ज्वार की खेती बुआई एवं बीजाेपचार ज्वार की बुआई माह के प्रथम पखवाड़े तक पूरी करें। बुआई से पूर्व बीज को कार्बेंडाजिम या एग्रोसन जीएन या कैप्टॉन आदि से 2-5 गा्रम/कि.ग्रा. बीज की दर से शोधित कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त बीज को जैविक उर्वरक एजोस्पीरिलम व पीएसबी से भी उपचारित करने से 15-20 प्रतिशत अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। ज्वार की बुआई के लिए 12-15 कि.ग्रा. बीज/हैक्टर पर्याप्त होता है। ज्वार की बुआई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी एवं पौध से पौध की दूरी 45×15 सें.मी. रखी जाए। प्रजातियां संकर प्रजातियां ज्वार की संकर प्रजातियां जैसे- सीएसएच 1, सीएसएच 9, सीएसएच 11, सीएसएच 13, सीएसएच 14, सीएसएच 16, सीएसएच 17, सीएसएच 18, एवं संकुल प्रजातियां जेजे 741, जेजे 938, जेजे 1041, जेजे 35, जीजे 38, जीजे 39, जीजे 40, जीजे 41, एसपीवी 96, एसपीवी 881, सीओ 24, सीओ 25, सीओ 26 आदि प्रमुख हैं। उर्वरक ज्वार की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 100-120 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50-60 कि.ग्रा. फास्फोरस तथा 40-50 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर की आवश्यकता पड़ती है, जबकि असिंचित क्षेत्रों में 50-60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 30-40 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 30-40 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर पर्याप्त होता है। निराई-गुड़ाई ज्वार की खेती में निराई-गुड़ाई का अधिक महत्व है। खरपतवारनाशी एट्राजीन (50 प्रतिशत डब्ल्यू.सी.) 0.75-1.0 कि.ग्रा./हैक्टर या एलाक्लोर (50 ई.सी.)1.5-2.0 लीटर/हैक्टर या एट्राजीन+पेन्डिमेथलीन 0.75-0.75 कि.ग्रा./हैक्टर या एट्राजीन एलाक्लोर 0.75-0.75 कि.ग्रा./हैक्टर घुलनशील चूर्ण का 600-800 लीटर पानी में घोलकर बुआई के तुरन्त बाद अंकुरण के पूर्व प्रयोग करने से खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। बाजरे की खेती बुआई जुलाई के द्वितीय पखवाड़े में करें। एक हैक्टर बुआई के लिए 4-5 कि.ग्रा. बीज/हैक्टर पर्याप्त होता है। मिट्टी एवं जलवायु बाजरे की खेती भारी वर्षा वाले उन क्षेत्राें में अच्छी तरह से की जा सकती है, जहां पर पानी का भराव न हो। इसके लिए बलुई दोमट मृदा अत्यंत उपयुक्त होती है। किसी कारण से बाजरे की बुआई समय पर नहीं की जा सकी हो तो फसल देरी से बोने की अपेक्षा उसे रोपना अधिक लाभप्रद होता है। बीज की मात्रा एवं राेपण एक हैक्टर क्षेत्र में पौध रोपण के लिए लगभग 500-600 वर्गमीटर में 2 से 2.5 कि.ग्रा. बीजों की जुलाई में बुआई हो जानी चाहिए और लगभग 2 से 3 सप्ताह की पौध राेपनी चाहिए। जब पाैधाें काे क्यारियों से उखाड़ें तो क्यारियों में नमी बनाए रखना आवश्यक है ताकि जड़ों को क्षति न पहुंचे। जहां तक संभव हो, रोपाई वर्षा वाले दिनों में करनी चाहिए। पंक्ति से पंक्ति एवं पौध से पौध की दूरी 45-50×10-15 सें.मी. रखते हुए एक छेद में केवल एक ही पौध की रोपाई करें। जुलाई के तीसरे सप्ताह से अगस्त के दूसरे सप्ताह तक रोपाई करने से अच्छी उपज मिलती है। किस्में संकर किस्में बाजरे की संकर किस्में पूसा 23, पूसा 415, पूसा 605, पूसा 322, पूसा-1201,एचएचबी 50, एचएचबी 67, एचएचडी 68, एचएचबी इम्प्रूव्ड, एचएचबी 117, एचएचबी- 146, एचएचबी- 197, एचएचबी-216, एचएचबी- 226, एचएचबी-234, एचएचबी-272, एचएचबी- 223, एचएचबी-226, एचएचबी-234, आरएचडी 30, आरएचडी 21, बी-2095, बायो-70, पूसा कम्पोजिट 643, पूसा कम्पोजिट 612, राज बाजरा चारी 2, राज 171, आईसीएमवी-155, डब्ल्यूसीसी-75, एचसी 4, एचसी 10 आईसीटीपी 8203 आदि प्रमुख हैं। उर्वरक बाजरा की संकर प्रजातियों के लिए 80 कि.ग्रा. नाइट्रोजेन, 40 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 40 कि.ग्रा. पोटाश का तथा देसी प्रजातियों के लिए 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 25 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 25 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर बुआई के समय प्रयोग करें। स्त्राेत : राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012