पछेती आलू पछेती आलू में सिंचाई करें और बुआई के 25 दिनों बाद 87 कि.ग्रा. यूरिया की प्रति हैक्टर की दर से टॉप ड्रेसिंग करके मिट्टी चढ़ायें। निराई-गुड़ाई पहाड़ी इलाकों में आलू के खेत में निराई-गुड़ाई करें। उर्वरक नाइट्रोजन की बाकी बची एक तिहाई मात्रा यूरिया या कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट के रूप में खेत में डालकर मोटी मेड़ बनाकर मिट्टी चढ़ाएं। पाले से बचाव सब्जियों को पाले से बचाने के लिए धुयें का प्रबंध करें। आलू की फसल में जरूरत के मुताबिक 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। इस दौरान खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना आवश्यक है। खरपतवार नियंत्रण फसल की प्रारम्भिकअवस्था में खरपतवार नियंत्रण के लिए सिंचाई के बाद मिट्टी चढ़ानी चाहिए। पछेती आलू में दिसंबर तथा जनवरी में अधिक ठंड की आशंका होने पर फसल की सिंचाई कर देनी चाहिए। जमीन भीगी रहने पर पाला का असर कम हो जाता है। झुलसा रोग एवं माहू कीट लगातार बादल रहने एवं नमी की परिस्थिति में झुलसा रोग एवं माहू कीट आने की आशंका रहती है। रोगों से बचाव रोगों से बचाव के लिए शुरूआती अवस्था में ही मैंकोजेब का 0.2 प्रतिशत घोल अथवा रिडोमिल 2 ग्राम तथा फॉस्फेमिडॉन 0.6 मि.मी. प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10-12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें। यदि आसमान में बादल छाए हैं और नमी है, तो सायमोक्जेनिल 8 फीसदी व मैंकोजेब 64 फीसदी को मिलाकर छिड़काव करें। अधिक प्रकोप होने पर 10-12 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। स्त्रोत : खेती पत्रिका(दिसंबर माह, आईसीएआर), राजीव कमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कमार उपाध्याय , एस.एस. राठौर-सस्य विज्ञान विभाग, भाकृअनुप.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012; अमन सिंह- आनुवंशिकी विभाग, आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या, 224229 (उत्तर प्रदेश); और नितिन कुमार शुक्ला-श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, पौढ़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)।