आम ऊतक क्षय रोग आम के फलों के ऊतक क्षय रोग से बचाव के लिए 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। फुदका कीट नियंत्रण आम में फुदका कीट नियंत्रण के लिए फलों के मटर के आकार की अवस्था पर मोनोक्रोटोफॉस 1.25 मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। डासी मक्खी के नियंत्रण के लिए कार्बोरिल 0.2 प्रतिशत के साथ 0.1 शर्करा और 0.1 प्रतिशत मैलाथियान मिलाकर ट्रैप बनाकर लटकाएं। खर्रा या पाउडरी रोग खर्रा या पाउडरी रोग के लिए 0.2 प्रतिशत घुलनशील गंधक का प्रयोग करें। कोइलिया फल विकार के लिए बोरेक्स 1 प्रतिशत का छिड़काव फल लगाने पर सिंचाई के साथ करें। फलों को टपकने से रोकने के लिए वृद्धि हार्मोन एनएए 20 पीपीएम का छिड़काव करें। कॉपर तथा चूने का लेप मई की छंटाई के बाद उभरने वाली नए शाखाओं में सर्दियों की फसल के लिए अधिक फल देने की क्षमता होती है। तेज धूप से झुलसन को रोकने के लिए पेड़ों के बड़े अंगों और तनों पर कॉपर तथा चूने का लेप लगाएं। आम, अमरूद, पपीता, लीची, अंगूर,आंवला, बेर, नाशपाती, आलू बुखारा एवं नीबू में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें। केला केला रोपण के लिए 1.5 मीटर की दूरी पर 50×50 सें.मी. के गड्ढे बना लें। प्रत्येक गड्ढे को 10 कि.ग्रा. गोबर/कम्पोस्ट की खाद, 10 ग्राम कार्बोफ्यूरॉन, 50 ग्राम फॉस्फोरस तथा खेत के ऊपर की मृदा मिलाकर भरें। रोपित केले में 25 ग्राम नाइट्रोजन पौधे से 50 सें.मी. दूर गोलाई में डालकर मृदा में मिलाकर सिंचाई करें। अंगूर अंगूर के बाग में गर्मी के मौसम में लगातार एक सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई करें। एंथ्रेक्नोज एवं सरकोस्पोरा पत्ती धब्बे के रोगों की रोकथाम के लिए फाइटालोन या ब्लाइटॉक्स का 0.3 प्रतिशत का छिड़काव अर्थात 750 ग्राम 250 लीटर पानी में प्रति एकड़ की मात्रा से एक बार मई के प्रथम सप्ताह में करें और 15 दिनों के अंतराल पर सितम्बर तक करते रहें। कागजी नीबू कागजी नीबू में फल फटने की समस्या के निराकरण के लिए पोटेशियम सल्फेट के 4 प्रतिशत का घोल पानी कागजी नीबू में फल फटने की समस्या के निराकरण के लिए पोटेशियम सल्फेट के 4 प्रतिशत का घोल पानी में मिलाकर छिड़काव करें। उचित जल प्रबंधन गर्मी के कारण उचित जल प्रबंधन आवश्यक होता है। बागवानी फसलों में 10-12 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। जरूरत के अनुसार कटाई-छंटाई करते रहना चाहिए। स्त्रोत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।