हल्दी प्रजातियां हल्दी की प्रजातियां जैसे-कस्तूरी पास्पु, सोनिया, सुगना, अमलापुरम, कृष्णा, राजेन्द्र व मधुकर उपयुक्त हैं। बुआई हल्दी के लिए 15-20 क्विंटल प्रकंदों की प्रति हैक्टर बुआई के लिए आवश्यकता होती है। हल्दी की बुआई 40×20 सें.मी. की दूरी पर व 4 सें.मी. की गहराई पर करें। बुआई से पहले हल्दी के 20-25 ग्राम के टुकड़ों को कॉंपर ऑक्सीक्लोराइड के 0.3 प्रतिशत के घोल में 10 प्रतिशत तक उपचारित करने के बाद बुआई करनी चाहिए। खेत की तैयारी हल्दी के लिए खेत की तैयारी के समय 75 क्विंटल नाडेप खाद या 200-250 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद के साथ 120 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 80 कि.ग्रा. पफॉस्पफोरस व 80 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पहले अन्तिम जुताई के समय प्रति हैक्टर की दर से मृदा में मिला दें। खेत में नमी हल्दी, अदरक व सूरन की बुआई करने के बाद खेत को सूखी पुआल या घास-फूस या सूखी पत्तियों से ढक दें, जिससे खेत में नमी बनी रहे और अंकुरण अच्छा हो सके। इस माह सूरन की बुआई का कार्य पूरा कर लें। अदरक उन्नत किस्में अदरक की सुप्रभा, सुरभि, सुरुचि व हिमगिरी उपयुक्त उन्नत किस्में हैं। बुआई अदरक के लिए 16-18 क्विंटल प्रकंदों की प्रति हैक्टर बुआई के लिए आवश्यकता होती है। इसकी बुआई 30×20 सें.मी. की दूरी पर व 4 सें.मी. की गहराई पर करनी चाहिए। बुआई से पहले अदरक के 20-25 ग्राम टुकड़ों को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के 0.3 प्रतिशत के घोल में 10 प्रतिशत तक उपचारित करने के बाद बुआई करनी चाहिए। खेत की तैयारी अदरक के लिए खेत की तैयारी के समय 75 क्विंटल नाडेप खाद या 200-250 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद के साथ 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फाेरस व 100 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पहले अन्तिम जुताई के समय प्रति हैक्टर की दर से मृदा में मिला दें। टमाटर सिंचाई प्रबंधन टमाटर के फलों को सफेद होने से बचाने के लिए सिंचाई के ठीक प्रबंध के साथ-साथ, 3-4 पंक्तियों के बीच में सनई या ढैंचा लगाएं और ऐसी किस्मों का चयन करें, जिसमें अधिक पत्तियां होती हैं। तम्बाकू की सूंडी एवं सफेद मक्खी अगर खेत में तम्बाकू की सूंडी का प्रकोप हो, तो पफेरोमोन ट्रैप लगाकर इकट्ठा कर, नष्ट कर देना चाहिए। सफेद मक्खी रस चूसक, वायरस को फैलाती है। इसके नियंत्रण के लिए कनफिडोर 0.3 मि.ली./ लीटर को पानी में घोलकर 30 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। फलछेदक सूंडी भिंडी, बैंगन व टमाटर में फलछेदक सूंडी से बचाव के लिए फलों की तुड़ाई के बाद डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी 1.0 मि.ली./ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। निराई-गुड़ाई अच्छी पैदावार के लिए टमाटर में निराई-गुड़ाई करते रहें और पौधे के पास मिट्टी चढ़ाएं। अधिक बढ़ने वाली किस्मों को उपयुक्त सहारा देने के लिए स्टैकिंग करें। बोरॉन का छिड़काव टमाटर के फलों को फटने से बचाने के लिए सिंचाई का उपयुक्त प्रबंध और 0.3-0.4 प्रतिशत बोरॉन का छिड़काव करना चाहिए। स्त्राेत : खेती पत्रिका(भा.कृ.अनु.प.) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर ’सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-११००१२।