बुआई सिंचाई की अच्छी व्यवस्था हो तो मई में भी इसकी बुआई की जा सकती है। बुआई के लिए सीड-कम-फर्टि-ड्रिल अथवा प्लांटर का प्रयोग कर सकते हैं। मृदा कपास के लिए रेतीली लवणीय तथा समे वाली मृदा को छोड़कर सभी प्रकार की मृदा में बुआई की जा सकती है। बीज की मात्रा अमेरिकन, देसी और संकर कपास के लिए क्रमशः 15-20, 10-12 और 4-5 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर बीज पर्याप्त होता है। देसी अथवा अमेरिकन कपास के लिए 60×30 सें.मी. तथा संकर किस्मों के लिए 90×40 सें.मी. कतार से कतार और पौध से पौध की दूरी रखनी चाहिए। प्रजातियां संकर प्रजातियां लक्ष्मी, एच.एस.45, एच.एस.6, एल.एच. 144, एच.एल. 1556, एपफ. 1861, एफ. 1378, एफ. 1378, एफ. 846 देसी प्रजातियां एच. 777, एच.डी. 1, एच. 974, एच.डी. 107, डी.एस.5, एल.डी. 694 एवं एल.डी. 327 उगाई जा सकती है। बीजाेपचार बोने से पूर्व बीज को प्रति कि.ग्रा. 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम या कैप्टॉन दवा से उपचारित कर फसल को राइजोक्टोनिया जड़ गलन फ्यूजेरियम, उकठा और अन्य भूमि जनित फफूंद से होने वाली व्याधियों से बचाया जा सकता है। कार्बेन्डाजिम अंतप्रवाही (सिस्टेमिक) रसायन है, जिससे प्राथमिक अवस्था में रोगों के आक्रमण से बचाया जा सकता है। इमिडाक्लोरोप्रिड 7.0 ग्राम अथवा कार्बोसल्फान 20 ग्राम/कि.ग्रा. बीज उपचारित 40-60 दिनों तक रस चूसक कीटों से सुरक्षा मिलती है। दीमक से बचाव के लिए 10 मि.ली. पानी में 10 मि.ली. क्लोरोपाइरीफॉस मिलाकर बीज पर छिड़क दें तथा 30-40 मिनट छाया में सुखाकर बुआई कर दें। उवर्रकों का प्रयोग उवर्रकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिए। कपास की देसी किस्मों के लिए 50-70 कि.ग्रा. नाइट्रोजेन, 20-30 कि.ग्रा. फास्फोस, अमेरिकन एवं देसी किस्मों के लिए 60-80 कि.ग्रा. नाइट्रोजेन, 30 कि.ग्रा. फास्फोरस, 20-30 कि.ग्रा. पोटाश और संकर किस्मों के लिए 150-60-60 कि.ग्रा. नाइट्रोजेन, फास्फोरस और पोटाश/हैक्टर की आवश्यकता होती है। 25 कि.ग्रा जिंक/हैक्टर का प्रयोग लाभदायक है। नाइट्रोजेन की आधी मात्रा एवं बाकी उवर्रकों की पूरी मात्रा बुआई के समय देनी चाहिए। नाइट्रोजेन की बाकी मात्रा फूल आने के समय सिंचाई के बाद देनी चाहिए। स्त्राेत: राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012