हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सब्जी उत्पादन का विशेष महत्व है। यह किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक व्यवसाय है। यहां जलवायु की विविधता के कारण विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। इस प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन 72,000 हैक्टर क्षेत्रफल में हो रहा है और इनका उत्पादन 12,50,700 मीट्रिक टन है। सब्जियों पर कीटों का प्रकोप अधिक होता है। इससे पैदावार में कमी आती है और किसानों को नाशीकीटों द्वारा नुकसान झेलना पड़ता है। अतः कीटों का नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है। कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए एकीकृत कीट प्रबंधन पर अधिक र बल देने की आवश्यकता है। टमाटर का फलछेदक यह एक बहुपौधभक्षी कीट है, जो कि टमाटर को नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की सुंडियां कोमल पत्तियों और फूलों पर आक्रमण करती हैं तथा फिर फल में छेद करके फल को ग्रसित करती हैं। फलछेदक की मादा शाम के समय पत्तों के निचले हिस्से पर हल्के पीले व सफेद रंग के अंडे देती है। इन अंडों से तीन से चार दिनों बाद हरे एवं भूरे रंग की सुंडियां निकलती हैं। पूरी तरह से विकसित सुंडी हरे रंग की होती है, जिनमें गहरे भूरे रंग की धारियां होती हैं। यह कीट फलों में छेद करके अपने शरीर का आधा भागअंदर घुसाकर फल का गूदा खाती है। इसके कारण फल सड़ जाता है। इसका जीवनचक्र 4 से 6 सप्ताह में पूरा होता है। टमाटर में लगने वाले कीट तम्बाकू की फलछेदक सुंडी यह भी एक बहुपौधभक्षी कीट है। इसके अगले पंख स्लेटी लाल भूरे रंग के होते हैं। पिछले पंख मटमैले सफेद रंग के, जिसमें गहरे भूरे रंग की किनारी होती है। इसकी मादा पत्तों के नीचे 100 से 300 अंडे समूह में देती है, जिनको ऊपर से पीले भूरे रंग के बालों से मादा द्वारा ढक दिया जाता है। इन अंडों से 4 से 5 दिनों में हरे पीले रंग की सुंडियां निकलती हैं। ये प्रारंभ में समूह में रहकर पत्तियों की ऊपरी सतह खुरचकर खाती हैं तथा बड़ी सुंडियां पत्तों को काटकर खाती हैं। पूर्ण विकसित सूंडी जमीन के अंदर जाकर प्यूपा बनाती है। इस कीट का जीवनचक्र 30 से 40 दिनों में पूरा होता है। फल मक्खी फल मक्खी आकार में छोटी होती है, परंतु काफी हानिकारक होती है। यह मक्खी बरसात के मौसम में अधिक नुकसान करती है। इनके वयस्कों के गले में पीले रंग की धारियां देखी जा सकती हैं। इस कीटकी मादा मक्खी फल प्ररोह के अग्रभाग में अथवा फल के अंदर अंडे देती है। इन अंडों से चार-पांच दिनों में सफेद रंग के शिश (मैगट) निकल जाते हैं। ये फलों के अंदर घुसकर इसके गूदे को खाना प्रारंभ कर देते हैं। ये सुंडियां तीन अवस्थाओं से गुजरती हैं तथा मृदा में पूर्णतः विकसित होने पर प्यूपा बन जाती हैं। इन प्यूपा से 8 से 10 दिनों में वयस्क मक्खी निकलती है। यह लगभग एक माह तक जीवित रहती है। सफेद मक्खी सफेद मक्खी का प्रकोप टमाटर की फसल की शुरुआत से अंत तक रहता है। इस कीट की मक्खी सफेद रंग की होती है और बहुत ही छोटी होती है। इसके वयस्क एवं शिश दोनों ही फलों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। सफेद मक्खी की मादा पत्तों की निचली सतह में 150 से 250 अंडे देती है। ये अंडे बहुत महीन होते हैं, जिन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। इन अंडों से 5 से 10 दिनों में शिशु निकलते हैं। शिशु तीन अवस्थाओं को पार कर चौथी अवस्था में पहुंचकर प्यूपा में परिवर्तित हो जाते हैं। प्यूपासे 10 से 15 दिनों बाद में वयस्क निकलते हैं और जीवनचक्र फिर से आरंभ कर देते हैं।इस कीट के शरीर से मीठा पदार्थ निकलता रहता है, जो पत्तों पर जम जाता है। इस पर काली फफूंद का आक्रमण होता है तथा पौधों को नुकसान पहुंचता है। पर्ण खनिक कीट यह एक बहुभक्षी कीट है, जो कि संपूर्ण विश्व में सब्जियों एवं फलों की 50 से अधिक किस्मों को नुकसान पहुंचाता है। इसकी मादा पत्ते के ऊतक एवं निचली सतह के अंदर अंडा देती है। अण्डों से दो-तीन दिनों बाद निकलकर शिशु पत्ते की दो सतहों के बीच में रहकर नुकसान पहुंचाते हैं। ये शिशु सर्पाकार सुरंगों का निर्माण करते हैं। इन सफेद सुरंगों के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है तथा फसल की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वयस्क शिशु 8 से 12 दिनों बाद मृदा में गिरकर प्यूपा बनाते हैं। इनसे 8 से 10 दिनों बाद वयस्क निकल जाते हैं। कटुआ कीट यह कीट छोटे पौधों को काफी नुकसान पहुंचाता है। कटुआ कीट छोटे पौधों को रात के समय काटते हैंऔर कभी-कभी कटे हुए छोटे पौधों को जमीन के अंदर भी ले जाते हैं। एक मादा सफेद रंग के 1200-1900 अंडे देती है। इनमें से चार पांच दिनों बाद सूंडी बाहर निकलती है। इसकी सुंडियां गंदी सलेटी भूरे-काले रंग की होती हैं। ये दिन के समय मृदा में छुपी हुई रहती हैं। पौधरोपण के समय से ही ये पौधे को मृदा की धरातल के बराबर तने को काटकर खाती हैं। इसकी सुंडियां लगभग 40 दिनों तक सक्रिय रहती हैं। इसका प्यूपा भी जमीन के अंदर ही बनता है। इसमें से लगभग 15 दिनों में वयस्क पतंगा निकलता है। इस कीट का जीवनचक्र 30 से 60 दिनों में पूरा हो जाता है। एकीकृत कीट प्रबंधन क्षतिग्रस्त फलों को इकट्ठा करके नष्ट कर दें। खेत में सफाई पर विशेष ध्यान दें। खेतों में फसलचक्र को बढ़ावा दें। गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करें। अण्डों को और समूह में रहने वाली सुंडियों को एकत्रित करके नष्ट कर देना चाहिए। टमाटर की 16 पंक्तियों के बाद दो पंक्तियां गेंदे की लगाएं और गेंदे पर लगी सुंडियों को मारते रहें। रात्रि के समय रोशनी 'प्रकाश प्रपंच' का इस्तेमाल करना चाहिए। नर वयस्कों को पकड़ने के लिए 'फेरोमोन प्रपंच' (रासायनिक) का इस्तेमाल भी उपयोगी है। एक एकड़ जमीन में चार से पांच ट्रैप लगाने चाहिए। फूल आने पर बैसिल्स थुरिनजियसिस वार कुर्सटाकी 0.5 लीटर प्रति हैक्टर (70 मि.ली. 100 लीटर पानी में डाइपैल 8 लीटर) का छिड़काव करें। ट्राइकोग्रामा प्रेटियोसम के अंडों का 20,000 प्रति एकड़ चार बार प्रति सप्ताह की दर से खेतों में प्रयोग करें। सफेद मक्खी और पर्ण खनिक को पकड़ने के लिए पीले रंग के चिपचिपे (गोंद लगे हुए) लगे हुए ट्रैप का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रति 20 मीटर में एक ट्रैप लगा सकते हैं। फल मक्खी के नर वयस्कों को पकड़ने के लिए क्यून्योर नामक आकर्षक या पालम _ट्रैप का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 10 ग्राम गुड़ अथवा चीनी का घोल और2 मि.ली. मैलाथियान (50 ई.सी.) प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। मिथाइल यूजीनॉल (40 मि.ली.) और मैलाथियान (20 मि.ली.) (2 मि.ली. प्रति लीटर पानी) के घोल को बोतलों में डालकर टमाटर के खेत में लटकाने से इस कीट को नियंत्रित किया जा सकता है। अधिक प्रकोप होने पर क्वीनालफॉस 20 प्रतिशत (1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी) या लैम्डा-साईहैलोथ्रिन (5 प्रतिशत ई.सी.) या इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी या ट्रायजोफॉस 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। खेत तैयार करते समय मृदा में क्लोरपाइरिफॉस 20 ई.सी. 2 लीटर का 20 से 25 कि.ग्रा. रेत में मिलाकर प्रति हैक्टर खेत में अच्छी तरह मिला दें। स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), अनुराग शर्मा, आरती शुक्ला, सीमा ठाकुर- कृषि विज्ञान केंद्र, कंडाघाट, सोलन (हिमाचल प्रदेश)और रेणु कपूर-कृषि विज्ञान केंद्र, चम्बा (हिमाचल प्रदेश)