मटर सिंचाई व निराई-गुड़ाई समय से बोई गई मटर में फूल आने से पहले एक हल्की सिंचाई व निराई-गुड़ाई कर देनी चाहिए। कीटों से बचाव इंडोक्साकार्ब (1.0 मि.ली./लीटर पानी) का छिड़काव कीटों से होने वाली क्षति को कम करता है। मटर के तनाछेदक कीट की रोकथाम के लिए डाइमिथोएट 30 ई.सी. दवा की 1.0 लीटर मात्रा और फलीछेदक कीट की रोकथाम के लिए एसीपफेट 75 एस.पी. 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या मोनोक्रोटोफॉस 36 ई.सी. दवा को 750 मि.ली. की दर से 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। मसूर बुआई मसूर की पछेती बुआई दिसंबर में भी कर सकते हैं। बीज की मात्रा एवं बीजोपचार इसके लिए 50-60 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर प्रयोग करें। बुआई करने से पहले बीजोपचार अवश्य करें। एक हैक्टर में 15 कि.ग्रा. नाइट्रोजन तथा 40 कि.ग्रा. फास्फोरस प्रयोग करना चाहिए। बुआई कूंड़ों में 15-20 सें.मी. दूरी पर करनी चाहिए। सिंचाई की आवश्यकता मसूर की फसल में भी अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है, किन्तु अधिक पैदावार के लिए एक या दो सिंचाई (पुष्पावस्था से पूर्व बुआई के 40-45 दिनों बाद) देने से उत्पादकता में वृद्धि होती है। यदि वर्षा हो जाती है तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, अधिक पानी होने पर मसूर में इसका प्रतिकूल असर होता है। माहूं का प्रकोप माहूं का प्रकोप होने पर डाइमिथोएट (0.03 प्रतिशत) का छिड़काव करें। रतुआ रोग का नियंत्रण रतुआ रोग के नियंत्रण हेतु घुलनशील गंधक (0.2-0.3 प्रतिशत) अथवा मेन्कोजेब (0.02 प्रतिशत) का छिड़काव करें। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दें। स्त्रोत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अजय कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012