<h3 style="text-align: justify;">जाड़े के दिन में (शरदकालीन) गन्ना</h3> <p style="text-align: justify;">जाड़े के दिन में (शरदकालीन) गन्ने के साथ ली गई विभिन्न अन्तः फसलें जैसे सरसों, तोरिया, मसूर, आलू, लहसुन, धनिया, मेथी, गेंदा, प्याज तथा गेहूं आदि की जरूरत के अनुसार निराई-गुड़ाई, संतुलित उर्वरक एवं कीट प्रबंधन का प्रयोग करें। अच्छी पेड़ी की फसल लेने के लिए गन्ने की मुख्य फसल की कटाई 15 जनवरी से 25 फरवरी तक करें।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccdownlod.jpg" width="193" height="163" /></p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई का उपयुक्त समय</h3> <p style="text-align: justify;">बसन्तकालीन गन्ने की बुआई का उपयुक्त समय पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्य जनवरी से फरवरी, मध्य क्षेत्र के लिए मध्य फरवरी से मध्य मार्च तथा पश्चिमी क्षेत्र में मध्य फरवरी से मार्च है। अतः पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान लाही आदि से खाली खेत में कार्बनिक खादों का प्रयोग करते हुए खेत की तैयारी करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई से पूर्व मृदा परीक्षण</h3> <p style="text-align: justify;">बसन्तकालीन बुआई से पूर्व मृदा परीक्षण कराएं तथा संस्तुति के अनुसार संतुलित उर्वरकों की व्यवस्था करें एवं उनकी बुआई सुनिश्चित करें। 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, 20 कि.ग्रा. पोटाश व 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट का प्रयोग करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">पाले से बचाव</h3> <p style="text-align: justify;">पाले से बचाव के लिए खड़ी फसल में जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। बसंतकालीन बुआई हेतु कुल क्षेत्रफल का 1/3 भाग शीघ्र पकने वाली प्रजातियों के अंतर्गत रखें। इसके साथ ही बुआई हेतु स्वस्थ बीजों का चयन कर उसका विशेष प्रबंध करें।</p> <p style="text-align: justify;">अगेती फसल की कटाई तापमान यदि काफी कम हो तो न करें इससे पेड़ी गन्ने में फुटाव उत्तम नहीं होगा। उपचार हेतु पारायुक्त रसायन एगलाल-3 प्रतिशत (560 ग्राम) या एरीटॉन 6 प्रतिशत 280 ग्रा या एम.ई.एम.सी. 6 प्रतिशत 280 ग्रा या बाविस्टिन 110 ग्राम को 100-125 लीटर पानी में घोलकर टुकड़ों को उपचारित करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">दीमक व अंकुरबेधक का नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">बुआई के समय दीमक व अंकुरबेधक के नियंत्रण हेतु फोरेट 10 जी-25 कि.ग्रा. या सेबिडाल 4.4 जी-25 कि.ग्रा./हैक्टर या क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. 5 लीटर/हैक्टर का प्रयोग करें। तापमान कम होने के कारण दिसम्बर-जनवरी में काटे गये गन्ने की जड़ से फुटाव कम होता है। अतः दिसम्बर-जनवरी में गन्ने की कटाई जमीन की सतह से सटा कर करें गन्ना काटने के तुरन्त बाद ठूंठों पर 2-4 डी खरपतवारनाशक की मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें तथा गन्ने की सूखी पत्तियों की 15-20 सें.मी. मोटी तह सतह के ऊपर बिछा दें, जिससे फुटाव अधिक होगा। गन्ने की तैयार फसल की कटाई की जाती है एवं कटाई के बाद गुड़ बनाया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">तनाछेदक कीट</h3> <p style="text-align: justify;">गन्ने को विभिन्न प्रकार के तनाछेदक कीटों से बचाने के लिए प्रति हैक्टर 30 कि.ग्रा. फ्यूराडान का प्रयोग करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह, 'सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>