<h3 style="text-align: justify;">मक्के की देखभाल</h3> <p style="text-align: justify;">जब भुट्‌टों को ढकने वाली पत्तियां पीली पड़ने (25-30 प्रतिशत नमी) लगें या ऊपर की पत्तियां सूखने लगें और दाना सखत हो जाए तब मक्का की कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद भुट्‌टों को एक सप्ताह के लिए धूप में सुखाएं तथा दानों में 13-14 प्रतिशत नमी होने पर कॉर्नशेलर की सहायता से इन्हें भुट्‌टों से अलग कर दें। अधिक गुणवत्ता वाले बेबी कॉर्न के लिए इनकी तुड़ाई रेशा (सिल्क) निकलने के 2-3 दिनों के अंतराल पर ही करें। स्वीट कॉर्न में रेशा निकलने के लगभग 20-22 दिनों के बाद वाली अवस्था तुड़ाई के लिए उपयुक्त होती है। इस समय इनमें शुगर की मात्रा सबसे अधिक होती है। भंडारण के लिये दानों को सुखाने की प्रक्रिया तब तक करनी चाहिए, जब तक कि दानों में नमी 8-10 प्रतिशत से अधिक न हो जाये। इन्हें वायु प्रवाहित जूट के थैलों में रखना चाहिए। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC4.jpg" width="287" height="191" /></p> <h3 style="text-align: justify;">ज्वार की देखभाल</h3> <p style="text-align: justify;">ज्वार की विभिन्न प्रजातियां 100-130 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं। फसल पकने पर पौधों की पत्तियां पीले रंग की व सूखी हुई एवं भुट्‌टे पकने के समय दाने गहरे काले रंग के हो जाते हैं। भुट्‌टों में दानों के अंदर जब नमी घटकर 20 प्रतिशत तक रह जाये तो पफसल की कटाई कर लेनी चाहिए। सामान्यतः बाजरे की फसल 75-85 दिनों के अंदर पककर तैयार हो जाती है। बाजरे की बालियां पहले काट ली जाती हैं उसके बाद स्ट्रॉ को काटकर सुखा लेते हैं। बालियों को मंड़ाई से पूर्व अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। बालियों से दाने अलग करने के लिए थ्रेशर का प्रयोग किया जा सकता है या बालियों को डंडों से पीटकर दानों को अलग कर सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;"> <img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC3.jpg" width="208" height="148" /></p> <p style="text-align: justify;">इसके बाद दानों को साफ कर एवं सुखा कर उनका भंडारण किया जाता है। प्रजाति के अनुसार आधुनिक सस्य विधियां अपनाई जाएं तो संकर ज्वार से सिंचित दशा में 35-40 क्विंटल दाने तथा 100-120 क्विंटल कडवी और असिंचित क्षेत्रों में 20-25 क्विंटल दाने तथा 70-80 क्विंटल कडवी/हैक्टर की दर से प्राप्त हो जाती है। भंडारण के समय दानों में नमी की मात्रा 12-14 प्रतिशत होनी चाहिए। भंडारण के लिए लकड़ी या मैटल बिन का प्रयोग किया जा सकता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">बाजरे की देखभाल</h3> <p style="text-align: justify;">बाजरे की फसल पकने के समय पौधों की पत्तियां पीले रंग की एवं सूखी हुई दिखाई देती हैं। फसल पकने पर दाने गहरे काले रंग के हो जाते हैं। सामान्यतः बाजरे की फसल 75-85 दिनों के अंदर पक जाती है। इसकी बालियां पहले काट ली जाती हैं उसके बाद स्ट्रॉ को काटकर सुखा लेते हैं। बालियों को मंड़ाई से पूर्व अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। बालियों से दाने अलग करने के लिए थ्रेशर का प्रयोग किया जा सकता है या बालियों को डंडों से पीटकर दानों को अलग कर सकते हैं। इसके बाद दानों को सापफ व सुखाकर उनका भंडारण किया जाता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और बिपिन कुमार ’सस्य विज्ञान संभाग एवं जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001</p>