परिचय साग-सब्जियों का हमारे दैनिक भोजन में महत्वपूर्ण स्थान है। विशेषकर शाकाहारियों के जीवन में। साग-सब्जी भोजन में ऐसे पोषक तत्वों के स्रोत हैं, हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं बढ़ाते, बल्कि उसके स्वाद को भी बढ़ाते हैं। पोषाहार विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित भोजन के लिए एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 85 ग्राम फल और 300 ग्राम साग-सब्जियों का सेवन करना चाहिए, परंतु हमारे देश में साग-सब्जियों का वर्तमान उत्पादन स्तर प्रतिदिन, प्रतिव्यक्ति की खपत के हिसाब से मात्र 120 ग्राम है। इसलिए हमें इनका उत्पादन बढ़ाना चाहिए। इसलिए आईए जानते है दिसम्बर माह में किये जाने वाले कृषि कार्यों के बारे में। इस माह में कृषि सम्बंधित मुख्य बातें शिखर जड विकास (२१ दिन बाद) - बीजाई के २१ दिन बाद गेहूं में शिखर जड़ें निकलती हैं इसलिए इस अवस्था में सिंचाई बिल्कुल नहीं चूकनी चाहिए, नहीं तो पैदावार में भारी गिरावट हो जायेगी । जस्ते की कमी (३० दिन बाद) - गेंहू के बीजाई के २७-३० दिन बाद नीचे की तीसरी या चौथी पत्तियों पर हल्के-पीले धब्बे जो बाद में बड़े आकार के हो जाते हैं जस्ते की कमी के लक्षण हैं । इस स्थिति में तुरंत ०.७ प्रतिशत जिंक सल्फेट व २.७ प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर १०-१७ दिन के अन्तर पर छिडकें वरना पैदावार कम होने के साथ-साथ फसल पकने में १०-१७ दिन लेट हो जायेगी । नत्रजन उपलब्धता ( कुशल उपयोग) - यदि गेहूं हरी खाद या परती छोडने पर बोई गई हो तो नत्रजन की मात्रा २७ प्रतिशत कम करें । जयादा पोषक तत्व खीचने वाली फसलों जैसे बाजरा या ज्वार या कल्लर भूमि में बोये तो नत्रजन की मात्रा २७ प्रतिशत बढ़ा दें । हल्की मिट्टी में नत्रजन २ बार की बजाय 3 बार डालें । गेहूं गेहूं की पछेती बीजाई दिसम्बर के तीसरे सप्ताह तक कर सकते है परंतु देरी के साथ-साथ पैदावार भी कम हो जाती है । पछेती बीजाई के लिए सोनालिका, डब्ल्यु.एस.२९१, एच.डी.२२८५, सोनक, यू.पी.२३३८, राज ३७६७, पी.बी.डब्ल्यु. ३७३, पी.बी.डब्ल्यु १३८ व टी.एल. १२१० किस्में लगायें । पिछेती बीजाई में लाईनों में दूरी कम करके ७ ईंच तथा बीज की मात्रा बढ़ाकर ६० कि.ग्रा. कर दें । पिछेती गेहूं में पहली सिंचाई ४ सप्ताह बाद करें । नवम्बर में बोई गेहूं को ३ सप्ताह होने पर पहली सिंचाई करना बहुत जरूरी है क्योंकि इसी समय गेहूं के कल्ले फूटने लगते है जोकि पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण है । हल्की मिट्टी में 1 बोरा यूरिया (१/३ नत्रजन की दूसरी किस्त)सिंचाई के बाद छिडकें तथा भारी मिट्टी में १।७ बोरे यूरिया (१/२ नत्रजन की आखिरी किस्त) पहले छिडक कर हल्की सिंचाई कर दें । इस अवस्था में खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है । इसकी विधि नवम्बर माह में बताई जा चुकी है । यदि फसल पर जिंक की कमी नजर आये तो 1 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट ४ कि.ग्रा. यूरिया के साथ २०० लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें । बीमारयों , कीटों व टीमक नियंत्रण नवम्बर माह में बता चुके है । जौ व शरदकालीन मक्की अक्टूबर में बोई जों को ८०-८७ दिन में दूसरी सिंचाई कर दें । दीमक लगने पर गेंहू की तरह १.७ लीटर क्लोरोपायरीफास २० ई.सी. या 1 लीटर एण्डोसल्फान ३७ ई.सी. सिंचाई के साथ ही दे दें । शरदकालीन मक्की में दिसम्बर के अन्त २-२.५ फुट ऊंचाई होने पर 1 बोरा यूरिया डाल दें तथा मिट्टी चढ़ा दें इससे फसल गिरेगी भी नहीं व जल्टी बढ़वार भी होगी । चना, मसूर व दाना मटर - में फलियां लगने के समय सिंचाई जरूरी है तथा फली छेदक की रोकथाम के लिए १७० मि.ली.एण्डोसल्फान ३७ ई।सी। का १०० लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें व १७ दिन बाद फिर दोहरायें । सरसों, तोरिया, राया व तारामीरा तोरिया में फलियां बनने पर सिंचाई दें तथा पकने पर शीघ्र काट लें ताकि दाने न झडे व गेहूं की फसल जल्दी लग जाये । राया व पीली सरसों में भी फूल आने पर सिंचाई दें । चेपा व बीमारियों की रोकथाम के लिए नवम्बर माह में बता चुके है । तारामीरा में सिंचाई की जरूरत नहीं होती तथा अलसी में फूल आने पर सिंचाई दें । चारा रिजका व बरसीम की दूसरी कटाई ३० दिन के अन्तराल पर करें तथा सिंचाई कर दें । जई की दूसरी कटाई दिसम्बर के अन्त तक कर सकते है । कटाई के बाद सिंचाई करें । सूरजमुखी सूरजमुखी को दिसम्बर से लेकर जनवरी तक लगा सकते है । उन्नत किस्मों का ४ कि.ग्रा. तथा संकर किस्मों का १.७ - २ कि.ग्रा. बीज को ४ से ६ घंटे तक भिगोयें तथा छाया में सुखाकर २ ग्राम वैवीस्टीन या ३ ग्राम थीरम प्रति कि.ग्रा. बीज के हिसाब से उपचारित करें । उन्नत किस्मों को १८ इंच पर तथा संकर किस्मों को २४ इंच दूरी पर लगायें तथा पौधों में १२ इंच दूरी रखें तथा बीज को २ इंच गहरा बोये । बीजाई पर आधा बोरा यूरिया व 1 बोरा सिंगल सुपर फास्फेट उन्त किस्मों में डालें तथा संकर किस्मों में पोना बोरा यूरिया व सवा एक बोरा सिंगल सुपर फास्फेट डालें । उन्नत किस्मों में हरियाणा सूरजमुखी न.-१ तथा संकर किस्मों में डी.के ३८९०, पी ए सी ३०२, एस एच ३३२२, एन एस एफ एच ५,९२, जी के एस एफ एच २००२, ज्वालामुखी, सनजीन ८५ किस्में ८ - १० क्विंटल पैदावार टे देती हैं । गन्ना गन्ने की कटाई जोरों पर है । कटाई जमीन की सतह के साथ करें तथा गन्ना मिलों की मांग के अनुसार करें । मोदी फसल के लिए कटाई के तुरंत बाद सिंचाई कर दें । कटाई के बाद पत्तियों को जला दें या खेत से हटा दें । खाली स्थानों में नई पोरियां लगा दें । फल बगीचों में खाद देने का समय है । आम, नीबू जाति व अनार के पौधों में गोबर की खाद १७ से २० कि.ग्रा. प्रति पौधा प्रति वर्ष के हिसाब से दें । पांच वर्ष या उपर के पौधों में ७७ से १०० कि.ग्रा. प्रति पौधा दें । खाद देने के साथ गुडाई भी करें । नीबू में केकंर रोग की रोकथाम के लिए २० मि।ग्रा। स्ट्रप्टोसाइकिलन को २५ ग्राम कोपर सल्फेट के साथ २०० लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें । आम के पेडों में मीलीबग के बच्चों को चढने से रोकने के लिए पोलिथिन की २ फुट चौडी पट्टी कसकर लपेट दें तांकि बच्चे फिसलकर नीचे गिर जाये । फिर इन्हें इकट्ठा करके जला दें । बेर में सफेद चुणीं रोग दिखाई देने पर घुलनशील गंधक ४०० ग्राम को २०० लीटर पानी में घोलकर पेडों पर छिडकें । फलमक्खी नियंत्रण के लिए १.७ मि.ली.एण्डोसल्फान ३७ ई सी प्रति लीटर पानी में मिलाकर १७ दिनों के अन्तर पर छिडके । आडू - दिसम्बर में आडू के मिट्टी रहित पौधे लगाए जा सकते है इसके लिए शरबती, सफेटा, मैचप्लेस, पलोरडासन किस्में उपयुक्त हैं । 1 वर्ग मीटर के गढ्ढ़े खोदें तथा उपर की आधा मीटर मिट्टी में सड़ी-गली देशी खाद बराबर मात्रा में मिलाकर २० मि.ली. क्लोरपायरीफास २० इ.सी. डालकर भर दें । पौधे लगाने से पहले गढ़ढ़े पानी से भरें तथा फिर मिट्टी डालकर बराबर करने बाद पेड लगाए तथा पानी दें । पौधों में यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट तथा म्युरेट आफ पोटाश प्रति पौधा प्रति वर्ष आयु के हिसाब से भी डालें । सब्जियां - प्याज की नर्सरी जो अक्टूबर-नवम्बर में लगाई गई थी अब रोपाई के लिए तैयार है । लाईन में ६ इंच व पौधों में ४ इंच दूरी रखें । १० टन कम्पोस्ट, पौना बोरा यूरिया, २.५ बोरे सिंगल सुपर फास्फेट व 1 बोरा म्युरेट आफ पोटाश डार्ले तथा रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें । इसके बाद सर्दियों में १७ के अन्तर सिंचाई करते रहे । खरपतवार नियंत्रण के लिए स्टोम्प १४०० मि.ली.२०० लीटर पानी में मिलाकर रोपाई के बाद छिडके तथा तुरंत पहली सिंचाई कर दें । बैंगन व टमाटर - में फलछेदक से बचाव के लिए नवम्बर में बताई गई विधि अपनाए । मूली, शलजम, गाजर में मिट्टी चढ़ाए ताकि पैदावार अधिक हो । बाकी सब्जियों को १७-२० दिन में हल्की सिंचाई करते रहे तथा पोलिथिन सीट से ढककर पाले से 3भी बचाव रखें । फूल गुलाब के पौधों में काट-छांट तथा गुडाई के लिए उपयुक्त समय है । गुडाई के बाद गुलाब के तनों व जड़ों को धूप लगाने तथा कम्पोस्ट देने से बसंत ऋतु में अच्छे फूल आते हैं । इस माह गुलाब के पौधों के तनों की कलम भी आसानी से लग जाती है । बाकी फूलों में जरूरत के अनुसार व देशी खाद, पानी व गुडाई देते रहें । पाले से पौधों का बचाव रखें । स्त्रोत : ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान