रबी मौसम की महत्वपूर्ण सब्जी फसलों में आलू, टमाटर, गोभीवर्गीय, मिर्ची, मेथी, गाजर एवं पालक आदि खेत में अपनी बढ़वार की अवस्था में होती हैं। इसके साथ ही खेत में तैयार गाजर, मूली, शलजम, पालक एवं मेथी आदि समय पर तुड़ाई कर बाजार में भेजते रहें। इस माह में सिंचाई प्रबंधन के साथ खरपतवार नियंत्रण व पोषक प्रबधंन भी अति आवश्यक हो जाता है। पछेती आलू सिंचाई पछेती आलू में सिंचाई करें और बुआई के 25 दिनों बाद 87 कि.ग्रा. यूरिया का प्रति हैक्टर की दर से टॉपड्रेसिंग करके मिट्टी चढ़ायें। निराई-गुड़ाई पहाड़ी इलाकों में आलू के खेत में निराई-गुड़ाई करें। नाइट्रोजन की बाकी बची एक तिहाई मात्रा यूरिया या कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट के रूप में खेत में डालकर मोटी मेड़ बनाकर मिट्टी चढ़ाएं। पाले से बचाव सब्जियों को पाले से बचाने के लिए धुयें का प्रबंध करें। पछेती आलू में दिसंबर तथा जनवरी में अधिक ठंड की आशंका होने पर फसल की सिंचाई कर देनी चाहिये। जमीन गीली रहने पर पाले का असर कम हो जाता है। लाही रोग के नियंत्रण आलू की फसल में लाही रोग के नियंत्रण हेतु रोपाई के 45 दिनों बाद फसल पर 0.1 टक्के रोगर या मेटासिस्टॉक्स का घोल 2-3 बार 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिये। खरपतवार नियंत्रण आलू की फसल में जरूरत के मुताबिक 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें एवं खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना आवश्यक है। फसल की प्राम्भिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण के लिए सिंचाई के बाद मिट्टी चढ़ानी चाहिए। झुलसा रोग एवं माहूं कीट लगातार बादल रहने एवं नमी की परिस्थिति में झुलसा रोग एवं माहूं कीट आने की आशंका रहती है। रोगों से बचाव के लिए शुरूआती अवस्था में ही मैंकोजेब का 0.2 प्रतिशत घोल अथवा रिडोमिल 2 ग्राम तथा फॉस्फेमिडान 0.6 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10-12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें। आसमान में बादल हाेने की स्थिति यदि आसमान में बादल छाए हैं और नमी है, तो सायमोक्जेनिल 8 फीसदी व मैंकोजेब 64 फीसदी को मिलाकर छिड़काव करें। अधिक प्रकोप होने पर 10-12 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। स्त्रोत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अजय कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012