जौ बुआई जौ की बुआई के लिए जो बीज प्रयोग में लाया जाए, वह रोगमुक्त एवं प्रमाणित होने के साथ क्षेत्र विशेष के लिए संस्तुत होना चाहिए। बोने से पहले बीज के अंकुरण का परीक्षण जरूर कर लेना चाहिए। जौ, रबी मौसम की फसल है, जिसे सर्दी के मौसम में उगाया जाता है। आमतौर पर जौ की बुआई अक्टूबर से दिसंबर तक की जाती है। असिंचित क्षेत्रों में 20 अक्टूबर से 10 नवंबर तक जौ की बुआई करनी चाहिए, जबकि सिंचित क्षेत्रों में 25 नवंबर तक बुआई कर देनी चाहिए। पछेती जौ की बुआई 15 दिसंबर तक कर देनी चाहिए। उन्नत प्रजातियां असिंचित एवं सिंचित क्षेत्र असिंचित एवं सिंचित क्षेत्रों के लिए जौ की छिलका वाली उन्नत प्रजातियां जैसे-अंबर, ज्योति, आजाद, के 141, आरडी 2035, आरडी 2052, आरडी 2503, गीतांजली (के 1149), डीलमा, नरेंद्र जौ 4 (एनडीबी 943) उसरीली मृदा के लिए आजाद, के.141, जे.बी. 58. आर.डी. 2715. आर.डी. 2786. पी.एल.751 लवणीय एवं क्षारीय भूमि लवणीय एवं क्षारीय भूमि के लिए एन.डी.बी.1173, आर. डी.2552, आर.डी 2794 माल्ट व बीयर के लिए उन्नत प्रजातियां प्रगति, ऋतंभरा, डीएल 88 (6 धारीय), आरडी 2715.डीडब्ल्यू आर 28 व रेखा (2 धारीय) आदि अच्छी है। बीज की मात्रा जौ के लिए 80-100 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर बुआई के लिए उचित है। जौ की बुआई हल के पीछे कूड़ों में अथवा सीडडिल से 20-25 सें.मी. पंक्ति से पंक्ति की दूरी पर 5-6 सें.मी. गहराई पर करें। बीज उपचार असिंचित दशा में 6-8 सें.मी. गहराई में बुआई करें। बीज से पैदा होने वाले रोगों पर नियंत्रण के लिए बीज उपचार आवश्यक है। खुली कंगियारी से बचाव के लिए 2 ग्राम वीटा वैक्स अथवा बाविस्टन से प्रति कि.ग्रा. बीज उपचारित करें। बंद कंगियारी का नियंत्रण बंद कंगियारी के नियंत्रण के लिए थीरम तथा बाविस्टीन/वीटा वैक्स को 1:1 के अनुपात में मिलाकर 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज के लिए प्रयोग करें। उर्वरकों का प्रयोग उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना उचित रहता है। असिंचित दशा के लिए एक हैक्टर में 40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 20 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 20 कि.ग्रा. पोटाश का प्रयोग करें। सिचित एवं समय से बुआई के लिए प्रति हैक्टर 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 30 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 20 कि.ग्रा. पोटाश एवं माल्ट प्रजातियों के लिए 80 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 40 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 20 कि.ग्रा. पोटाश का प्रयोग करें। ऊसर एवं विलंब से बुआई की दशा में नाइट्रोजन 30 कि.ग्रा., फॉस्फेट 20 कि.ग्रा. तथा जिंक सल्फेट 20-25 कि.ग्रा./हैक्टर का प्रयोग करें। गेहूं बुआई गेहूं की प्रति हैक्टर बुआई के लिए 125 कि.ग्रा. बीज एवं पंक्ति से पक्ति की दूरी 23 सें.मी. तथा बीज की गहराई 5-7 सें.मी. रखनी चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर ही करना उचित रहता है। असिंचित/ बारानी तथा सीमित सिंचाई व समय से बुआई के लिए 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 30 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा 20 कि.ग्रा. पोटाश का प्रयोग करें। स्त्राेत: खेती पत्रिका, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीन कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर, सस्य विज्ञान संभाग और अमन सिंह शोध छात्र, आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या-224229 (उत्तर प्रदेश)।