/ मल्लिका को 5 मी. X 5 मी.) पर लगाना चाहिए | पौधा लगाने से पहले खेत में रेखांकित करके पौध लगाने का स्थान सुनिश्चित कर लेते है | तत्पश्चात 90 X 90 X 90 से.मी. आकार के गड्ढे खोद कर मिट्टी फैला देनी चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>लीची</span></h3> <p style="text-align: justify; ">लीची के छोटे पौधों में स्थापना के समय नियमित सिंचाई करनी चाहिये | जिसके लिये सर्दियों में 5-6 दिनों तक गर्मी में 3-4 दिनों के अंतराल पर थाला विधि से सिंचाई करनी चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>केला</span></h3> <p style="text-align: justify; ">केले के लिए ड्वार्फ कैवे कैवेंडिश, रोवस्टा, मालभोग, चिनिया, चम्पा, अल्पान, मुठिया/ कुठिया तथा बत्तीसा | इन किस्मों का चुनाव करना चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>नींबू वर्गीय फल</span></h3> <p style="text-align: justify; ">बगीचा लगाने के लिए 5 मी. X 5 मी. दूरी पर वर्गाकार विधि में रेखांकन करके 60 सेमी X 60 सेमी X 60 सेमी आकार के गड्ढे तैयार करने चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>पशुपालन</span></h3> <p style="text-align: justify; ">सांप काटने पर काटे हुए जगह से 3 इंच ऊपर और नीचे बांध देना चाहिए | काटे हुए स्थान पर ब्लेड से चीरा लगाकर थोड़ा खून निकाल देना चाहिए तथा घाव में पोटाश का पाउडर भर देना चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "><b> </b></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>आँख आना</span></h3> <p style="text-align: justify; ">बोरिक ऐसिड को गुनगुने पानी में मिलाकर आँखे धोनी चाहिए | इससे अच्छी तरह से साफ़ करने के बाद सोफ्रामाईसिन लोशन आँख में 5-5 बूंद करके दोनों आँखों में देना चाहिए, अथवा लोकुला आई ड्रॉप देना चाहिए |</p> <p style="text-align: justify; "> </p> <p style="text-align: justify; "><b><i>स्त्रोत: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)</i></b></p>