<p style="text-align: justify;">गेहूं की खेती की सफलता एवं उससे प्राप्त लाभ विशेष रूप से उन्नत प्रजातियों के चयन पर आधारित है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सिंचित अवस्था में समय से बुआई </h3> <p style="text-align: justify;">सिंचित अवस्था में समय से बुआई (10 नवंबर से 25 नवंबर) के लिए संस्तुत उन्नत प्रजातियां जैसे एच.डी.-3298, एच.डी. 3293, पूसा यशस्वी या एच.डी. 3226 (औसत उत्पादन 575 क्विंटल/हैक्टर एवं आनुवंशिक उपज क्षमता 79.6 क्विंटल/हैक्टर, प्रोटीन-12.8 प्रतिशत, ग्लूटीन 30.85 प्रतिशत व जिंक 36.8 प्रतिशत), एच.डी. 3237, करन वंदना या डी.बी.डब्ल्यू. 187 (औसत उत्पादन 64.7 क्विंटल/हैक्टर), करण नरेन्द्र या डी.बी.डब्ल्यू 2m (औसत उत्पादन 61.3 क्विंटल/हैक्टर), करण श्रेया (औसत उत्पादन 55.0 टल/हैक्टर),डी.डी. डब्ल्यू 47 (औसत उत्पादन 74.0 क्विंटल/ हैक्टर), एच.डी. 3086, एचडी. 3249,एचडी. 3271,एच.आई. 1633, एच.आई. 1634, एच.आई.-1620, एच.आई.-1621, एच.आई.-1628, एच.आई.-8028, व एच.आई.-8805 (नई किस्में व सीमित सिंचाई),एच.डी.-2967,एच.डी.सी.एस.डब्ल्यू 18. एच.टी. 3117, (संरक्षण कृषि के लिए), एच.डी.-3043, एच.डी.-2894, एच.डी.-2851, एच.डी.-2687, एच.डी. 2329, एच.डी. 2733, एच.डी. 2824, एच.डी. 2894, एच.डी 4713, टी.बी. डब्ल्यू. 17, डी.बी.डब्ल्यू 39, सी.बीडब्ल्यू 38, पी.बी.डब्ल्यू 502, पी.बी.डब्ल्यू 550, पी.बी.डब्ल्यू 621, पी.बी.डब्ल्यू. 443, पी.बी.डब्ल्यू.एस. 542, पी.बी.डब्ल्यू 396, डब्ल्यू. एच. 896, डब्ल्यू एच. 542, के. 107,एच.पी.-1761, एच.पी. 1761, एन.डब्ल्यू 1012,के. 307,राज 4120, राज 4229,डी.बी.डब्ल्यू.-110,डी.बी.डब्ल्यू. 39, जी. डब्ल्यू 366, डी.डब्ल्यू. 273 है, जिनकी औसत उपज 50-55 क्विंटल/हैक्टर हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC1.jpg" width="177" height="155" /></p> <h3 style="text-align: justify;">सिचित अवस्था में देरी से बुआई </h3> <p style="text-align: justify;">सिचित अवस्था में देरी से बुआई (25 नवंबर से 25 दिसंबर) के लिए उन्नत प्रजातियां जैसे एच.डी. 3018, एच.डी. 3167, (नई किस्में व सीमित सिंचाई), एच.डी. -3117, एच.डी.-3059, एच.डी.-3118.एच.डी.-2985.एच.डी.-2643. एच.डी.-2824, एच.डी.-2864, एच.डी.-2932.डब्ल्यू.आर.-544. राज-3765. राज-3077. पी.बी.डब्ल्यू. -373. पी.बी.डब्ल्यू.-590. पी.बी.डब्ल्यू .154,डी.बी.डब्ल्यू.-16.डी.बी.डब्ल्यू .173 (औसत उत्पादन 47.2-57.0 क्विंटल/हैक्टर, प्रोटीन-125 प्रतिशत व आयरन 40 पीपीएम), पी.बी.डब्ल्यू.-590. एच.यू.डब्ल्यू -234. एच.यू.डब्ल्यू.-468. यू.पी.-2338. यू.पी.-2425. एम.पी.-4010, डी.बी.डब्ल्यू-107.डी.बी.डब्ल्यू.-14, एच.डब्ल्यू-2045. एच.पी.-1744, एन.डब्ल्यू-2036, एच.आइ. 1563, के.-9423 एवं के.-9533 हैं, जिनकी औसत उपज 40-45 क्विंटल/हैक्टर है।</p> <h3 style="text-align: justify;">असिंचित अवस्था</h3> <p style="text-align: justify;">असिंचित अवस्था में समय से बुआई के लिए उन्नत प्रजातियां जैसे-एच.डी. -2733, एच.डी.-2824, एच.डी.-2888. राज-4120. पी.बी.डब्ल्यू.-443. पी.बी.डब्ल्यू. -299, पी.बी.डब्ल्यू.-396. एच.यू.डब्ल्यू.-468. पी.बी.डब्ल्यू .-376. डब्ल्यू .-एच.-533, पी.बी.डब्ल्यू.-175, के.-8962, के.-9465. एम.ए.सी.एस.-4145. एच.डी.-4672, एच.आई. -8627, एच.आई. 1500, एच.आई. 1531, एच.डब्ल्यू. 2004 हैं, जिनकी औसत उपज 25-40 क्विंटल/हैक्टर है।</p> <h3 style="text-align: justify;">लवणीय एवं क्षारीय मृदा</h3> <p style="text-align: justify;">लवणीय एवं क्षारीय मृदाओं के लिए उन्नत प्रजातियाँ जैसे के.आर.एल.-19, के.आर.एल. 213, के.आर.एल. 210, एच.के.आर.एल. 14, एस. 240, एच.एस. 420, के.-8434 (प्रसाद), एन.डब्ल्यू .-1067. डब्ल्यू.-1142 हैं, जिनकी औसत उपज 30-45 क्विंटल प्रति हैक्टर है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत*, प्रवीण कुमार उपाध्याय एस.एस. राठौर, और अमन सिंह सस्य विज्ञान, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012 एवं आनुवंशिकी विभाग, नितिन कुमार शुक्ला-आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंब, अयोध्या-224229; श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल।</p>