<h3 style="text-align: justify;">नाली विधि</h3> <p style="text-align: justify;">गन्ने की बुआई यदि नाली विधि द्वारा करनी है तो नालियों शीघ्र ही बना लें। समतल विधि द्वारा बुआई के समय दो पंख वाले हल से कूड खोलकर बुआई की जाए। दोनों विधियों में गन्ने की पंक्ति पूर्व से पश्चिम ही रखें व पंक्ति से पंक्ति की दूरी 90 सें.मी. रखें।</p> <h3 style="text-align: justify;">बुआई का समय</h3> <p style="text-align: justify;">शरदकालीन गन्ने की बुआई का उपयुक्त समय वर्षा समाप्त होने व जाड़ा शुरू होने के मध्य सितंबर से अक्टूबर तक ही सीमित रहता है। इस बुआई का लाभ उठाने की दृष्टि से समय से बुआई करें। बुआई के लिए बीज, गन्ना क्षेत्र की प्रमाणित पौधशालाओं से ही लें। बुआई के लिए देर से पकने वाली प्रजातियों को ही चुनना चाहिए। बुआई के समय तीन आंख के टुकड़े ही काटने चाहिए। प्रति हैक्टर बुआई के लिए गन्ने की मोटाई के अनुसार 50 से 60 क्विंटल बीज अथवा 37,000-40,000 तक तीन आंख वाले टुकड़े की आवश्यकता होती है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="140" height="123" /></p> <h3 style="text-align: justify;">उपचार</h3> <p style="text-align: justify;">बुआई से पूर्व तीन आंख के पेड़ों की किसी पारायुक्त दवा, जैसे-एरीकान 2 प्रतिशत या 6 प्रतिशत या एग्लाल 3 प्रतिशत अथवा टफासान 3 प्रतिशत या 6 प्रतिशत में से किसी एक घोल में डुबोकर बोना चाहिए। 3 प्रतिशत ताकत वाली दवा की 560 ग्राम मात्रा या 6 प्रतिशत शक्ति की दवा को 280 ग्राम मात्रा को 112 लीटर पानी में घोल तैयार करके इससे बीज को उपचारित करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">शरदकालीन बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">शरदकालीन बुआई के साथ मिश्रित खेती करना आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद सिद्ध हुआ है। मिश्रित खेती में प्रायः बौनी प्रजातियों के गेहूं, मटर, धनिया, आलू आदि सरलतापूर्वक ले सकते हैं। गन्ने की फसल में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें। बुआई के समय 25 से 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन/हैक्टर प्रयोग करना चाहिए। गन्ने की खड़ी फसल में वर्षा के बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करना चाहिए। </p> <h3 style="text-align: justify;">पायरिला एवं गुरुदासपुरबेेधक</h3> <p style="text-align: justify;"> पायरिला कीट की रोकथाम के लिए प्रति हैक्टर सल्फोमिडान 400 मि.ली. या मिथाइल डिमेटान 1.5 लीटर 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।</p> <p style="text-align: justify;"> गन्ने में गुरूदासपुरबेधक व शीर्षबेधक (टॉप बोरर) की रोकथाम के लिए क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर अथवा मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत की 2.0 लीटर मात्रा का 800-1000 लीटर मात्रा में घोलकर छिड़काव करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">यूरिया की टॉप ड्रेसिंग एवं उर्वरक का उपयोग</h3> <p style="text-align: justify;">वसन्तकालीन गन्ने में यदि यूरिया की ट्रॉप ड्रेसिंग शेष रह गई हो, तो सिंचाई उपरान्त 110 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हैक्टर (50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन) की ट्रॉप ड्रेसिंग करें। ध्यान रखें कि उर्वरक की पूर्ण मात्रा जून तक अवश्य डाल दें। इससे उर्वरक का पौधे भरपूर प्रयोग करते हैं व कल्ले कम मरते हैं। वर्षा काल में यूरिया का प्रयोग करने से उसका अधिकांश भाग नष्ट हो जाता है और अपेक्षित लाभ नहीं मिलता है।</p> <p style="text-align: justify;">बंधाई का कार्य</p> <p style="text-align: justify;"> इस माह में गन्ने की तीसरी बंधाई का कार्य पूरा कर लें। पहली पंक्ति के अन्दर ही सवा से डेढ़ मीटर की ऊंचाई पर गन्ने को बांध दें। आगे चलकर दोनों पंक्तियों के गन्ने को एक दूसरे से बांध दें। ध्यान रहे, बांधते समय ऊपर की पत्तियां न टूटें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस राठौर, अमन सिंह और ऋषि राज, सस्य विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली।</p>