मक्का फसल की देखभाल सिंचाई मक्का, ज्वार और बाजरा मक्का की फसल में अधिक वर्षा होने की स्थिति में खेत से जलनिकास की व्यवस्था अवश्य करें। फसल में नर मंजरी निकलने की अवस्था एवं दाने की दूधियावस्था सिंचाई की दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण है। यदि विगत दिनों में वर्षा न हुई हो या नमी की कमी हो तो सिंचाई अवश्य करें। दानाें काे अलग करना मक्का की दाने के लिए कटाई तब करें, जब भुट्टों के ऊपर की पत्तियां सूखने लगें तथा दाना सख्त हो जाए। इस समय दानों में 25-30 प्रतिशत नमी रहती है। कटाई के बाद भुट्टों को एक सप्ताह के लिए धूप में सुखाएँ तथा बाद में कॉर्न शेलर से दानों को भुट्टों से अलग कर दें। अधिक गुणवत्ता वाली बेबीकॉर्न के लिए इनकी तुड़ाई सिल्क निकलने के 2-3 दिनों के अंतराल पर ही करें तथा स्वीटकॉर्न में रेशा निकलने के लगभग 20-22 दिनों के बाद वाली अवस्था तुड़ाई के लिए उपयुक्त है। इस समय इनमें शुगर की मात्रा सबसे अधिक होती है। ज्वार फसल की देखभाल सिंचाई एवं उर्वरक का उपयाेग ज्वार से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए वर्षा न होने या नमी की कमी होने पर बाली निकलने के समय तथा दाना भरते समय सिंचाई करें।अर्गट या शर्करीय रोग की रोकथाम के लिए रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर जला दें। जीरम का 0.15 प्रतिशत घोल बनाकर फूल आने के समय 7-10 दिनों के अन्तराल पर 2-3 छिड़काव करें। दूसरे छिड़काव के साथ उक्त दवा के साथ 0.1 प्रतिशत कार्बरिल नामक कीटनाशी भी मिला देना चाहिए। ईयर हेडमिज व ईयर हेडबग की रोकथाम करें। ज्वार की फसल पकने पर भुट्टे के हरे दाने सपेफद या पीले रंग में बदल जाते हैं। भुट्टों में दानों के अन्दर जब नमी घटकर 20 प्रतिशत तक रह जाए तो फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। फसल की कटाई ज्वार की फसल पकने पर भुट्टे के हरे दाने सफेद या पीले रंग में बदल जाते हैं। भुट्टों में दानों के अन्दर जब नमी घटकर 20 प्रतिशत तक रह जाए तो फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। संकर ज्वार में फसल पकने तक पौधे हरे बने रहते हैं। खड़ी फसल से भुट्टों की कटाई हंसिया या दरांती से करके, फसल को चारे के रूप में खिलाते रहते हैं। पौधों से भुट्टे अलग करने के बाद, पौधों को सुखाकर सूखे चारे के रूप में रखा जाता है। बाजरा की फसल की देखभाल उर्वरक की मात्रा बाजरा की उन्नत संकर प्रजातियों में नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा यानी 40-50 कि.ग्रा. की टॉप ड्रेसिंग बुआई के 25-30 दिनों बाद करें। बाजरे के अर्गट रोग में दाने के स्थान पर भूरे काले रंग के आकार की गांठें बन जाती हैं। इस रोग की रोकथाम के लिए जीरम 80 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2 कि.ग्रा. अथवा मैन्कोजैब घुलनशील चूर्ण 2 कि.ग्रा. अथवा रीडोमील 25 डब्ल्यूपी (1000 पीपीएम) बुआई के 20-25 दिनों बाद प्रति हैक्टर की दर से 10 दिनों के अन्तराल पर 2 छिड़काव करें। मिज कीट इसका असर बालियों के आते समय देखा गया है। इसके साथ-साथ पत्तियों पर खाने वाले कीटों का असर भी दिखाई दे तो 3 प्रतिशत पफोरेट को 25 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से घोल छिड़कना चाहिए। जब फसल पककर तैयार हो जाए तो उस अवस्था में बालियों को काटकर अलग कर लेना चाहिए। इन बालियों को एक जगह खलिहान में इकट्ठा करके सुखा लें और थ्रेशर से दाना अलग कर लेते हैं। मक्का, ज्वार एवं बाजरा की फसल में नर-मंजरी/बालियां निकलते समय तथा दुधिया अवस्था में सिंचाई द्वारा खेत में नमी प्रबंध करना सुनिश्चित करें। मक्का, ज्वार एवं बाजरा फसल की कटाई के उपरान्त सूखे दानें निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखें। स्त्राेत : राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012, खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।