<h3 style="text-align: justify;">अमरूद</h3> <h4>सघन बागवानी</h4> <p style="text-align: justify;">आजकल अमरूद की सघन बागवानी भी किसानों में काफी प्रचलित है। इसमें अमरूद को 1×2 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इस बात का हमेशा ध्यान रखा जाता है कि बाग में पौधे लगाने की दूरी, जलवायु एवं मृदा की उर्वरता एवं किस्म विशेष पर निर्भर करती है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="165" height="144" /></p> <h4 style="text-align: justify;">कटाई</h4> <p style="text-align: justify;">अमरूद की नई बढ़वार, जिस पर फूल लग रहे हों, की शाखा का 3/4 भाग काटकर निकाल दें। इससे बरसात की फसल तो कम हो जायेगी, परन्तु रबी की फसल में वृद्धि हो जायेगी।</p> <h4 style="text-align: justify;">सिंचाई </h4> <p style="text-align: justify;">अमरूद में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें।</p> <h4 style="text-align: justify;">यूरिया का छिड़काव </h4> <p style="text-align: justify;">पुष्पण की अवस्था पर 10 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव 10-15 दिनों के अंतर पर करने से जायद के मौसम में 3-8 गुना अधिक फसल प्राप्त होती है। अमरूद की फसल में मार्च से मई में फूल आते हैं, जिसकी फसल अगस्त से लेकर मध्य अक्टूबर तक मिलती रहती है।</p> <h4 style="text-align: justify;">बहार नियंत्रण</h4> <p style="text-align: justify;">अमरूद में बहार नियंत्रण के लिए 10 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव अप्रैल व मई में फूलों पर करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">लीची</h3> <p style="text-align: justify;">लीची के पौधों में फल मई-जून में पककर तैयार हो जाते हैं। फल पकने के बाद गहरे गुलाबी या लाल रंग के हो जाते हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="147" height="128" /></p> <h4 style="text-align: justify;">तुड़ाई</h4> <p style="text-align: justify;">फलों की तुड़ाई मई से जुलाई तक होती है। लीची के फलों को फटने से बचाने के लिए बागों में सिंचाई का उपयुक्त प्रबंधन होना आवश्यक है।</p> <h4 style="text-align: justify;">विगलन रोग</h4> <p style="text-align: justify;">इसके साथ ही फल विगलन रोग से बचाव के लिए फलों को पकने से 20-25 दिनों पूर्व बाविस्टीन की 10 ग्राम मात्रा को 10 लीटर पानी में घोलकर फलों पर छिड़काव करें। यह लीची की एक प्रमुख समस्या है।</p> <h4 style="text-align: justify;">सिंचाई</h4> <p style="text-align: justify;">फल के बढ़वार के समय मृदा में नमी की कमी तथा तेज गर्म हवाओं के चलने के कारण फल फटते हैं। मृदा में नमी बनाये रखने के लिए फल लगने से लेकर पकने तक बाग में हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।</p> <p style="text-align: justify;"> </p>