<h3 style="text-align: justify;">बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">सब्जी मटर की बुआई नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक कर सकते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">उन्नत किस्में </h3> <p style="text-align: justify;">मटर को उन्नत किस्में जैसे-पूसा प्रबल, आजाद पी-1, आजाद पी-3. आजाद पी-5. बोनविले. लिंकन, वी.एल.3 पंत उपहार, जवाहर मटर-1, काशी शक्ति, पालम प्रिया व अर्केल की बुआई करें। पछेती किस्मों के लिए 80-100 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। बुआई 30 सें.मी. की दूरी पर पक्तियों में करें।</p> <h3 style="text-align: justify;"> बीज शोधन एवं बीजोपचार</h3> <p style="text-align: justify;">बुआई से पूर्व बीज शोधन एवं बीजोपचार अवश्य करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">उर्वरक</h3> <p style="text-align: justify;">एक हैक्टर खेत में बुआई के समय सब्जी मटर में 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फेट एवं 30 कि.ग्रा. पोटाश बुआई से पूर्व खेत में मिला दें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">एक या दो हाथों से निराई करने से फसल के जड़ क्षेत्र में वायु संचार बढ़ जाता है। तथा खरपतवार नियंत्रित होने से पौधे और उत्पादन में वृद्धि होती है।</p> <p style="text-align: justify;">रसायनों द्वारा नियंत्रण के लिए पेण्डीमेथलीन 2.5 से 3 लौटर प्रति हैक्टर बुआई से 1 से 3 दिनों के अंदर 500 से 700 लौटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">तनाछेदक की रोकथाम</h3> <p style="text-align: justify;">तनाछेदक को रोकथाम के लिए बुआई के समय फोरेट 10 जी को 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय मृदा में मिला दें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत*, प्रवीण कुमार उपाध्याय एस.एस. राठौर, और अमन सिंह सस्य विज्ञान, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012 एवं आनुवंशिकी विभाग, नितिन कुमार शुक्ला-आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंब, अयोध्या-224229; श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल।</p>