<p style="text-align: justify;">पछेती किस्म के लिए 80-100 कि.ग्राम. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। बुआई 30 सें.मी. की दूरी पर पंक्तियों में करें। बुआई से पूर्व बीज शोधन एवं बीजाेपचार अवश्य करें। एक हैक्टयर खेत में बुआई के समय सब्जी मटर में 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फेट एवं 30 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पूर्व खेत में मिला दें। </p> <p style="text-align: justify;">एक या दो निराई, स्टॉम्प 3 लीटर/ हैक्टर की दर से बुआई के बाद घोल बनाकर छिड़काव करें। तनाछेदक की रोकथाम हेतु फोरेट 10 जी को 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय मृदा में मिला दें। </p> <p style="text-align: justify;">लहसुन के खेत की तैयारी के समय 25-30 टन गोबर की खाद या 7-8 टन नाडेप कम्पोस्ट प्रति हैक्टर की दर से मिला दें। 35-40 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फेट एवं 50 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पहले अन्तिम जुताई के समय प्रयोग करना चाहिए। अक्टूबर में बोये गये लहसुन की निराई-गुड़ाई तथा सिंचाई करें एवं बुआई के 35-40 दिनों बाद लगभग 74 कि.ग्रा. यूरिया की प्रथम टॉप ड्रैसिंग कर दें।</p> <p style="text-align: justify;">यदि लहसुन की बुआई न हुई हो तो इस माह पूरी कर लें। लहसुन के लिए यमुना सफेद (जी-282) प्रजाति उपयुक्त है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सें.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सें.मी. रखते हैं। लहसुन की पुत्ती को 5-7.5 सें.मी. की गहराई पर नुकीला भाग ऊपर रखकर भूमि में बुआई करते हैं। </p> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रति हैक्टर पेंडीमेथलीन 3-4 लीटर मात्राा का छिड़काव बुआई के तुरंत बाद सिंचाई से पहले करना चाहिए। </p> <p style="text-align: justify;">नवंबर में पालक, मूली, मेथी, धनिया एवं फ्रेंचबीन की बुआई की जा सकती है। अक्टूबर में बोयी गयी इन सब्जियों की आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई व सिंचाई अवश्य करें।</p> <p style="text-align: justify;">मैदानी क्षेत्रों में पत्तीदार सब्जियों की बुआई सर्दी के मौसम में सितंबर से नवंबर तक करते हैं। पालक की उन्नत किस्में जैसे-ऑलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, पूसा भारती व जोबनेर ग्रीन एवं मेथी की उन्नत किस्में जैसे-पूसा अर्ली बंचिंग व पूसा कसूरी की बुआई करें। </p> <p style="text-align: justify;">शलजम की किस्में जैसे-पूसा स्वर्णिमा व पूसा चन्द्रिमा की बुआई अक्टूबर से दिसंबर तक कर सकते हैं। पफसल 60-65 दिनों में तैयार हो जाती है। इनकी बुआई 45 सें.मी. दूर बनी मेड़ों पर 1.5 से 2 सें.मी. गहराई पर करें और पौधों पर 15-20 सें.मी. अन्तर बनाएं। </p> <p style="text-align: justify;">शलजम के खेत की तैयारी के समय 10-15 टन गोबर की खाद, 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फॉस्फेट व 50 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पहले अन्तिम जुताई के समय प्रयोग करना चाहिए। चुकंदर में बोरॉन तत्व का प्रभाव भी कापफी होता है। इसकी कमी को दूर करने के लिए बुआई के समय 20-30 कि.ग्रा. बोरेक्स प्रति हैक्टर की दर से मिट्‌टी में मिला दें। </p> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्राण के लिए बुआई से पहले स्टॉम्प नामक खरपतवारनाशी 3 लीटर/हैक्टर की दर से छिड़कें। इससे जड़ बनने की अवस्था तक खरपतवार नियंत्रित रहते हैं और तब पौधों को मिट्‌टी चढ़ाएं। समय-समय पर सिंचाई करके पर्याप्त नमी बनाए रखें।</p>